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झंडारोहण व गर्भकल्याणक के साथ महामस्तकाभिषेक महोत्सव का शुभारंभ
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झंडारोहण व गर्भकल्याणक के साथ महामस्तकाभिषेक महोत्सव शुरू
अयोध्या। रामनगरी में भगवान सुमतिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव का गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता के सानिध्य में सोमवार को गर्भकल्याणक की विविध क्रियाओं व झंडारोहण के साथ भव्य शुभारंभ हुआ।
समस्त इंद्र-इंद्राणियों द्वारा भगवान का पंचामृत अभिषेक किया गया। भगवान के माता-पिता बने अर्चना जैन एवं अमरचंद जैन-टिकैतनगर ने महत्वपूर्ण भूमिका के साथ भगवान सुमतिनाथ के गर्भकल्याणक के दृष्य प्रस्तुत किये।
गोद भराई में भक्तों ने धनराशि, फल, मेवा, मिष्ठान, वस्त्र, आभूषण आदि से माता-पिता का सम्मान किया। स्वामी रवींद्रकीर्ति ने बताया कि पंचकल्याणकों में यह प्रथम कल्याणक कहलाता है।
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जिसमें भगवान का माता के गर्भ में आने की क्रियाओं की अंतरंग विधि शास्त्रों के अनुसार मंत्रपूर्वक की जाती है। गर्भकल्याणक के इस क्षण में स्वर्ग में इंद्रों की सभा का दृष्य भी मंच पर प्रस्तुत किया गया।
जिसमें इंद्र की आज्ञा से धनकुबेर ने अयोध्या नगरी के स्वरूप में समूचे पंडाल में रत्नों की वृष्टि की। इधर माता की सेवा में श्री, ह्री, धृति, कीर्ति, बुद्धि, लक्ष्मी आदि अष्ट कुमारी देवियां आ गईं।
जिन्होंने भक्ति नृत्य के साथ माता का शृंगार आदि करके उनकी सेवा की। सायंकाल में भगवान की मंगल आरती तथा पूज्य ज्ञानमती माताजी की मंगल आरती भी हुई।
मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि अयोध्या में चल रहे पंचकल्याणक के अवसर पर कल भगवान सुमतिनाथ के जन्मकल्याणक का जुलूस ऐतिहासिक स्तर पर निकाला जायेगा।
रथयात्रा का शुभारंभ सुबह 8 बजे अयोध्या जैन मंदिर से होगा। जुलूस संपूर्ण अयोध्या में भ्रमण करते हुए फिर तीर्थस्थल पर लौटेगा। जहां भगवान सुमतिनाथ को पांडुकषिला पर विराजमान करके 1008 कलशों से उनका जन्माभिषेक किया जायेगा।
कार्यक्रम में चंदनामती माताजी, अतुल कुमार जैन, राधा जैन, आयुष कुमार जैन, गजेंद्र कुमार जैन, मनोज कुमार जैन, सीमता जैन सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
महोत्सव में अपने आशीर्वचन में गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी ने बताया कि तीर्थंकर भगवान तीन लोक के नाथ कहलाते हैं। तीनों लोकों में जितने भी जीव हैं, उन सभी में केवल तीर्थंकरों का जीव ही एक ऐसा होता है।
जिनके धरती पर आगमन के पश्चात पांच कल्याणक देवों के द्वारा संपन्न किये जाते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान सुमतिनाथ ने अयोध्या में जन्म लिया था, तब उनके गर्भकल्याणक को मनाने के लिए स्वर्ग से इंद्रगण इस धरती पर आये थे।
उन्होंने कहा कि वस्तुत: मोक्ष पुण्य और पापकर्म दोनों की मुक्ति से मिलता है। सर्वप्रथम पापकर्मों की मुक्ति के लिए पुण्य कर्म किये जाते हैं। फिर तपस्या के माध्यम से अपनी अंतरात्मा में ध्यानमग्न होते हुए पुण्य कर्म से भी बंधन को छुड़ाकर मोक्ष की प्राप्ति की जाती है।
