{"_id":"5b181b144f1c1bae6e8b69b9","slug":"71528306452-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बगैर डॉक्टर चल रहा मंडलीय अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बगैर डॉक्टर चल रहा मंडलीय अस्पताल
Updated Wed, 06 Jun 2018 11:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा मंडलीय अस्पताल
फैजाबाद। सौ शय्या का मंडलीय चिकित्सालय दर्शननगर इन दिनों चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। बीते माह एक और फिजीशियन के इस्तीफा देने व एक के मेडिकल अवकाश पर होने से इन दिनों भीषण गर्मी में ओपीडी फिजीशियन विहीन है, जबकि फिजीशियन के अधिकांश मामले इन दिनों पहुंच रहे हैं। मजबूरी में बाल रोग विशेषज्ञों से काम चलाया जा रहा है।
हाईकोर्ट की जवाबदेही से बचने के लिए आनन-फानन संचालित किए गए मंडलीय चिकित्सालय की दशा लगातार बिगड़ती जा रही है। बिना चिकित्सकों के संसाधनों का बेहतर उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसी बदहाली की वजह से अब मरीज भी यहां अपेक्षाकृत कम पहुंच रहे हैं और बीते वर्ष 1200 के पार पहुंचने वाली ओपीडी भी करीब-करीब आधी हो गई है।
अस्पताल में सभी विभागों के कुल 40 चिकित्सकों के पद सृजित हैं, जिसके सापेक्ष 17 की तैनाती की गई थी। जिनसे किसी तरह सभी आवश्यक सेवाएं शुरू हो सकी थीं, फिर भी हर पायदान पर विशेषज्ञों की कमी अखरती थी। अस्पताल शुरू होने से आज तक नाक, कान, गला, त्वचा, दांत आदि के चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई।
विज्ञापन
इसके अलावा मेडिसिन, सर्जन, आर्थो के सभी छह पद रिक्त हो चुके हैं। इन दिनों गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऐसे में उल्टी-दस्त, डायरिया, पेट संबंधी अन्य बीमारियों के मरीज बहुतायत संख्या में पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन की ओपीडी में ऐसे मरीजों की तादाद करीब 70 फीसदी हो रही है, लेकिन इनके इलाज के लिए एक भी विशेषज्ञ नहीं हैं।
फरवरी माह के समीप डॉ. विवेक मिश्र ने इस्तीफा दे दिया था। फिजीशियन डॉ. अवधेश पटेल ने भी बीते माह इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा फिजीशियन डॉ. निशांत सक्सेना 20 दिनों से अवकाश पर हैं। ऐसे में अस्पताल इन दिनों फिजीशियन विहीन हो गया है। ऐसे मामले या तो बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक राय व डॉ. मनोज कार्तिकेय के पास भेजे जाते हैं या मरीज अन्यत्र चला जा रहा है।
इसके अलावा डॉ. फातिमा भी ओपीडी में सहयोग कर रही हैं। सर्जन डॉ. वशी को टांडा से संबद्ध किया गया है। जिनके जिम्मे ओपीडी, भर्ती मरीजों के साथ ट्रॉमा की जिम्मेदारी है। वहीं एकमात्र आर्थो सर्जन रहे डॉ. ओपी चौधरी का भी तबादला बस्ती जिले कर दिया गया है। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. आराधना लंबे समय से अवकाश पर हैं।
ओपीडी में बुधवार को एक बाल रोग विशेषज्ञ, दो एमबीबीएस, एक नेत्र सर्जन, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ ही मौजूद रहे। हड्डी के मरीजों को भटकता देखकर सीएमएस डॉ. घनश्याम सिंह ने स्वयं कुछ देर तक मरीजों को देखा, लेकिन प्रशासनिक कार्य अधिक होने से वे भी अधिक समय नहीं दे सके। आलम यह रहा कि पेट दर्द, डायरिया सहित गर्मी के अन्य बीमारियों के तमाम मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा।
नहीं मिले डॉक्टर..
