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राममंदिर के लिए अनशन कर रहे परमहंस को पुलिस ने उठाया, भड़का आक्रोश
Updated Mon, 08 Oct 2018 11:49 PM IST
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परमहंस को जबरन उठाने का संतों ने किया विरोध, पुलिस ने भांजी लाठियां, चार गिरफ्तार
अयोध्या। राम मंदिर निर्माण व प्रधानमंत्री को अयोध्या बुलाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास को सातवें दिन रविवार रात 11:15 बजे सोते समय स्वास्थ्य खराब होने के नाम पर पुलिस द्वारा अनशन स्थल से जबरन उठाकर एसजीपीजीआई लखनऊ में भर्ती कराने का सोमवार को दिनभर विरोध हुआ।
सोमवार सुबह सड़क पर उतरे संतों को पुलिस ने लाठियां भांजकर खदेड़ा। चार संतों को गिरफ्तार कर शांति भंग में जेल भेज दिया गया। किन्नर गुलशन बिंदु को घर में नजरबंद कर दिया। अनशन कर रहे परमहंस पर कार्रवाई से पहले रविवार को डीएम समेत पुलिस के आला अधिकारी सभी प्रमुख संतों से बैठकें कर रणनीति बनाते रहे।
महंत को मनाने की आखिरी कोशिश औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने अनशन स्थल पहुंच कर की। महाना ने अनशन तोड़वाने की पूरी सहमति बन जाने और मुख्यमंत्री से वीडियो कॉल के जरिए सोमवार को बात कराने की बात कही। महाना के जाने के बाद रात करीब 11:15 बजे अचानक एंबुलेंस के साथ पांच गाड़ियों में सादी वर्दी में पुलिस के लोग पहुंचे।
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सादी वर्दी में क्राइम ब्रांच के प्रभारी आगे बढ़े और परमहंस का पैर छूने के अंदाज में झुकने के साथ दोनों टांगें उठा ली। पीछे व अगल-बगल से चार और सहयोगियों ने उन्हें उठाकर एंबुलेंस के अंदर बंद दिया। एसपी सिटी अनिल सिसोदिया ने बताया कि परमहंस का पल्स रेट काफी नीचे चली गई, लिहाजा उन्हें आपात चिकित्सा के लिए एसजीपीजीआई लखनऊ ले जाया गया।
घटना के बाद से संतों में आक्रोश फैल गया। सोमवार सुबह संत एवं समर्थक अनशन स्थल पर पहुंचने लगे। जय श्रीराम के नारे लगाते हुए घटना की निंदा करते हुए मोदी व योगी सरकार पर निशाना साधा। वहीं, अनशन स्थल पर बैठे कुछ संतों को पुलिस ने बलपूर्वक खदेड़ दिया और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया।
महंत हरिभजन दास, संत रामजनम दास, समर्थ त्रिपाठी समेत चार संतों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अयोध्या के कोतवाल जगदीश उपाध्याय ने बताया कि चार संतों को निषेधाज्ञा के उल्लंघन में शांतिभंग के तहत जेल भेजा गया है। महंत परमहंस दास का समर्थन करने पहुंची गुलशन बिंदु किन्नर को भी उनके फैजाबाद स्थित आवाज पर नजरबंद कर दिया गया।
वहीं परमहंस दास के शिष्यों अतुल, समर्थ त्रिपाठी आदि ने बताया कि पुलिस महंत जी को कहां ले गई है, इसकी जानकारी होनी चाहिए। कहा कि महंत जी को पीजीआई भेजा गया है, लेकिन इसकी सही जानकारी नहीं हो पा रही है। संत समर्थक राधारमण त्रिपाठी, अजय मिश्र आदि ने भी महंत परमहंस कहां है, इसकी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग प्रशासन से की है।
श्रीराम अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि रविवार को देर शाम हुई जांच में सामने आया कि अनशन से परमहंस की हालत खराब हो रही है। वजन तेजी से घट रहा था, यूरिया बढ़ गया था। शरीर में किटोन आ रहे थे। ऐसा अनुमान था कि उनकी सेहत कभी भी ज्यादा खराब हो सकती है। इस रिपोर्ट से प्रशासन को अवगत कराते हुए मामला संवेदनशील होने से हायर सेंटर में ले जाने की सलाह दी गई। बताया कि महंत परमहंस को श्रीराम अस्पताल की एंबुलेंस से नहीं ले जाया गया है और न ही अस्पताल के डॉक्टर उनके साथ गए हैं।
अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास को देर रात पुलिस के उठाने की जानकारी मिलते ही अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक प्रवीण भाई तोगड़िया अनशन स्थल पर पहुंचे और मंदिर में रह रहे लोगों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। तोगड़िया ने कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग एक संत को पुलिस द्वारा खींच कर ले जाना संत का नहीं राम का अपमान है। इस आवाज को कोई दबा नहीं सकता। अब यह आंदोलन देशव्यापी आंदोलन हो जाएगा।
इस पर जल्द बैठक की जाएगी और रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा, अनशन कर रहे महंत ने सीएम व पीएम की कुर्सी नहीं मांगी थी। अपने आश्रम में संत लोकतांत्रिक पद्धति से अपनी मांगों को समाज में बता रहे थे। सत्ता में बैठे लोग राम मंदिर नहीं बनवाना चाहते हैं लेकिन बात राम मंदिर की ही करते हैं। जो लोग राम मंदिर की आवाज उठाते हैं, उन पर दमन और अत्याचार करके उनकी आवाज को दबा दिया जाता है। तोगड़िया ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि महंत को बलपूर्वक घसीट कर अपमान करके आश्रम से ले जाया गया है।
इसका उत्तर 100 करोड़ जनता लोकतांत्रिक तरीके से जल्द ही देगी। उन्होंने कहा कि अगर ताकत है तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके दिखाए। बताया कि वह मंगलवार को महंत परमहंस दास से पीजीआई में जाकर मुलाकात करेंगे। तोगड़िया ने बताया कि 21 अक्तूबर को लखनऊ के रमाबाई में संकल्प सभा कर बड़ी संख्या में रामभक्त शांतिपूर्वक पैदल बाराबंकी तक आएंगे। यहां से वाहनों के साथ अयोध्या पहुंचेंगे और यहां 23 अक्तूबर तक रुकेेंगे। इसके बाद घर-घर राममंदिर की कार्ययोजना पहुंचाएंगे।
अयोध्या के राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपालदास ने एकबार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयोध्या आने का न्योता दिया है। नसीहत देते हुए कहा, मोदी को सद्बुद्धि मिले कि वह अयोध्या दर्शन को आएं। कहा, केंद्र को चाहिए कि वह विशेषाधिकार से मंदिर का निर्माण करवाए। मोदी भगवान का काम करेंगे तो सत्ता में रहेंगे, नहीं तो भगवान सत्ता से हटा देंगे। उन्होंने राहुल-अखिलेश को धन्यवाद देते हुए कहा कि वो भी अब भगवान राम के बारे में बात करने लगे।
राममंदिर निर्माण के लिए तपस्वी छावनी परिसर में स्थित अशोक वृक्ष के नीचे विगत एक अक्तूबर से आमरण अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास को रविवार रात पुलिस-प्रशासन द्वारा जबरिया उठा ले जाने, संतों को हिरासत में लेने और उन पर डंडा पटकने की घटना के बाद रामनगरी के संत आक्रोशित हैं। संतों ने बैठक कर पुलिस प्रशासन को कोसा तो, वहीं सरकार को भी चेतावनी दी कि संतों का अपमान सरकार के लिए भारी पड़ सकता है।
इस घटना को लेकर तमाम शीर्ष संत-महंतों में मिली जुली प्रतिक्रिया रही। कुछ संतों ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया तो, कुछ संतों ने कहा कि प्रशासन को इस मामले में समझदारी का परिचय देना चाहिए था। खड़ेश्वरी मंदिर में महंत दिलीप दास त्यागी की अध्यक्षता में संतों ने बैठक कर घटना की निंदा की। महंत दिलीप दास ने कहा कि जो भी हुआ संत समाज इसकी निंदा करता है। कहा कि राममंदिर के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन का भी अधिकार हमें नहीं है।
