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या देवि सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता... 16-17-47
Updated Mon, 26 Mar 2018 12:03 AM IST
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सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थसाधिके...
फैजाबाद। इस बार अष्टमी और नवमी एक साथ पड़ने से रविवार को भक्तों ने मां महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की। चार भुजाओं वाली मां महागौरी अपने वाहन वृषभ पर सवार हैं। ऐसी मान्यता है कि माता की सच्चे मन से आराधना करने से भक्त पाप मुक्त हो जाते हैं।
रविवार को मंदिरों और घरों में हवन का आयोजन हुआ। जगह-जगह कन्या भोज भी कराया गया।
नौ दिन का व्रत करने वाले लोगों ने हवन के बाद अपना उपवास खोला। नगर में रिकाबगंज हनुमानगढ़ी, नाका हनुमानगढ़ी, चौक में हट्ठी महरानी मंदिर के निकट के अलावा कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया। सिद्धपीठों बड़ी देवकाली, छोटी देवकाली, शीतला माता मंदिर, जालपा देवी, पाटेश्वरी देवी, मरी माता, गुरगाइन माता मंदिर, मां हट्ठी का मंदिर और रेलवे मंदिर के सामने बनाये गये कुंडों में हवन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे।
कन्या नहीं मिली, गायों को खिलाया प्रसाद
देवी भक्तों को रविवार की सुबह कन्याओं के महत्व का पता तब चला जब उन्हें भोज कराने की जरूरत हुई। कुछ ने तो शनिवार को ही कन्याओं को निमंत्रित किया था जो चूक गए उन्हें इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। इच्छा न होते हुए भी एक-एक कन्या को दो और तीन घरों में प्रसाद ग्रहण करना पड़ा। कुछ को तो भोजन कराने के लिए कन्याएं मिली ही नहीं। ऐसे लोगों ने भोजन गायों को खिलाया।
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फैजाबाद। इस बार अष्टमी और नवमी एक साथ पड़ने से रविवार को भक्तों ने मां महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की। चार भुजाओं वाली मां महागौरी अपने वाहन वृषभ पर सवार हैं। ऐसी मान्यता है कि माता की सच्चे मन से आराधना करने से भक्त पाप मुक्त हो जाते हैं।
रविवार को मंदिरों और घरों में हवन का आयोजन हुआ। जगह-जगह कन्या भोज भी कराया गया।
नौ दिन का व्रत करने वाले लोगों ने हवन के बाद अपना उपवास खोला। नगर में रिकाबगंज हनुमानगढ़ी, नाका हनुमानगढ़ी, चौक में हट्ठी महरानी मंदिर के निकट के अलावा कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया। सिद्धपीठों बड़ी देवकाली, छोटी देवकाली, शीतला माता मंदिर, जालपा देवी, पाटेश्वरी देवी, मरी माता, गुरगाइन माता मंदिर, मां हट्ठी का मंदिर और रेलवे मंदिर के सामने बनाये गये कुंडों में हवन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे।
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कन्या नहीं मिली, गायों को खिलाया प्रसाद
देवी भक्तों को रविवार की सुबह कन्याओं के महत्व का पता तब चला जब उन्हें भोज कराने की जरूरत हुई। कुछ ने तो शनिवार को ही कन्याओं को निमंत्रित किया था जो चूक गए उन्हें इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। इच्छा न होते हुए भी एक-एक कन्या को दो और तीन घरों में प्रसाद ग्रहण करना पड़ा। कुछ को तो भोजन कराने के लिए कन्याएं मिली ही नहीं। ऐसे लोगों ने भोजन गायों को खिलाया।
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