बुधवार को पिता सीने में परेशानी होने से इलाज के लिए आए नंदापुर के सत्यम, डायरिया से पीड़ित रमेश कनौजिया, तिहुरा के रामबचन, सुषमा ने बताया कि तीन दिन से इलाज के लिए दौड़ रहे हैं, लेकिन डॉक्टर ही गायब हैं। ऐसे में यहां रोज आना-जाना बेकार हो रहा है। अस्पताल बनने का कोई औचित्य नहीं है, जब डॉक्टर ही नहीं बैठते हैं।
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी पहले से ही थी। अब तैनात चिकित्सकों में से भी दो इस्तीफा दे चुके हैं व कुछ अवकाश पर हैं। मौजूदा समय में एक भी फिजीशियन नहीं है, जबकि प्रतिदिन ओपीडी में फिजीशियन के मामले ही अधिक आ रहे हैं। लिखा पढ़ी की जा रही है।-डॉ. घनश्याम सिंह, सीएमएस मंडलीय चिकित्सालय दर्शननगर
विज्ञापन
फैजाबाद। सौ शय्या का मंडलीय चिकित्सालय दर्शननगर इन दिनों चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। बीते माह एक और फिजीशियन के इस्तीफा देने व एक के मेडिकल अवकाश पर होने से इन दिनों भीषण गर्मी में ओपीडी फिजीशियन विहीन है, जबकि फिजीशियन के अधिकांश मामले इन दिनों पहुंच रहे हैं। मजबूरी में बाल रोग विशेषज्ञों से काम चलाया जा रहा है।
हाईकोर्ट की जवाबदेही से बचने के लिए आनन-फानन संचालित किए गए मंडलीय चिकित्सालय की दशा लगातार बिगड़ती जा रही है। बिना चिकित्सकों के संसाधनों का बेहतर उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसी बदहाली की वजह से अब मरीज भी यहां अपेक्षाकृत कम पहुंच रहे हैं और बीते वर्ष 1200 के पार पहुंचने वाली ओपीडी भी करीब-करीब आधी हो गई है।
विज्ञापन
अस्पताल में सभी विभागों के कुल 40 चिकित्सकों के पद सृजित हैं, जिसके सापेक्ष 17 की तैनाती की गई थी। जिनसे किसी तरह सभी आवश्यक सेवाएं शुरू हो सकी थीं, फिर भी हर पायदान पर विशेषज्ञों की कमी अखरती थी। अस्पताल शुरू होने से आज तक नाक, कान, गला, त्वचा, दांत आदि के चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई।
विज्ञापन
इसके अलावा मेडिसिन, सर्जन, आर्थो के सभी छह पद रिक्त हो चुके हैं। इन दिनों गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऐसे में उल्टी-दस्त, डायरिया, पेट संबंधी अन्य बीमारियों के मरीज बहुतायत संख्या में पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन की ओपीडी में ऐसे मरीजों की तादाद करीब 70 फीसदी हो रही है, लेकिन इनके इलाज के लिए एक भी विशेषज्ञ नहीं हैं।
फरवरी माह के समीप डॉ. विवेक मिश्र ने इस्तीफा दे दिया था। फिजीशियन डॉ. अवधेश पटेल ने भी बीते माह इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा फिजीशियन डॉ. निशांत सक्सेना 20 दिनों से अवकाश पर हैं। ऐसे में अस्पताल इन दिनों फिजीशियन विहीन हो गया है। ऐसे मामले या तो बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक राय व डॉ. मनोज कार्तिकेय के पास भेजे जाते हैं या मरीज अन्यत्र चला जा रहा है।
इसके अलावा डॉ. फातिमा भी ओपीडी में सहयोग कर रही हैं। सर्जन डॉ. वशी को टांडा से संबद्ध किया गया है। जिनके जिम्मे ओपीडी, भर्ती मरीजों के साथ ट्रॉमा की जिम्मेदारी है। वहीं एकमात्र आर्थो सर्जन रहे डॉ. ओपी चौधरी का भी तबादला बस्ती जिले कर दिया गया है। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. आराधना लंबे समय से अवकाश पर हैं।
ओपीडी में बुधवार को एक बाल रोग विशेषज्ञ, दो एमबीबीएस, एक नेत्र सर्जन, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ ही मौजूद रहे। हड्डी के मरीजों को भटकता देखकर सीएमएस डॉ. घनश्याम सिंह ने स्वयं कुछ देर तक मरीजों को देखा, लेकिन प्रशासनिक कार्य अधिक होने से वे भी अधिक समय नहीं दे सके। आलम यह रहा कि पेट दर्द, डायरिया सहित गर्मी के अन्य बीमारियों के तमाम मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा।
नहीं मिले डॉक्टर..
बुधवार को पिता सीने में परेशानी होने से इलाज के लिए आए नंदापुर के सत्यम, डायरिया से पीड़ित रमेश कनौजिया, तिहुरा के रामबचन, सुषमा ने बताया कि तीन दिन से इलाज के लिए दौड़ रहे हैं, लेकिन डॉक्टर ही गायब हैं। ऐसे में यहां रोज आना-जाना बेकार हो रहा है। अस्पताल बनने का कोई औचित्य नहीं है, जब डॉक्टर ही नहीं बैठते हैं।
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी पहले से ही थी। अब तैनात चिकित्सकों में से भी दो इस्तीफा दे चुके हैं व कुछ अवकाश पर हैं। मौजूदा समय में एक भी फिजीशियन नहीं है, जबकि प्रतिदिन ओपीडी में फिजीशियन के मामले ही अधिक आ रहे हैं। लिखा पढ़ी की जा रही है।-डॉ. घनश्याम सिंह, सीएमएस मंडलीय चिकित्सालय दर्शननगर