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भारत बंद पर निकाला जुलूस, सड़क जाम कर हुए प्रदर्शन

Fri, 07 Sep 2018 12:06 AM IST
Updated Fri, 07 Sep 2018 12:06 AM IST
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भारत बंद पर निकाला जुलूस, सड़क जाम कर हुए  प्रदर्शन
भारत बंद पर निकाला जुलूस, सड़क जाम कर किया प्रदर्शन
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फैजाबाद। एससी/एसटी एक्ट के विरोध में बुलाए गए भारत बंद का जिले में मिला जुला असर रहा। शहर का बंदी का दिन होने से सभी कारोबार वैसे ही बंद थे, मगर कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध-प्रदर्शन हुए। जगह-जगह जुलूस निकालकर, सड़क जाम कर नारेबाजी की गई। कुछ जगह शिक्षकों ने भी काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य का बहिष्कार किया।

अधिवक्ताओं ने नारेबाजी प्रदर्शन के बीच अध्यादेश की प्रतियां जलाई। ग्रामीण क्षेत्र में आंदोलन के चलते प्रशासन और पुलिस की सक्रियता रही। हालांकि कहीं से कोई अप्रिय समाचार नहीं है। फैजाबाद शहर में गुरुवार को बंदी का दिन होने के कारण दुकानें बंद रहीं। हालांकि साप्ताहिक बाजार लगी लेकिन लोगों की आमद अपेक्षाकृत कम आंकी गई।
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अयोध्या में जनजीवन सामान्य रहा। दुकानें अन्य प्रतिष्ठान खुले रहे। अधिवक्ताओं ने कचहरी में इस एक्ट के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। सरकार विरोधी नारे लगाए और जिलाधिकारी कार्यालय के पोर्टिकों के सामने एससीएसटी एक्ट के अध्यादेश की प्रतियां जलाई। इसमें बार अध्यक्ष अरविंद सिंह, मंत्री परविंद मिश्रा, आलोक खरे, सुधांशु बाजपेयी, सुशील चौबे समेत अन्य अधिवक्ता शामिल रहे।
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करणी सेना से जुड़े युवाओं ने सरियावां चौराहे से इस एक्ट के विरोध में जुलूस निकाल नारेबाजी की। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस की मौजूदगी रही। महबूबगंज प्रतिनिधि के मुताबिक कस्बे में क्षत्रिय बरुवार वंश एवं उद्योग व्यापार मंडल के तमाम लोगों ने सड़क पर उतरकर एससी/ एसटी एक्ट को लेकर सरकार विरोधी नारे लगाते हुए जाम लगा दिया।

क्षत्रिय बरुवार वंश के अध्यक्ष राम विभूति सिंह ने कहा कि 28 वर्षों से एससी-एसटी एक्ट का सामना कर रहे सवर्णों को कोर्ट द्वारा राहत दी गई तो तत्काल सवर्ण विरोधी सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने का जो कार्य किया है। इसे किसी भी तरह हमारे समाज को स्वीकार नहीं है।

व्यापार मंडल अध्यक्ष उदय भान गुप्ता ने कहा कि यह एक्ट सवर्णों के लिए एक अभिशाप की तरह है। कुछ देर बाद जाम खुला तो यातायात बहाल हुआ। इसमें राजेंद्र प्रसाद पांडे, श्री भगवान पांडे, घनश्याम पांडे, गबोधर सिंह, रामफेर सिंह, सुनील सिंह, डॉ. दीपक गुप्ता सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे। अमरगंज प्रतिनिधि के मुताबिक भारत बंद का बाजार में व्यापक असर हुआ।

लोगों ने मिल्कीपुर-अमानीगंज मुख्य मार्ग जामकर आवागमन बाधित किया। सरकार विरोधी नारे लगाए। सूचना पर दल-बल के पहुंचे खंडासा थानाध्यक्ष ने एसडीएम के प्रतिनिधि के रूप में ज्ञापन लेकर जाम खुलवाया। बहादुरगंज, खंडासा बाजार सहित आधा दर्जन बाजारों में बंद का मिला जुला असर रहा।

प्रदर्शन में पूर्व प्रधान सुरेश प्रताप पांडेय, पूर्व प्रधान संतोष मिश्र, पूर्व प्रधान महेश शर्मा, विनीत सिंह, राम कुमार अवस्थी समेत तमाम लोग शामिल थे। मिल्कीपुर प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र की बाजारों में भारत बंद का असर रहा। इनायतनगर, बारून, कुचेरा, तरौली तिवारीगंज में सवर्ण समाज के लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर एससी/एसटी एक्ट लागू किए जाने का विरोध किया।

इस दौरान गुड्डू तिवारी, मुकुंद तिवारी, छात्र नेता जितेंद्र मिश्र, दिनेश सिंह समेत अन्य लोग शामिल रहे। बड़ागांव प्रतिनिधि के मुताबिक सोहावल शिक्षा क्षेत्र के श्री राम बल्लभा इंटर कॉलेज के शिक्षकों ने एससी/एसटी कानून के खिलाफ काली पट्टी बांध कर शिक्षण कार्य का बहिष्कार किया। प्रधानाचार्य आलोक तिवारी का घेराव कर सामान्य के शिक्षकों ने सरकार विरोधी नारे बाजी की।

इस मौके पर शिक्षक गिजेश त्रिपाठी, वीरेंद्र मिश्र, सतीश सिंह, सुदर्शन उपाध्याय, अतुल मिश्र, आशीष सिंह आदि शिक्षक शामिल थे। हैदरगंज प्रतिनिधि के मुताबिक बाजार में धोबना चौराहा पर आयोजित जनसभा का आयोजन किया गया। व्यापार मंडल के अध्यक्ष और सवर्ण समाज के नेता उपेंद्र दूबे ने कहा कि यह एक्ट ही मोदी सरकार के ताबूत की आखिरी कील होगी।

अध्यक्षता अशोक दूबे और संचालन विनोद कुमार दूबे लल्लू ने किया। सभा के पहले जुलूस के शक्ल में ब्रहम बाबा चौराहा बाजार होते हुए इमलिया, बलरामपुर, कुटेहना हनुमानगढ़ी होते हुए धोबना चौराहा पर पहुंचे। सभा को राम केवल पांडेय, राम उजागिर तिवारी, राधेश्याम यादव, शिवबहादुर, पंकज दूबे, ललित पांडेय, राम मिलन दूबे समेत अन्य वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।

बीकापुर प्रतिनिधि के मुताबिक बार एसोसिएशन बीकापुर के अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता हाल में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हरिहर प्रसाद यादव की अध्यक्षता में आम सभा की बैठक करके एक्ट का विरोध किया। भारत बंद के समर्थन और एक्ट के विरोध में आक्रोश जताया। नारेबाजी की। प्रस्ताव पारित करके गुरुवार को सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे।


प्रस्ताव की कॉपी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, चकबंदी अधिकारी को सौंपी। एक्ट को वापस लेने की मांग की गई। इस दौरान अध्यक्ष के साथ मंत्री ब्रह्मानंद मिश्र, अधिवक्ता अरुण मिश्रा, पुष्पेंद्र मिश्रा, सुशील पांडेय, मो. शोएब, शोभनत्नाथ तिवारी समेत तमाम अधिवक्ता शामिल रहे। भारत बंद का असर बाजार में नहीं दिखाई पड़ा।
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