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दीपोत्सव में 900 लोक कलाकार बिखेरेंगे रंग
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अयोध्या। योगी सरकार के पांचवें दीपोत्सव को ऐतिहासिक बनाने के लिए शासन-प्रशासन जुटा हुआ है। इस बार रामनगरी अयोध्या में रिकॉर्ड नौ लाख दीप जलेंगे। मठ-मंदिर से लेकर घर-घर रोशन करने की तैयारी है।
दीपोत्सव में विभिन्न राज्यों के करीब 900 लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। ऐशबाग की रामलीला, जयपुर का कालबेलिया, हरियाणा का बीन जोगी, झारखंड का छाऊ, नोएडा का गुजरी नृत्य आकर्षण का केंद्र होगा।
इस बार 01 से 06 नवंबर तक आयोजित होने वाला दीपोत्सव न सिर्फ भव्यता का पर्याय होगा बल्कि इस दीपोत्सव को इतिहास के पन्नों में दर्ज कराने की तैयारी है।
दीपोत्सव में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, झारखंड, नोएडा, झांसी, नागपुर, पंजाब आदि राज्यों के करीब 900 कलाकार लोक संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। लखनऊ के करीब एक दर्जन कलाकार अवधी लोकनृत्य की प्रस्तुति देंगे।
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जयपुर के कलाकार कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति देंगे। पंजाब का भंगड़ा नृत्य भी दीपोत्सव की शोभा बढ़ाएगा। बांदा का पाई डंडा, मथुरा का बम रसिया, झांसी का राई नृत्य, सोनभद्र का मानल वादन के जरिए लोक संस्कृति की समृद्धि की झलक दिखेगी।
आजमगढ़ व गाजीपुर के कलाकार धोबिया नृत्य की प्रस्तुति देंगे। इस बार उड़ीसा के कलाकारों द्वारा शंख व मृदंगम की बेहतरीन प्रस्तुति भी दी जाएगी। नोएडा का गुजरी नृत्य आकर्षण का केंद्र होगा।
हरियाणा के कलाकारों द्वारा हरियाणवी नृत्य तो झारखंड के कलाकारों द्वारा छाऊ नृत्य की प्रस्तुति दीपोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करेगी।
इस बार कोरोना के चलते केवल श्रीलंका की ही रामलीला दीपोत्सव में होगी। श्रीलंका के 15 कलाकारों की टीम रामलीला का मंचन करेगी। इसके अलावा मिशन शक्ति अभियान के जरिए भी दीपोत्सव में संदेश देने का काम जाएगा। शबरी प्रसंग का मंचन भी होने की संभावना है।
दीपोत्सव में रामकथा आधारित चित्रकला प्रतियोगिता का भी रामकथा संग्रहालय में आयोजन किया जाएगा। इसमें जनपद के करीब 24 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को आमंत्रित किया जाएगा।
ये छात्र रामकथा आधारित पेंटिंग बनाएंगे। इन चित्रों की यहां प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रतियोगिता के विजयी छात्रों को दीपोत्सव में ही पुरस्कृत किया जाएगा।
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दीपोत्सव में विभिन्न राज्यों के करीब 900 लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। ऐशबाग की रामलीला, जयपुर का कालबेलिया, हरियाणा का बीन जोगी, झारखंड का छाऊ, नोएडा का गुजरी नृत्य आकर्षण का केंद्र होगा।
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इस बार 01 से 06 नवंबर तक आयोजित होने वाला दीपोत्सव न सिर्फ भव्यता का पर्याय होगा बल्कि इस दीपोत्सव को इतिहास के पन्नों में दर्ज कराने की तैयारी है।
दीपोत्सव में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, झारखंड, नोएडा, झांसी, नागपुर, पंजाब आदि राज्यों के करीब 900 कलाकार लोक संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। लखनऊ के करीब एक दर्जन कलाकार अवधी लोकनृत्य की प्रस्तुति देंगे।
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जयपुर के कलाकार कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति देंगे। पंजाब का भंगड़ा नृत्य भी दीपोत्सव की शोभा बढ़ाएगा। बांदा का पाई डंडा, मथुरा का बम रसिया, झांसी का राई नृत्य, सोनभद्र का मानल वादन के जरिए लोक संस्कृति की समृद्धि की झलक दिखेगी।
आजमगढ़ व गाजीपुर के कलाकार धोबिया नृत्य की प्रस्तुति देंगे। इस बार उड़ीसा के कलाकारों द्वारा शंख व मृदंगम की बेहतरीन प्रस्तुति भी दी जाएगी। नोएडा का गुजरी नृत्य आकर्षण का केंद्र होगा।
हरियाणा के कलाकारों द्वारा हरियाणवी नृत्य तो झारखंड के कलाकारों द्वारा छाऊ नृत्य की प्रस्तुति दीपोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करेगी।
इस बार कोरोना के चलते केवल श्रीलंका की ही रामलीला दीपोत्सव में होगी। श्रीलंका के 15 कलाकारों की टीम रामलीला का मंचन करेगी। इसके अलावा मिशन शक्ति अभियान के जरिए भी दीपोत्सव में संदेश देने का काम जाएगा। शबरी प्रसंग का मंचन भी होने की संभावना है।
दीपोत्सव में रामकथा आधारित चित्रकला प्रतियोगिता का भी रामकथा संग्रहालय में आयोजन किया जाएगा। इसमें जनपद के करीब 24 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को आमंत्रित किया जाएगा।
ये छात्र रामकथा आधारित पेंटिंग बनाएंगे। इन चित्रों की यहां प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रतियोगिता के विजयी छात्रों को दीपोत्सव में ही पुरस्कृत किया जाएगा।