जब मुख्यमंत्री से वार्ता को लेकर सहमति बन गई थी तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि पुलिस को इतनी बर्बरतापूर्ण कार्रवाई करनी पड़ी। महंत रामशंकर रामायणी ने कहा कि संतों की सरकार में संत का अपमान बहुत ही निराशाजनक है। कहा कि जिस सरकार को हमने बनाया आज वही हमें अपमानित कर रही है। स्वामी विजयानंद गिरि ने कहा कि परमहंस राममंदिर के लिए अनशन कर रहे थे। उन्हें सम्मान पूर्वक ले जाना चाहिए था। यह संतों का अपमान है। संत वरुण दास ने कहा कि रात के अंधेरे में संत को उठा ले जाने से गलत संदेश गया है।
करतलिया आश्रम के महंत रामदास ने कहा कि जब वार्ता से अनशन खत्म होने के आसार प्रबल हो रहे थे, तो इस तरह की कार्रवाई क्यों यह तो वार्ता के दौरान धोखा है। रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने महंत परमहंस दास की मांग को उचित बताते हुए घटना की निंदा की है। कहा कि यह संत का अपमान है, संत को जबरिया अनशन स्थल से उठाकर प्रशासन ने गलत काम किया है। अब राममंदिर का आंदोलन पूरे देश में शुरू होगा। कहा कि सरकार को शीघ्र राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि राममंदिर निर्माण में संतों की अहम भूमिका होगी, राममंदिर का आंदोलन भी संतों के निर्देशन में ही चला था। महंत को स्वस्थ करने का प्रयास किया गया है। महंत परमहंस का अनशन सफल होगा और राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था। राममंदिर के नाम पर अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास के प्रकरण को और समझदारी पूर्वक और परिपक्वता से निपटाया जा सकता था।
कहा कि राममंदिर को लेकर बेसब्री बढ़ रही है, हर हिंदू अपने आराध्य रामलला को टेंट से आजाद देखना चाहता है, अब राममंदिर निर्माण में और देरी नहीं की जानी चाहिए। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि इस प्रकरण पर संत उच्चाधिकार समिति का जो फैसला होगा उसके अनुसार काम होगा। कहा कि राममंदिर निर्माण में संतों की भूमिका महत्वपूर्ण है। राममंदिर के लिए अपने-अपने ढंग से प्रयास लोग कर रहे हैं, उनका स्वागत भी है, लेकिन राममंदिर पर आंदोलन का निर्णय व्यक्ति विशेष के बजाय सामूहिक आंदोलन होना चाहिए।
हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पांडेय ने महंत परमहंस को जबरन उठाने की निंदा करते हुए कहा कि संतों का ऐसा अपमान करने की उम्मीद भाजपा से तो कदापि नही थी। वह भी ऐसे समय में जब प्रदेश का मुख्यमंत्री खुद संत हो। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने सरकार से मांग की है कि संवैधानिक तरीके से अनशन करने वाले संत परमहंसदास जी महाराज को तत्काल छोड़ा जाए।
मोदी खुद आकर इस जघन्य कृत्य की संतों से क्षमा मांग कर राम मंदिर के दर्शन करें। हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष महंत रामलोचन शरण शास्त्री, अरविन्द शास्त्री,कुलदीप श्रीवास्तव, चन्द्रहास दीक्षित महंत ओमप्रकाश दास आदि ने भी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। परमहंस को जबरिया उठाकर ले जाने की निंदा व्यापारी समाज ने भी की है। अयोध्या उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष नंद कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया।
कहा कि सरकार द्वारा महंत परमहंस दास को लाइट काट कर आधी रात को जबरिया उठाकर लखनऊ पीजीआई में भर्ती कराया गया। शिलापट व राम जी पर चढ़ाये गये माला को नाली मेु फेंक कर राम भक्तों की भावना को आहत किया गया। व्यापारी समाज ने मांग करते हुए कहा कि महंत परमहंस दास को सासम्मान अयोध्या लाया। बैठक में विपिन राय, सुनील कुमार, अरविंद गुप्ता, राम चंदर यादव, जगन्नाथ यादव, मंगल प्रसाद साहू आदि शामिल रहे।
अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए अनशन कर रहे संत परमहंस को जबरन उठा ले जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिवसेना के राज्य प्रमुख ठाकुर अनिल सिंह ने कहा कि अयोध्या प्रशासन द्वारा रात में महंत परमहंस को स्वास्थ्य खराब होने के नाम पर अनशन से उठाकर अपमानित किया है। राममंदिर के नाम पर सत्ता में आई भाजपा सरकार अहंकार में डूबी हुई है। शिवसेना के नगर अध्यक्ष रजत पांडेय ने भी घटना की निंदा करते हुए पुलिसिया कार्रवाई की भर्त्सना की।
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अयोध्या। राम मंदिर निर्माण व प्रधानमंत्री को अयोध्या बुलाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास को सातवें दिन रविवार रात 11:15 बजे सोते समय स्वास्थ्य खराब होने के नाम पर पुलिस द्वारा अनशन स्थल से जबरन उठाकर एसजीपीजीआई लखनऊ में भर्ती कराने का सोमवार को दिनभर विरोध हुआ।
सोमवार सुबह सड़क पर उतरे संतों को पुलिस ने लाठियां भांजकर खदेड़ा। चार संतों को गिरफ्तार कर शांति भंग में जेल भेज दिया गया। किन्नर गुलशन बिंदु को घर में नजरबंद कर दिया। अनशन कर रहे परमहंस पर कार्रवाई से पहले रविवार को डीएम समेत पुलिस के आला अधिकारी सभी प्रमुख संतों से बैठकें कर रणनीति बनाते रहे।
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सादी वर्दी में क्राइम ब्रांच के प्रभारी आगे बढ़े और परमहंस का पैर छूने के अंदाज में झुकने के साथ दोनों टांगें उठा ली। पीछे व अगल-बगल से चार और सहयोगियों ने उन्हें उठाकर एंबुलेंस के अंदर बंद दिया। एसपी सिटी अनिल सिसोदिया ने बताया कि परमहंस का पल्स रेट काफी नीचे चली गई, लिहाजा उन्हें आपात चिकित्सा के लिए एसजीपीजीआई लखनऊ ले जाया गया।
घटना के बाद से संतों में आक्रोश फैल गया। सोमवार सुबह संत एवं समर्थक अनशन स्थल पर पहुंचने लगे। जय श्रीराम के नारे लगाते हुए घटना की निंदा करते हुए मोदी व योगी सरकार पर निशाना साधा। वहीं, अनशन स्थल पर बैठे कुछ संतों को पुलिस ने बलपूर्वक खदेड़ दिया और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया।
महंत हरिभजन दास, संत रामजनम दास, समर्थ त्रिपाठी समेत चार संतों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अयोध्या के कोतवाल जगदीश उपाध्याय ने बताया कि चार संतों को निषेधाज्ञा के उल्लंघन में शांतिभंग के तहत जेल भेजा गया है। महंत परमहंस दास का समर्थन करने पहुंची गुलशन बिंदु किन्नर को भी उनके फैजाबाद स्थित आवाज पर नजरबंद कर दिया गया।
वहीं परमहंस दास के शिष्यों अतुल, समर्थ त्रिपाठी आदि ने बताया कि पुलिस महंत जी को कहां ले गई है, इसकी जानकारी होनी चाहिए। कहा कि महंत जी को पीजीआई भेजा गया है, लेकिन इसकी सही जानकारी नहीं हो पा रही है। संत समर्थक राधारमण त्रिपाठी, अजय मिश्र आदि ने भी महंत परमहंस कहां है, इसकी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग प्रशासन से की है।
श्रीराम अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि रविवार को देर शाम हुई जांच में सामने आया कि अनशन से परमहंस की हालत खराब हो रही है। वजन तेजी से घट रहा था, यूरिया बढ़ गया था। शरीर में किटोन आ रहे थे। ऐसा अनुमान था कि उनकी सेहत कभी भी ज्यादा खराब हो सकती है। इस रिपोर्ट से प्रशासन को अवगत कराते हुए मामला संवेदनशील होने से हायर सेंटर में ले जाने की सलाह दी गई। बताया कि महंत परमहंस को श्रीराम अस्पताल की एंबुलेंस से नहीं ले जाया गया है और न ही अस्पताल के डॉक्टर उनके साथ गए हैं।
अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास को देर रात पुलिस के उठाने की जानकारी मिलते ही अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक प्रवीण भाई तोगड़िया अनशन स्थल पर पहुंचे और मंदिर में रह रहे लोगों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। तोगड़िया ने कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग एक संत को पुलिस द्वारा खींच कर ले जाना संत का नहीं राम का अपमान है। इस आवाज को कोई दबा नहीं सकता। अब यह आंदोलन देशव्यापी आंदोलन हो जाएगा।
