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गुरु पूर्णिमा 27 को, मंदिरों में उत्सव शुरू
Updated Thu, 19 Jul 2018 01:21 AM IST
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गुरु पूर्णिमा 27 को, मंदिरों में उत्सव शुरू
अयोध्या। रामनगरी में गुरुपूर्णिमा पर्व को लेकर उत्साह छलकने लगा है। विभिन्न मंदिरों में उत्सव एवं धार्मिक अनुष्ठानों का श्रीगणेश हो चुका है। गुरु पूर्णिमा का पर्व 27 जुलाई को धूमधाम से मनाया जाएगा। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। वेदव्यास जी ने 18 पुराणों एवं 18 उपपुराणों की रचना की थी। महाभारत एवं श्रीमद्भागवत शास्त्र इनके प्रमुख रचित शास्त्र हैं। इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
दशरथमहल बड़ास्थान में गुरू पूर्णिमा महोत्सव पर विभिन्न अनुष्ठानों का श्रीगणेश हो चुका है। बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता में मंदिर में अखंड नाम संकीर्तन संचालित है। महंत रामभूषण दास कृपालु महाराज ने बताया कि 27 जुलाई को गुरुपूर्णिमा का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। विभिन्न प्रांतों से हजारों की संख्या में भक्त पधारेंगे। गुरू परंपरा का संवाहक बंगाली बाबा का स्थान गुरुधाम में भी 25,26 व 27 जुलाई को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया है। वहीं सुग्रीव किला में नौ दिवसीय अनुष्ठान का शुभारंभ बुधवार से हो चुका है। महोत्सव के क्रम में श्रीमद्बाल्मीकीय रामायण, विष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्र का मूल पारायण पाठ और विष्णु महायज्ञ आदि धार्मिक कार्यक्रम होंगे। ज.गु.रामानुजाचार्य स्वामी रामकृष्णाचार्य 18 से 26 तक प्रतिदिन श्रीमद् बाल्मीकीय रामायण कथामृत की वर्षा करेंगे।
गुरुपूर्णिमा पर्व पर मणिरामदास जी की छावनी, कोशलेश सदन, श्रीरामबल्लभाकुंज, सियारामकिला झुनकीघाट, हनुमत निवास, हरिधाम गोपाल मंदिर, जानकीघाट बड़ास्थान, रंगमहल सहित अन्य मंदिरों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के मध्य गुरु पूजन की धूम होगी।
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अयोध्या। रामनगरी में गुरुपूर्णिमा पर्व को लेकर उत्साह छलकने लगा है। विभिन्न मंदिरों में उत्सव एवं धार्मिक अनुष्ठानों का श्रीगणेश हो चुका है। गुरु पूर्णिमा का पर्व 27 जुलाई को धूमधाम से मनाया जाएगा। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। वेदव्यास जी ने 18 पुराणों एवं 18 उपपुराणों की रचना की थी। महाभारत एवं श्रीमद्भागवत शास्त्र इनके प्रमुख रचित शास्त्र हैं। इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
दशरथमहल बड़ास्थान में गुरू पूर्णिमा महोत्सव पर विभिन्न अनुष्ठानों का श्रीगणेश हो चुका है। बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता में मंदिर में अखंड नाम संकीर्तन संचालित है। महंत रामभूषण दास कृपालु महाराज ने बताया कि 27 जुलाई को गुरुपूर्णिमा का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। विभिन्न प्रांतों से हजारों की संख्या में भक्त पधारेंगे। गुरू परंपरा का संवाहक बंगाली बाबा का स्थान गुरुधाम में भी 25,26 व 27 जुलाई को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया है। वहीं सुग्रीव किला में नौ दिवसीय अनुष्ठान का शुभारंभ बुधवार से हो चुका है। महोत्सव के क्रम में श्रीमद्बाल्मीकीय रामायण, विष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्र का मूल पारायण पाठ और विष्णु महायज्ञ आदि धार्मिक कार्यक्रम होंगे। ज.गु.रामानुजाचार्य स्वामी रामकृष्णाचार्य 18 से 26 तक प्रतिदिन श्रीमद् बाल्मीकीय रामायण कथामृत की वर्षा करेंगे।
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गुरुपूर्णिमा पर्व पर मणिरामदास जी की छावनी, कोशलेश सदन, श्रीरामबल्लभाकुंज, सियारामकिला झुनकीघाट, हनुमत निवास, हरिधाम गोपाल मंदिर, जानकीघाट बड़ास्थान, रंगमहल सहित अन्य मंदिरों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के मध्य गुरु पूजन की धूम होगी।
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