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डिरेलमेंट की वजह तलाशने दिल्ली से पहुंचे सीईएन
Faizabad
Updated Sun, 29 Dec 2013 05:44 AM IST
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फैजाबाद (ब्यूरो)। मॉडल रेलवे स्टेशन पर डिरेलमेंटों से खफा चीफ इंजीनियर (सीईएन) राजेश अग्रवाल नई दिल्ली से शनिवार सुबह ही यहां आ धमके और शाम तक लाइनों व यार्ड का बारीकी से निरीक्षण किया। इंजीनियरिंग विभाग का प्रमुख होने के कारण पीडब्ल्यूआई की खामियों के लिए एडीईएन राजेश कुमार यादव को फटकार लगाई। सीनियर सेक्शन इंजीनियर एसआरआर रिजवी भी लाइनों में जलभराव को लेकर निशाने पर रहे। उन्हें लताड़ लगाने के साथ ही मशीन से लाइनों पर जलभराव का लेबल निकलवाया और अपने सामने ही देर शाम तक पूरे स्टेशन का प्रपोजल तैयार करवाकर उसे साथ ले गए।
सूत्रों की मानें तो सीईएन सुबह ही दिल्ली-फैजाबाद से यहां आ गए थे। उन्होंने सुबह ही इंस्पेक्शन को यार्ड की ओर रुख किया। लाइनों को घास-मिट्टी व गिट्टी में धंसी देखकर वह दंग रह गए। लाइनों, क्रॉस लेबलों और गेज में कमियां मिलीं तो सहायक मंडल अभियंता (एडीईएन) राजेश कुमार यादव से पूछ ही लिया, आप कितने दिन से यहां तैनात हैं? जवाब मिला तीन साल। इस पर सीईएन ने कहा ‘आपने इन तीन वर्षों में क्या देखा और क्या किया? ट्रैकों की बदतर होती जा रही दशा को कैसे बर्दाश्त करते हुए चुपचाप बैठे रह गए?’
उन्होंने एक सप्ताह में सारी कमियां दूर कराने को कहा। लाइनों में जलभराव देखकर सहायक सेक्शन इंजीनियर (एसएसई) एसआरआर रिजवी से पूछा कि लाइनों व वाशिंग लाइन में इन दिनों पानी कैसे भरा है? अपने सामने ही लेबल निकलवाकर प्रपोजल तैयार करवाया और उसे लेकर शाम को सड़क मार्ग से लखनऊ चले गए।
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सूत्रों की मानें तो सीईएन सुबह ही दिल्ली-फैजाबाद से यहां आ गए थे। उन्होंने सुबह ही इंस्पेक्शन को यार्ड की ओर रुख किया। लाइनों को घास-मिट्टी व गिट्टी में धंसी देखकर वह दंग रह गए। लाइनों, क्रॉस लेबलों और गेज में कमियां मिलीं तो सहायक मंडल अभियंता (एडीईएन) राजेश कुमार यादव से पूछ ही लिया, आप कितने दिन से यहां तैनात हैं? जवाब मिला तीन साल। इस पर सीईएन ने कहा ‘आपने इन तीन वर्षों में क्या देखा और क्या किया? ट्रैकों की बदतर होती जा रही दशा को कैसे बर्दाश्त करते हुए चुपचाप बैठे रह गए?’
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उन्होंने एक सप्ताह में सारी कमियां दूर कराने को कहा। लाइनों में जलभराव देखकर सहायक सेक्शन इंजीनियर (एसएसई) एसआरआर रिजवी से पूछा कि लाइनों व वाशिंग लाइन में इन दिनों पानी कैसे भरा है? अपने सामने ही लेबल निकलवाकर प्रपोजल तैयार करवाया और उसे लेकर शाम को सड़क मार्ग से लखनऊ चले गए।
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