इस पर जल्द बैठक की जाएगी और रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा, अनशन कर रहे महंत ने सीएम व पीएम की कुर्सी नहीं मांगी थी। अपने आश्रम में संत लोकतांत्रिक पद्धति से अपनी मांगों को समाज में बता रहे थे। सत्ता में बैठे लोग राम मंदिर नहीं बनवाना चाहते हैं लेकिन बात राम मंदिर की ही करते हैं। जो लोग राम मंदिर की आवाज उठाते हैं, उन पर दमन और अत्याचार करके उनकी आवाज को दबा दिया जाता है। तोगड़िया ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि महंत को बलपूर्वक घसीट कर अपमान करके आश्रम से ले जाया गया है।
इसका उत्तर 100 करोड़ जनता लोकतांत्रिक तरीके से जल्द ही देगी। उन्होंने कहा कि अगर ताकत है तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके दिखाए। बताया कि वह मंगलवार को महंत परमहंस दास से पीजीआई में जाकर मुलाकात करेंगे। तोगड़िया ने बताया कि 21 अक्तूबर को लखनऊ के रमाबाई में संकल्प सभा कर बड़ी संख्या में रामभक्त शांतिपूर्वक पैदल बाराबंकी तक आएंगे। यहां से वाहनों के साथ अयोध्या पहुंचेंगे और यहां 23 अक्तूबर तक रुकेेंगे। इसके बाद घर-घर राममंदिर की कार्ययोजना पहुंचाएंगे।
अयोध्या के राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपालदास ने एकबार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयोध्या आने का न्योता दिया है। नसीहत देते हुए कहा, मोदी को सद्बुद्धि मिले कि वह अयोध्या दर्शन को आएं। कहा, केंद्र को चाहिए कि वह विशेषाधिकार से मंदिर का निर्माण करवाए। मोदी भगवान का काम करेंगे तो सत्ता में रहेंगे, नहीं तो भगवान सत्ता से हटा देंगे। उन्होंने राहुल-अखिलेश को धन्यवाद देते हुए कहा कि वो भी अब भगवान राम के बारे में बात करने लगे।
राममंदिर निर्माण के लिए तपस्वी छावनी परिसर में स्थित अशोक वृक्ष के नीचे विगत एक अक्तूबर से आमरण अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास को रविवार रात पुलिस-प्रशासन द्वारा जबरिया उठा ले जाने, संतों को हिरासत में लेने और उन पर डंडा पटकने की घटना के बाद रामनगरी के संत आक्रोशित हैं। संतों ने बैठक कर पुलिस प्रशासन को कोसा तो, वहीं सरकार को भी चेतावनी दी कि संतों का अपमान सरकार के लिए भारी पड़ सकता है।
इस घटना को लेकर तमाम शीर्ष संत-महंतों में मिली जुली प्रतिक्रिया रही। कुछ संतों ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया तो, कुछ संतों ने कहा कि प्रशासन को इस मामले में समझदारी का परिचय देना चाहिए था। खड़ेश्वरी मंदिर में महंत दिलीप दास त्यागी की अध्यक्षता में संतों ने बैठक कर घटना की निंदा की। महंत दिलीप दास ने कहा कि जो भी हुआ संत समाज इसकी निंदा करता है। कहा कि राममंदिर के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन का भी अधिकार हमें नहीं है।
जब मुख्यमंत्री से वार्ता को लेकर सहमति बन गई थी तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि पुलिस को इतनी बर्बरतापूर्ण कार्रवाई करनी पड़ी। महंत रामशंकर रामायणी ने कहा कि संतों की सरकार में संत का अपमान बहुत ही निराशाजनक है। कहा कि जिस सरकार को हमने बनाया आज वही हमें अपमानित कर रही है। स्वामी विजयानंद गिरि ने कहा कि परमहंस राममंदिर के लिए अनशन कर रहे थे। उन्हें सम्मान पूर्वक ले जाना चाहिए था। यह संतों का अपमान है। संत वरुण दास ने कहा कि रात के अंधेरे में संत को उठा ले जाने से गलत संदेश गया है।
