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जिले की103 ग्रामपंचायतों में एक करोड़ रूपये का गड़बड़झाला
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अयोध्या। जिले की 103 ग्राम पंचायतों में लगभग एक करोड़ रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई है। ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कराए गए कार्यों और प्रधानमंत्री आवास के निर्माण की सोशल आडिट में यह गड़बड़ी पकड़ी गई। अब इस धन की रिकवरी के लिए रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेजे जाने की तैयारी है।
सरकारी योजनाओं में मनमानी का आलम है। ग्राम पंचायतों ने काम तो करोड़ों रुपये के करा दिए, लेकिन अब हिसाब देने में पसीना आ रहा है। इसका खुलासा मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बनवाए गए आवासों की सोशल ऑडिट में हुआ। जिले की 564 ग्राम पंचायतों के वित्तीय साल 2017-18 के कार्यों की सोशल ऑडिट कराई जा रही है।
बीती 31 जनवरी तक सोशल ऑडिट टीमों ने 422 ग्राम पंचायतों की सोशल ऑडिट मौके पर पहुंचकर की। इसकी रिपोर्ट चौंकाने वाली है। जिले के आठ विकास खंडों की 103 ग्राम पंचायतों में दोनों योजनाओं में खर्च किए गए धन में लगभग एक करोड़ रुपये का गड़बड़झाला पकड़ में आया है। इसमें ज्यादा गड़बड़ी मनरेगा के कार्यों मेें पाई गई है। कई ग्राम पंचायतें इस खर्च का अभिलेख तक नहीं उपलब्ध करा पाई हैं।
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सूत्रों के मुताबिक ऐसी ग्राम पंचायतों में रुदौली विकास खंड की ऑडिट हुई 49 में से आठ, मवई विकासखंड की 55 में से 13, सोहावल की 62 में से 19, तारुन की 97 में से 18, मसौधा की 84 में 32, बीकापुर की 24 में से तीन, मयाबाजार की 28 में से पांच और पूराबाजार में 16 में से पांच ग्राम पंचायतों में गड़बड़ी पकड़ी गई है।
रुदौली, मवई, सोहावल, तारुन और मसौधा में ऑडिट का काम पूरा हो गया है, जबकि बीकापुर, मयाबाजार और पूराबाजार की बची ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट अभी चल रही है। नोडल विभाग गड़बड़ी में पकड़ी गई रकम को धन अपहरण की श्रेणी में मान इसकी रिकवरी कराने के लिए संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजे जाने की तैयारी है।
इनसेट...
ब्लॉक वार ग्राम पंचायतों में पकड़ी गई राशि (लाख रुपये में)
ब्लॉक धनराशि
रुदौली 10.66
मवई 5.22
सोहावल 7.60
तारून 25.12
मसौधा 46.77
बीकापुर .64
मया बाजार .13
पूराबाजार 6.58
क्या है सोशल ऑडिट
पारदर्शिता और सरकारी धन का दुरुपयोग रोकने के लिए ग्राम पंचायतों में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों की जांच सरकारी कर्मियों से इतर समाज के विशेषज्ञों की गठित टीम से कराई जाती है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े तीन से चार लोग होते हैं। टीम का नेतृत्व बीआरपी (ब्लॉक रिसोर्स पर्सन) या बीएसएसी (ब्लाक सोशल ऑडिट कोऑर्डिनेटर) करते हैं। टीम विभाग से कार्यों का अभिलेख लेकर गांव पहुंचती है। वहां कार्यों की स्थलीय जांच के साथ तकनीकी जांच करती है। फिर ऑडिट रिपोर्ट जिला विकास अधिकारी को सौंपती है। यहां से गड़बड़ी की रकम की रिकवरी के लिए संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजी जाती है। इसके बाद रिकवरी की कार्रवाई होती है।
केंद्र सरकार को भी भेजी जाती है रिपोर्ट
सोशल ऑडिट के बाद रिपोर्ट ऑनलाइन की जाती है। यह प्रदेश के निदेशालय से भारत की वेबसाइट पर भी दिखाई पड़ती है। वहां से इस पर कार्रवाई की रिपोर्ट भी समय-समय पर ली जाती है।
वर्जन
पिछले वित्तीय साल के कार्यों की सोशल ऑडिट में ग्राम पंचायतों में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। अब तक 422 ग्राम पंचायतों की सोशल ऑडिट हुई, इसमें लगभग एक करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी पकड़ में आई है। ग्राम पंचायतों से अपहरण किए गए धन की रिकवरी के लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजा जा रहा है।