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अयोध्या। रामनगरी में भगवान सुमतिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव का गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता के सानिध्य में सोमवार को गर्भकल्याणक की विविध क्रियाओं व झंडारोहण के साथ भव्य शुभारंभ हुआ।
समस्त इंद्र-इंद्राणियों द्वारा भगवान का पंचामृत अभिषेक किया गया। भगवान के माता-पिता बने अर्चना जैन एवं अमरचंद जैन-टिकैतनगर ने महत्वपूर्ण भूमिका के साथ भगवान सुमतिनाथ के गर्भकल्याणक के दृष्य प्रस्तुत किये।
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गोद भराई में भक्तों ने धनराशि, फल, मेवा, मिष्ठान, वस्त्र, आभूषण आदि से माता-पिता का सम्मान किया। स्वामी रवींद्रकीर्ति ने बताया कि पंचकल्याणकों में यह प्रथम कल्याणक कहलाता है।
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जिसमें भगवान का माता के गर्भ में आने की क्रियाओं की अंतरंग विधि शास्त्रों के अनुसार मंत्रपूर्वक की जाती है। गर्भकल्याणक के इस क्षण में स्वर्ग में इंद्रों की सभा का दृष्य भी मंच पर प्रस्तुत किया गया।
जिसमें इंद्र की आज्ञा से धनकुबेर ने अयोध्या नगरी के स्वरूप में समूचे पंडाल में रत्नों की वृष्टि की। इधर माता की सेवा में श्री, ह्री, धृति, कीर्ति, बुद्धि, लक्ष्मी आदि अष्ट कुमारी देवियां आ गईं।
जिन्होंने भक्ति नृत्य के साथ माता का शृंगार आदि करके उनकी सेवा की। सायंकाल में भगवान की मंगल आरती तथा पूज्य ज्ञानमती माताजी की मंगल आरती भी हुई।
मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि अयोध्या में चल रहे पंचकल्याणक के अवसर पर कल भगवान सुमतिनाथ के जन्मकल्याणक का जुलूस ऐतिहासिक स्तर पर निकाला जायेगा।
रथयात्रा का शुभारंभ सुबह 8 बजे अयोध्या जैन मंदिर से होगा। जुलूस संपूर्ण अयोध्या में भ्रमण करते हुए फिर तीर्थस्थल पर लौटेगा। जहां भगवान सुमतिनाथ को पांडुकषिला पर विराजमान करके 1008 कलशों से उनका जन्माभिषेक किया जायेगा।
कार्यक्रम में चंदनामती माताजी, अतुल कुमार जैन, राधा जैन, आयुष कुमार जैन, गजेंद्र कुमार जैन, मनोज कुमार जैन, सीमता जैन सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
महोत्सव में अपने आशीर्वचन में गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी ने बताया कि तीर्थंकर भगवान तीन लोक के नाथ कहलाते हैं। तीनों लोकों में जितने भी जीव हैं, उन सभी में केवल तीर्थंकरों का जीव ही एक ऐसा होता है।
जिनके धरती पर आगमन के पश्चात पांच कल्याणक देवों के द्वारा संपन्न किये जाते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान सुमतिनाथ ने अयोध्या में जन्म लिया था, तब उनके गर्भकल्याणक को मनाने के लिए स्वर्ग से इंद्रगण इस धरती पर आये थे।
उन्होंने कहा कि वस्तुत: मोक्ष पुण्य और पापकर्म दोनों की मुक्ति से मिलता है। सर्वप्रथम पापकर्मों की मुक्ति के लिए पुण्य कर्म किये जाते हैं। फिर तपस्या के माध्यम से अपनी अंतरात्मा में ध्यानमग्न होते हुए पुण्य कर्म से भी बंधन को छुड़ाकर मोक्ष की प्राप्ति की जाती है।