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सावन मास शुरू,बम भोले के जयकारों से गूंजी रामनगरी
Updated Sat, 28 Jul 2018 10:32 PM IST
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अयोध्या। सावन मास आरंभ होते ही रामनगरी में जय श्रीराम के साथ हर-हर, बम-बम के जयकारे गूंजने लगे हैं। सावन मास का पहला सोमवार 30 जुलाई को है, इस दिन रामनगरी में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए कावंरिया भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। अयोध्या समेत पूरे जिले में पहले सोमवार के मद्देनजर प्राचीन शिवालयों में जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक की तैयारी पूरी कर ली गई है।
सावन शुरू होते ही रामनगरी के चौक चौराहों पर कावंरियों भक्तों का समूह नजर आने लगा है। इस मास में बड़ी संख्या में कांवरिया भक्त अयोध्या में उमड़ते हैं और नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ, रामलला, कनकभवन, हनुमानगढ़ी सहित अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं।
पड़ोसी जिलों गोंडा, बस्ती, अंबेडकरनगर, टांडा आदि स्थानों से लाखों की संख्या में कांवरिया-भक्त सावन के प्रत्येक सोमवार पर अयोध्या पहुंचकर भगवान शिव का पूजन-अर्चन करते हैं। इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होती है। प्रमुख शिवालयों में भारी भीड़ को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पुलिस व प्रशासन ने कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं।
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एसपीसिटी अनिल सिंह सिसौदिया ने बताया कि कावंड़ियों की भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रमुख मठ-मंदिरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मेला क्षेत्र की प्रत्येक गतिविधियां सीसीटीवी की निगहबानी में होंगी।
यहां होगी वाहनों की पार्किंग
मेला सुरक्षा अधिकारी एसपीसिटी अनिल सिंह सिसौदिया ने बताया कि साकेत पेट्रोल पंप के पास खाली स्थान व बालूघाट तिराहा, लक्ष्मण विद्या मंदिर के पास, श्रीराम अस्पताल तिराहा के पास, पुराना रोडवेज, कटरा रेलवे स्टेशन के पास खाली मैदान, रामघाट चैराहे से बूथ नंबर 4 तक व रामघाट चैराहे से बालूघाट बरेहटा तक रोड के किनारे कावंरियां श्रद्धालुओं के वाहन पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
सावन में शिव की उपासना अत्यन्त फलदायी
सावन मास में शिव भक्ति का पुराणों में भी उल्लेख मिलता है। जंत्र ज्ञानी-मंत्र मर्मज्ञ साहित्यकार डॉ. रामानंद शुक्ल बताते हैं कि समुद्र मथने के बाद जो विष निकला उसे भगवान शंकर ने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया। इसी से उनका नाम नीलकंठ महादेव पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने का खास महत्व है।
यही वजह है कि श्रावण मास में भोले को जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। डॉ. शुक्ल बताते हैं कि शिवपुराण में उल्लेख है कि भगवान शिव स्वयं ही जल हैं। इसलिए जल से उनका अभिषेक का उत्तमोत्तम फल है । सावन के महीने में सोमवार के दिन शिवजी को एक बिल्व पत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। इसलिए इन दिनों शिव की उपासना का बहुत महत्व है।
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सावन शुरू होते ही रामनगरी के चौक चौराहों पर कावंरियों भक्तों का समूह नजर आने लगा है। इस मास में बड़ी संख्या में कांवरिया भक्त अयोध्या में उमड़ते हैं और नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ, रामलला, कनकभवन, हनुमानगढ़ी सहित अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं।
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पड़ोसी जिलों गोंडा, बस्ती, अंबेडकरनगर, टांडा आदि स्थानों से लाखों की संख्या में कांवरिया-भक्त सावन के प्रत्येक सोमवार पर अयोध्या पहुंचकर भगवान शिव का पूजन-अर्चन करते हैं। इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होती है। प्रमुख शिवालयों में भारी भीड़ को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पुलिस व प्रशासन ने कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं।
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एसपीसिटी अनिल सिंह सिसौदिया ने बताया कि कावंड़ियों की भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रमुख मठ-मंदिरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मेला क्षेत्र की प्रत्येक गतिविधियां सीसीटीवी की निगहबानी में होंगी।
यहां होगी वाहनों की पार्किंग
मेला सुरक्षा अधिकारी एसपीसिटी अनिल सिंह सिसौदिया ने बताया कि साकेत पेट्रोल पंप के पास खाली स्थान व बालूघाट तिराहा, लक्ष्मण विद्या मंदिर के पास, श्रीराम अस्पताल तिराहा के पास, पुराना रोडवेज, कटरा रेलवे स्टेशन के पास खाली मैदान, रामघाट चैराहे से बूथ नंबर 4 तक व रामघाट चैराहे से बालूघाट बरेहटा तक रोड के किनारे कावंरियां श्रद्धालुओं के वाहन पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
सावन में शिव की उपासना अत्यन्त फलदायी
सावन मास में शिव भक्ति का पुराणों में भी उल्लेख मिलता है। जंत्र ज्ञानी-मंत्र मर्मज्ञ साहित्यकार डॉ. रामानंद शुक्ल बताते हैं कि समुद्र मथने के बाद जो विष निकला उसे भगवान शंकर ने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया। इसी से उनका नाम नीलकंठ महादेव पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने का खास महत्व है।
यही वजह है कि श्रावण मास में भोले को जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। डॉ. शुक्ल बताते हैं कि शिवपुराण में उल्लेख है कि भगवान शिव स्वयं ही जल हैं। इसलिए जल से उनका अभिषेक का उत्तमोत्तम फल है । सावन के महीने में सोमवार के दिन शिवजी को एक बिल्व पत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। इसलिए इन दिनों शिव की उपासना का बहुत महत्व है।