- हवलदार सिंह, जिला विकास अधिकारी
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सरकारी योजनाओं में मनमानी का आलम है। ग्राम पंचायतों ने काम तो करोड़ों रुपये के करा दिए, लेकिन अब हिसाब देने में पसीना आ रहा है। इसका खुलासा मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बनवाए गए आवासों की सोशल ऑडिट में हुआ। जिले की 564 ग्राम पंचायतों के वित्तीय साल 2017-18 के कार्यों की सोशल ऑडिट कराई जा रही है।
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बीती 31 जनवरी तक सोशल ऑडिट टीमों ने 422 ग्राम पंचायतों की सोशल ऑडिट मौके पर पहुंचकर की। इसकी रिपोर्ट चौंकाने वाली है। जिले के आठ विकास खंडों की 103 ग्राम पंचायतों में दोनों योजनाओं में खर्च किए गए धन में लगभग एक करोड़ रुपये का गड़बड़झाला पकड़ में आया है। इसमें ज्यादा गड़बड़ी मनरेगा के कार्यों मेें पाई गई है। कई ग्राम पंचायतें इस खर्च का अभिलेख तक नहीं उपलब्ध करा पाई हैं।
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सूत्रों के मुताबिक ऐसी ग्राम पंचायतों में रुदौली विकास खंड की ऑडिट हुई 49 में से आठ, मवई विकासखंड की 55 में से 13, सोहावल की 62 में से 19, तारुन की 97 में से 18, मसौधा की 84 में 32, बीकापुर की 24 में से तीन, मयाबाजार की 28 में से पांच और पूराबाजार में 16 में से पांच ग्राम पंचायतों में गड़बड़ी पकड़ी गई है।
रुदौली, मवई, सोहावल, तारुन और मसौधा में ऑडिट का काम पूरा हो गया है, जबकि बीकापुर, मयाबाजार और पूराबाजार की बची ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट अभी चल रही है। नोडल विभाग गड़बड़ी में पकड़ी गई रकम को धन अपहरण की श्रेणी में मान इसकी रिकवरी कराने के लिए संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजे जाने की तैयारी है।
इनसेट...
ब्लॉक वार ग्राम पंचायतों में पकड़ी गई राशि (लाख रुपये में)
ब्लॉक धनराशि
रुदौली 10.66
मवई 5.22
सोहावल 7.60
तारून 25.12
मसौधा 46.77
बीकापुर .64
मया बाजार .13
पूराबाजार 6.58
क्या है सोशल ऑडिट
पारदर्शिता और सरकारी धन का दुरुपयोग रोकने के लिए ग्राम पंचायतों में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों की जांच सरकारी कर्मियों से इतर समाज के विशेषज्ञों की गठित टीम से कराई जाती है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े तीन से चार लोग होते हैं। टीम का नेतृत्व बीआरपी (ब्लॉक रिसोर्स पर्सन) या बीएसएसी (ब्लाक सोशल ऑडिट कोऑर्डिनेटर) करते हैं। टीम विभाग से कार्यों का अभिलेख लेकर गांव पहुंचती है। वहां कार्यों की स्थलीय जांच के साथ तकनीकी जांच करती है। फिर ऑडिट रिपोर्ट जिला विकास अधिकारी को सौंपती है। यहां से गड़बड़ी की रकम की रिकवरी के लिए संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजी जाती है। इसके बाद रिकवरी की कार्रवाई होती है।
केंद्र सरकार को भी भेजी जाती है रिपोर्ट
सोशल ऑडिट के बाद रिपोर्ट ऑनलाइन की जाती है। यह प्रदेश के निदेशालय से भारत की वेबसाइट पर भी दिखाई पड़ती है। वहां से इस पर कार्रवाई की रिपोर्ट भी समय-समय पर ली जाती है।
वर्जन
पिछले वित्तीय साल के कार्यों की सोशल ऑडिट में ग्राम पंचायतों में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। अब तक 422 ग्राम पंचायतों की सोशल ऑडिट हुई, इसमें लगभग एक करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी पकड़ में आई है। ग्राम पंचायतों से अपहरण किए गए धन की रिकवरी के लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजा जा रहा है।
- हवलदार सिंह, जिला विकास अधिकारी