{"_id":"5a79f8a64f1c1bef7b8b5cfa","slug":"21517942950-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जो रूठ गये मुझसे उनको भी मनाना है...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जो रूठ गये मुझसे उनको भी मनाना है...
Updated Wed, 07 Feb 2018 12:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जो रूठ गये मुझसे उनको भी मनाना है...
फैजाबाद। सामाजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था अवध साहित्य संगम की मासिक गोष्ठी संस्था के कार्यालय पर हुई, जिसकी अध्यक्षता लक्ष्यदीप शर्मा व संचालन रामानंद सागर ने किया।
सागर ने नातेपाक पेश किया। अमित साहिल ने गजल प्रस्तुत की, जो रूठ गये मुझसे उनको भी मनाना है, रोते हुए लोगों को हम सबको हंसाना है..., अनीस चौधरी ने भी गज़ल पढ़ी कि न है कुछ खोने को न ही कुछ पाना है, हम खाक नशीनों की ठोकर में जमाना है। कवयित्री रीता शर्मा ने पढ़ा कि, मां का जीवन एक सांचा है जैसा चाहा वैसा ढाला है, अपनी ममता के सूरज से जीवन में भर दिया उजाला है। अंजनी आजाद ने भजन सुनाया। सीबी सागर ने गीत पढ़ा कि आओ हम सब मिल करके इक दुनिया नई बसायें, जिसमें बस इंसान बसें और प्यार की फसल उगायें। कवयित्री कात्यायिनी उपाध्याय, अवधेश पाल, ब्रह्रा देव मधुकर, वीरेन्द्र त्रिपाठी यायावर, राम शंकर रिन्द, सहित अन्य ने भी काव्य पाठ किया।
विज्ञापन
फैजाबाद। सामाजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था अवध साहित्य संगम की मासिक गोष्ठी संस्था के कार्यालय पर हुई, जिसकी अध्यक्षता लक्ष्यदीप शर्मा व संचालन रामानंद सागर ने किया।
सागर ने नातेपाक पेश किया। अमित साहिल ने गजल प्रस्तुत की, जो रूठ गये मुझसे उनको भी मनाना है, रोते हुए लोगों को हम सबको हंसाना है..., अनीस चौधरी ने भी गज़ल पढ़ी कि न है कुछ खोने को न ही कुछ पाना है, हम खाक नशीनों की ठोकर में जमाना है। कवयित्री रीता शर्मा ने पढ़ा कि, मां का जीवन एक सांचा है जैसा चाहा वैसा ढाला है, अपनी ममता के सूरज से जीवन में भर दिया उजाला है। अंजनी आजाद ने भजन सुनाया। सीबी सागर ने गीत पढ़ा कि आओ हम सब मिल करके इक दुनिया नई बसायें, जिसमें बस इंसान बसें और प्यार की फसल उगायें। कवयित्री कात्यायिनी उपाध्याय, अवधेश पाल, ब्रह्रा देव मधुकर, वीरेन्द्र त्रिपाठी यायावर, राम शंकर रिन्द, सहित अन्य ने भी काव्य पाठ किया।
विज्ञापन