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भव्यता के साथ फैजाबाद महोत्सव का आगाज
Faizabad
Updated Mon, 10 Feb 2014 05:43 AM IST
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फैजाबाद। अवधी संस्कृति को सहेजे रखने के लिए जीआईसी प्रांगण में रविवार को फैजाबाद महोत्सव की शुरुआत हो गई। एक सप्ताह तक चलने वाले महोत्सव का उद्घाटन करते हुए मनोरंजन कर राज्य मंत्री तेजनारायन पांडेय पवन ने कहा कि अवध की कला, संस्कृति आदि को सहेजने व उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में फैजाबाद महोत्सव मील का पत्थर साबित होगा। कहा कि हमारी कोशिश होगी कि सरकार व जनता के सहयोग से महोत्सव का आयोजन प्रति वर्ष होता रहे। इससे लोग अपनी तहजीब और संस्कृति से रूबरू होंगे तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए यह एक सीख होगा।
जीआईआईसी, आर्यकन्या इंटर कॉलेज व प्रामिनेंट स्कूल की छात्राओं ने अतिथियों का स्वागत गीत के माध्यम से किया। उद्घाटन के समय डीएम इंद्रवीर यादव, एसएसपी कृष्ण बहादुर सिंह, मुख्य विकास अधिकरी अखंड प्रताप सिंह, कवि अशोक टांटाबरी सहित कला, साहित्य व समाजसेवा से जुड़े अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन विवेकानंद ने किया। इसके बाद किसान सम्मेलन हुआ जिसमें कृषि विज्ञानियों ने खेती-किसानी से जुड़ी अनेक जानकारियां दी। फिलहाल किसान सम्मेलन के बाबत महोत्सव समिति के अध्यक्ष हरीश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि यह कार्यक्रम यहां जरूर हुआ था लेकिन वह आयोजन हमारा नहीं था। जीआईसी परिसर में विभिन्न कंपनियों के सौ स्टॉल लगे हुए हैं। यह बात दीगर है कि ये स्टॉल पहले दिन सूने-सूने नजर आ रहे हैं। महोत्सव समिति ने कार्यक्रम स्थल के बीच कला गांव बनवाया है जो पूरी तरह ‘गांव-गिरांव की संस्कृति’ की गरिमापूर्ण अभिव्यक्ति कर रहे हंै।
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जीआईआईसी, आर्यकन्या इंटर कॉलेज व प्रामिनेंट स्कूल की छात्राओं ने अतिथियों का स्वागत गीत के माध्यम से किया। उद्घाटन के समय डीएम इंद्रवीर यादव, एसएसपी कृष्ण बहादुर सिंह, मुख्य विकास अधिकरी अखंड प्रताप सिंह, कवि अशोक टांटाबरी सहित कला, साहित्य व समाजसेवा से जुड़े अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन विवेकानंद ने किया। इसके बाद किसान सम्मेलन हुआ जिसमें कृषि विज्ञानियों ने खेती-किसानी से जुड़ी अनेक जानकारियां दी। फिलहाल किसान सम्मेलन के बाबत महोत्सव समिति के अध्यक्ष हरीश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि यह कार्यक्रम यहां जरूर हुआ था लेकिन वह आयोजन हमारा नहीं था। जीआईसी परिसर में विभिन्न कंपनियों के सौ स्टॉल लगे हुए हैं। यह बात दीगर है कि ये स्टॉल पहले दिन सूने-सूने नजर आ रहे हैं। महोत्सव समिति ने कार्यक्रम स्थल के बीच कला गांव बनवाया है जो पूरी तरह ‘गांव-गिरांव की संस्कृति’ की गरिमापूर्ण अभिव्यक्ति कर रहे हंै।
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