करतलिया आश्रम के महंत रामदास ने कहा कि जब वार्ता से अनशन खत्म होने के आसार प्रबल हो रहे थे, तो इस तरह की कार्रवाई क्यों यह तो वार्ता के दौरान धोखा है। रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने महंत परमहंस दास की मांग को उचित बताते हुए घटना की निंदा की है। कहा कि यह संत का अपमान है, संत को जबरिया अनशन स्थल से उठाकर प्रशासन ने गलत काम किया है। अब राममंदिर का आंदोलन पूरे देश में शुरू होगा। कहा कि सरकार को शीघ्र राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि राममंदिर निर्माण में संतों की अहम भूमिका होगी, राममंदिर का आंदोलन भी संतों के निर्देशन में ही चला था। महंत को स्वस्थ करने का प्रयास किया गया है। महंत परमहंस का अनशन सफल होगा और राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था। राममंदिर के नाम पर अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास के प्रकरण को और समझदारी पूर्वक और परिपक्वता से निपटाया जा सकता था।
कहा कि राममंदिर को लेकर बेसब्री बढ़ रही है, हर हिंदू अपने आराध्य रामलला को टेंट से आजाद देखना चाहता है, अब राममंदिर निर्माण में और देरी नहीं की जानी चाहिए। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि इस प्रकरण पर संत उच्चाधिकार समिति का जो फैसला होगा उसके अनुसार काम होगा। कहा कि राममंदिर निर्माण में संतों की भूमिका महत्वपूर्ण है। राममंदिर के लिए अपने-अपने ढंग से प्रयास लोग कर रहे हैं, उनका स्वागत भी है, लेकिन राममंदिर पर आंदोलन का निर्णय व्यक्ति विशेष के बजाय सामूहिक आंदोलन होना चाहिए।
हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पांडेय ने महंत परमहंस को जबरन उठाने की निंदा करते हुए कहा कि संतों का ऐसा अपमान करने की उम्मीद भाजपा से तो कदापि नही थी। वह भी ऐसे समय में जब प्रदेश का मुख्यमंत्री खुद संत हो। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने सरकार से मांग की है कि संवैधानिक तरीके से अनशन करने वाले संत परमहंसदास जी महाराज को तत्काल छोड़ा जाए।
मोदी खुद आकर इस जघन्य कृत्य की संतों से क्षमा मांग कर राम मंदिर के दर्शन करें। हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष महंत रामलोचन शरण शास्त्री, अरविन्द शास्त्री,कुलदीप श्रीवास्तव, चन्द्रहास दीक्षित महंत ओमप्रकाश दास आदि ने भी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। परमहंस को जबरिया उठाकर ले जाने की निंदा व्यापारी समाज ने भी की है। अयोध्या उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष नंद कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया।
कहा कि सरकार द्वारा महंत परमहंस दास को लाइट काट कर आधी रात को जबरिया उठाकर लखनऊ पीजीआई में भर्ती कराया गया। शिलापट व राम जी पर चढ़ाये गये माला को नाली मेु फेंक कर राम भक्तों की भावना को आहत किया गया। व्यापारी समाज ने मांग करते हुए कहा कि महंत परमहंस दास को सासम्मान अयोध्या लाया। बैठक में विपिन राय, सुनील कुमार, अरविंद गुप्ता, राम चंदर यादव, जगन्नाथ यादव, मंगल प्रसाद साहू आदि शामिल रहे।
अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए अनशन कर रहे संत परमहंस को जबरन उठा ले जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिवसेना के राज्य प्रमुख ठाकुर अनिल सिंह ने कहा कि अयोध्या प्रशासन द्वारा रात में महंत परमहंस को स्वास्थ्य खराब होने के नाम पर अनशन से उठाकर अपमानित किया है। राममंदिर के नाम पर सत्ता में आई भाजपा सरकार अहंकार में डूबी हुई है। शिवसेना के नगर अध्यक्ष रजत पांडेय ने भी घटना की निंदा करते हुए पुलिसिया कार्रवाई की भर्त्सना की।