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जीवन में पूर्णता के लिए गुरुकृपा जरूरी : मंदाकिनी रामकिंकर
Updated Sun, 09 Jul 2017 01:03 AM IST
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रामकिंकर सम्मान समारोह से अलंकृत हुई तीन विभूतियां
अयोध्या। गुरुपूर्णिमा के अवसर पर रामायणम् ट्रस्ट में रामकिंकर सम्मान समारोह हुआ। समारोह को बतौर अध्यक्ष मंदाकिनी रामकिंकर ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में पूर्णता की प्राप्ति के लिए गुरु कृपा अत्यन्त महत्वपूर्ण है। पूर्ण समर्थ सदगुरुमिल जाये तो जीवन धन्य हो जाता है। कृपा का स्रोत गुरुदेव ही हैं।
मंदाकिनी जी ने कहा कि व्यक्ति को गर्व नहीं करना चाहिए, अभिमान जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है। ज्ञान मार्ग, भक्ति मार्ग, कर्म मार्ग पर चलने वाले साधकों को रामचरित मानस से प्रेरणा मिलती है। प्रत्येक व्यक्ति का परिचय केवल स्थूल शरीर नही हैं सबके पास अन्त:करण है।
यही स्थूल शरीर को संचालित करता है। अन्त:करण विकारों से भरा है, मलिन है तो जीवन में पूर्णत: का बोध नहीं होगा। जो साधक गुरु के अनुशासन को स्वीकारता है, जो अज्ञान दूर करना चाहता है, जो पूर्णता चाहता है, जो गुरुमय होना चाहता है वही आदर्श शिष्य है।
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समारोह पूर्व कुलपति डा. दिनेश चन्द्र चमोला ने कहा कि मनुष्य मोह रूपी बंधन को त्यागकर सर्वव्यापी हो सकता है। महापुरुष सदा सर्वदा विद्यमान रहते हैं, महापुरुष परंपरा के रूप में आते हैं। इस अवसर पर श्रीरामकिंकर साहित्य का लोकार्पण किया गया।
समारोह में पूर्व कुलपति डॉ. दिनेशचन्द्र चमोला, डॉ. आरएस दूबे व वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शर्मा को रामकिंकर सम्मान से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर पत्रकार शीतला सिंह, दीपकृष्ण वर्मा, रमेश श्रीवास्तव, मनीष कोरी, विकास मेहरोत्रा मौजूद रहे।
मंदाकिनी ने बताया कि 9 जुलाई को आश्रम में गुरुपूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया जायेगा। प्रात:काल सद्गुरुदेव भगवान का महाभिषेक, पूजन एवं आरती, तथा यज्ञ अनुष्ठान, अपराह्न पादुका पूजन तथा दरिद्रनारायण को वस्त्र एवं भोजन वितरण किया जायेगा। शाम को 7 से 9 बजे तक श्री युगल सरकार एवं गुरुदेव का झूलनोत्सव होगा।
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अयोध्या। गुरुपूर्णिमा के अवसर पर रामायणम् ट्रस्ट में रामकिंकर सम्मान समारोह हुआ। समारोह को बतौर अध्यक्ष मंदाकिनी रामकिंकर ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में पूर्णता की प्राप्ति के लिए गुरु कृपा अत्यन्त महत्वपूर्ण है। पूर्ण समर्थ सदगुरुमिल जाये तो जीवन धन्य हो जाता है। कृपा का स्रोत गुरुदेव ही हैं।
मंदाकिनी जी ने कहा कि व्यक्ति को गर्व नहीं करना चाहिए, अभिमान जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है। ज्ञान मार्ग, भक्ति मार्ग, कर्म मार्ग पर चलने वाले साधकों को रामचरित मानस से प्रेरणा मिलती है। प्रत्येक व्यक्ति का परिचय केवल स्थूल शरीर नही हैं सबके पास अन्त:करण है।
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यही स्थूल शरीर को संचालित करता है। अन्त:करण विकारों से भरा है, मलिन है तो जीवन में पूर्णत: का बोध नहीं होगा। जो साधक गुरु के अनुशासन को स्वीकारता है, जो अज्ञान दूर करना चाहता है, जो पूर्णता चाहता है, जो गुरुमय होना चाहता है वही आदर्श शिष्य है।
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समारोह पूर्व कुलपति डा. दिनेश चन्द्र चमोला ने कहा कि मनुष्य मोह रूपी बंधन को त्यागकर सर्वव्यापी हो सकता है। महापुरुष सदा सर्वदा विद्यमान रहते हैं, महापुरुष परंपरा के रूप में आते हैं। इस अवसर पर श्रीरामकिंकर साहित्य का लोकार्पण किया गया।
समारोह में पूर्व कुलपति डॉ. दिनेशचन्द्र चमोला, डॉ. आरएस दूबे व वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शर्मा को रामकिंकर सम्मान से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर पत्रकार शीतला सिंह, दीपकृष्ण वर्मा, रमेश श्रीवास्तव, मनीष कोरी, विकास मेहरोत्रा मौजूद रहे।
मंदाकिनी ने बताया कि 9 जुलाई को आश्रम में गुरुपूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया जायेगा। प्रात:काल सद्गुरुदेव भगवान का महाभिषेक, पूजन एवं आरती, तथा यज्ञ अनुष्ठान, अपराह्न पादुका पूजन तथा दरिद्रनारायण को वस्त्र एवं भोजन वितरण किया जायेगा। शाम को 7 से 9 बजे तक श्री युगल सरकार एवं गुरुदेव का झूलनोत्सव होगा।