{"_id":"126-84688","slug":"Faizabad-84688-126","type":"story","status":"publish","title_hn":"संत-महंतों के कत्ल की वजह बनती धन लिप्सा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संत-महंतों के कत्ल की वजह बनती धन लिप्सा
Faizabad
Updated Mon, 01 Sep 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। संत विजय राम दास से पहले भी धर्मनगरी में कई संत-महंतों की हत्याएं हो चुकी हैं। इनमें अधिकांश हत्याओं के पीछे संपत्ति विवाद और मंदिरों पर कब्जे के प्रयास ही प्रमुख कारण रहे हैं। सर्वाधिक मामले हनुमानगढ़ी व उससे जुड़ी संपत्ति पर कब्जेदारी को लेकर सामने आए हैं। वर्ष 1984 में हनुमानगढ़ी की बासंतिया पट्टी के महंत शुभकरन दास की हत्या कर लाश परिसर स्थित कुएं में फेंक दी गई थी। वर्ष 1999 में हनुमानगढ़ी की ही पट्टी से जुड़े रामाज्ञा दास की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 90 के दशक में ही लाड़ली मंदिर के महंत जगतनारायन दास की नृशंस हत्या हनुमानगढ़ी के निकट कर दी गई थी। यह हत्या बरगदवा मंदिर के स्वामित्व व कब्जे के विवाद में की गई थी। वर्ष 2001 में कनीगंज स्थित सोना मंदिर के महंत का अपहरण कर लिया गया, जिसका आज तक पता नहीं चला। यह वारदात भी मंदिर पर कब्जे के विवाद में की गई थी। वर्ष 1993 में जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत मैथली शरण की मंदिर में ही उनके कमरे में हत्या कर दी गई। हत्या के पीछे मंदिर पर कब्जे का मामला चर्चा में रहा।
वर्ष 1996 में शुक्ल मंदिर के महंत रामशंकर दास की दिन दहाड़े हत्या कर दी गई। उनका भी विवाद मंदिर पर कब्जे को लेकर चल रहा था। वर्ष 1997 में बाबा रामकृपाल दास की रामघाट स्थित सनातन मंदिर से चंद कदम की दूरी पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या में भी मंदिर पर कब्जे व अन्य मंदिरों की संपत्ति का विवाद सामने आया था। वर्ष 1999 में विद्याकुंड स्थित बड़ा स्थान के महंत रामकृपाल दास की पड़ोसी जिले बस्ती में हत्या कर दी गई। इस हत्या में भी मंदिर की संपत्ति का विवाद अहम कारण रहा। रामकृपाल के ही शिष्यों में शुमार प्रह्लाद दास की लगभग वर्ष भर पूर्व बस्ती जिले में हत्या कर दी गई। एक अन्य साथी हरिनारायण दास को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। उदासीन संप्रदाय से जुड़े स्वर्गद्वार स्थित आयाराम अखाड़े के महंत रामदेव दास की भी कुछ माह पूर्व गोंडा जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके पीछे मंदिर की संपत्ति को लेकर हत्या उनके ही शिष्य से कराए जाने का मामला सुर्खियों में रहा। कुछ माह पूर्व ही वासुदेवघाट स्थित बैकुंठ धाम के महंत अयोध्या दास की सरयू पार गोंडा जिले में हत्या कर लाश फेंक दी गई। मामले के खुलासे में मंदिर की संपत्ति पर कब्जे का विवाद सामने आया था।
विज्ञापन
वर्ष 1996 में शुक्ल मंदिर के महंत रामशंकर दास की दिन दहाड़े हत्या कर दी गई। उनका भी विवाद मंदिर पर कब्जे को लेकर चल रहा था। वर्ष 1997 में बाबा रामकृपाल दास की रामघाट स्थित सनातन मंदिर से चंद कदम की दूरी पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या में भी मंदिर पर कब्जे व अन्य मंदिरों की संपत्ति का विवाद सामने आया था। वर्ष 1999 में विद्याकुंड स्थित बड़ा स्थान के महंत रामकृपाल दास की पड़ोसी जिले बस्ती में हत्या कर दी गई। इस हत्या में भी मंदिर की संपत्ति का विवाद अहम कारण रहा। रामकृपाल के ही शिष्यों में शुमार प्रह्लाद दास की लगभग वर्ष भर पूर्व बस्ती जिले में हत्या कर दी गई। एक अन्य साथी हरिनारायण दास को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। उदासीन संप्रदाय से जुड़े स्वर्गद्वार स्थित आयाराम अखाड़े के महंत रामदेव दास की भी कुछ माह पूर्व गोंडा जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके पीछे मंदिर की संपत्ति को लेकर हत्या उनके ही शिष्य से कराए जाने का मामला सुर्खियों में रहा। कुछ माह पूर्व ही वासुदेवघाट स्थित बैकुंठ धाम के महंत अयोध्या दास की सरयू पार गोंडा जिले में हत्या कर लाश फेंक दी गई। मामले के खुलासे में मंदिर की संपत्ति पर कब्जे का विवाद सामने आया था।
विज्ञापन