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दीनानाथ होइहैं सहाय..खरना के साथ शुरू हुई 36 घंटे की तपस्या

Wed, 10 Nov 2021 01:06 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 01:06 AM IST
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36 hours of penance started with Dinanath Hoihain Sahai..Kharna
अयोध्या। सूर्य उपासना का पर्व छठ महोत्सव का शहर में उल्लास छाया है। चार दिवसीय छठ पर्व के दूसरे दिन छोटी खरना पर्व मनाया गया। इसी के साथ ही महिलाओं ने 36 घंटे का व्रत प्रारंभ कर दिया है।
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सरयू व गुप्तारघाट पर रखियो हम छठ के बरतिया दीनानाथ होइहैं सहाय, रोवे सुगा के सुगनिया सुुगा काहे मारल जाए...। जैसे गीतों के साथ निर्जला व्रत रखकर आज महिलाएं अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी।
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छठ महोत्सव को लेकर शहर के बाजार भी गुलजार हैं। फल-फूल से लेकर फलों की दुकानें सजी हुई हैं। बाजारों में दिन भर खरीदारी को लेकर हलचल रही।
आज मंगलवार को छोटी छठ या खरना पर महिलाओं ने रात को रसियाव साठी के चावल, गुड़, गाय के दूध की खीर खाने के बाद दो दिनी लंबे निर्जला व्रत की शुरूआत की।
महिलाएं बुधवार को परिवार के साथ सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजा सामग्रियों को लकड़ी के डाले में रखकर घाटों पर पहुंचेंगी और सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर आकर सारा सामान रख देंगी।
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षष्ठी की रात छठी माता के गीत गाए जाएंगे और व्रत की कथा सुनाई जाएगी। व्रत के चौथे दिन 11 अक्तूबर को सूर्य निकलने के पहले ही व्रती घाट पर पहुंच जाएंगे और उगते सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य दिया जाएगा।
इसके बाद घाट पर ही छठ माता को प्रणाम कर व संतान रक्षा का वर मांग वापस घर लौटकर प्रसाद वितरण के बाद प्रसाद खाकर व्रत खोलेंगी। खरना छठ पर्व के दूसरे दिन का अनुष्ठान है। खरना का आशय शुद्धिकरण से है।
इस दिन व्रती शुद्ध तन-मन से अपने कुल देवी-देवता एवं छठी माई की पूजा करते हैं। खरना को लोहांडा भी कहा जाता है। खरना के प्रसाद में गन्ने का जूस या गुड़ के चावल अथवा गुड़ की खीर तैयार की जाती है।
यह प्रसाद छठी माई और कुल देवता को अर्पित किया जाता है। प्रसाद को खाने के बाद व्रती को 36 घंटे का निर्जला उपवास करना होता है। पहले अर्घ्य से एक दिन पहले मंगलवार को सरयू के घाटों पर तैयारियां देर शाम तक चलती रहीं।

घाटों की साफ-सफाई के लिए नगर नगम के कर्मचारी जुटे रहे। प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त करने में विद्युत कर्मी लगे रहे। गोसाईगंज में ठकुराइन पोखरा, महादेवा घाट, सीताराम सत्संग घाट व शृंगी ऋषि आश्रम के सरयू नदी पर दिन भर तैयारियों का दौर चला।
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