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मुख्यालय से आया तुगलकी फरमान, टीएस को निरीक्षण कार्य से रोका
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:06 AM IST
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फैजाबाद। उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम के फैजाबाद परिक्षेत्र में चल रहे संगठित टिकट चोरी गिरोह के पर्दाफाश होने के बाद लखनऊ मुख्यालय से तुगलकी फरमान आ गया है। मुख्यालय में तैनात प्रधान प्रबंधक कर्मिक साद सईद ने क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र लिखकर यातायात अधीक्षक (टीएस) एसएन शुक्ला को बसों की चेकिंग करने से रोक दिया है।
हवाला दिया गया है कि यातायात अधीक्षक सदैव विवादों में रहते हैं व सिंतबर 2018 में यातायात अधीक्षक सेवानिवृत्त हो रहे। ऐसे में निरीक्षण कार्यों की जांच संभव नहीं हो पाएगी। मुख्यालय से आए इस आदेश के बाद यातायात अधीक्षक को निरीक्षण कार्य से रोक दिया गया है। वहीं, अभी तक संगठित टिकट चोरी के विरुद्ध कोई जांच गठित नहीं हो सकी है।
परिवहन निगम के फैजाबाद परिक्षेत्र में पिछले दो माह से यातायात अधीक्षक की ओर से सड़कों पर बसों की चेकिंग आरएम के निर्देश पर की जा रही है। जुलाई में यातायात अधीक्षक की ओर से 55 डब्ल्यूटी के केस पकड़े गए। इसमें परिचालकों की ओर से एक लाख 935 रुपये की पेनाल्टी निगम को देनी पड़ी।
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जुलाई में डॉ. अंबेडकर डिपो की एक बस में 35 डब्ल्यूटी एक साथ पकड़ा गया। इसमें बचाव करने वाले यातायात निरीक्षक तक का निलंबन हो गया। जुलाई के बाद अगस्त में यातायात अधीक्षक की ओर से 32 डब्ल्यूटी व 41 हजार रुपये से अधिक की पेनाल्टी परिचालकों को देनी पड़ी। 24 अगस्त को सुल्तानपुर डिपो की एक अनुबंधित बस में 24 डब्ल्यूटी के मामले के बाद टीएस के घर पर संगठित टिकट गिरोह की ओर से धावा बोलने व नगर कोतवाली में दो परिचालकों व एक कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष समेत छह अन्य के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत हुआ है।
अब इसमें एक नया नाटकीय मोड़ सामने आ गया है। मुख्यालय के अधिकारी ने संगठित गिरोह के विरुद्ध जांच के लिखित आदेश देने के बजाय यातायात अधीक्षक पर ही कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया। साथ ही क्षेत्रीय प्रबंधक को निर्देश दिया है कि यातायात अधीक्षक से प्रवर्तन कार्य के अलावा कोई अन्य कार्य पर विचार कर लिया जाए। इसके बाद से क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद्रनाथ की ओर से यातायात अधीक्षक को प्रवर्तन कार्य से रोक दिया गया है। दूसरी ओर फैजाबाद में चल रहे संगठित टिकट चोरी गिरोह का खुलासा भी यातायात अधीक्षक की ओर से ही किया गया है।
क्षेत्रीय प्रबंधक, फैजाबाद परिक्षेत्र धर्मेंद्रनाथ ने कहा कि मुख्यालय से आए आदेश के बाद यातायात अधीक्षक को प्रवर्तन कार्य से रोक दिया गया है। प्रधान प्रबंधक कर्मिक के आदेश के क्रम में यातायात अधीक्षक को मामले से अवगत करा दिया गया है।
टिकट चोरी गिरोह में प्रयुक्त वॉट्सएप ग्रुप बंद
संगठित टिकट चोरी गिरोह में कोई विशेष जांच न होने के कारण साक्ष्य को मिटाने का प्रयास गिरोह की ओर से तेज कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश परिवहन के नाम से बना वॉट्सएप ग्रुप शुक्रवार को बंद कर दिया गया है। इससे पुराने सभी साक्ष्य स्वत: ही खत्म हो गए है। इससे पूर्व इसी वॅाट्सएप ग्रुप में यातायात अधीक्षक को निकाले जाने का पत्र पड़ा था। पत्र के पड़ते ही ग्रुप में बधाई देने वालों का तांता लग गया। इसके कुछ ही घंटे बाद ग्रुप को बंद कर दिया गया।
परिक्षेत्र के 32 परिचालकों पर टिकट चोरी के गंभीर आरोप
संगठित टिकट चोरी गिरोह में परिक्षेत्र के ही नहीं, बल्कि मुख्यालय के अफसर भी शामिल हैं। इसका आरोप पिछले दिनों कर्मचारी संगठनों की ओर से एमडी को लिखित रूप से भेजा जा चुका है। साथ ही फैजाबाद रीजन में 31 ऐसे परिचालकों की बात सामने आई है कि जो प्रतिदिन 15 से 30 टिकट की चोरी करते हैं। इसमें फैजाबाद डिपो के नौ, सुल्तानपुर डिपो के 16, अकबरपुर डिपो के चार व अमेठी डिपो के दो परिचालक शामिल हैं। इन चिन्हित 32 परिचालकों में 20 संविदा पर कार्य करने वाले परिचालक बताए जा रहे हैं।
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हवाला दिया गया है कि यातायात अधीक्षक सदैव विवादों में रहते हैं व सिंतबर 2018 में यातायात अधीक्षक सेवानिवृत्त हो रहे। ऐसे में निरीक्षण कार्यों की जांच संभव नहीं हो पाएगी। मुख्यालय से आए इस आदेश के बाद यातायात अधीक्षक को निरीक्षण कार्य से रोक दिया गया है। वहीं, अभी तक संगठित टिकट चोरी के विरुद्ध कोई जांच गठित नहीं हो सकी है।
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परिवहन निगम के फैजाबाद परिक्षेत्र में पिछले दो माह से यातायात अधीक्षक की ओर से सड़कों पर बसों की चेकिंग आरएम के निर्देश पर की जा रही है। जुलाई में यातायात अधीक्षक की ओर से 55 डब्ल्यूटी के केस पकड़े गए। इसमें परिचालकों की ओर से एक लाख 935 रुपये की पेनाल्टी निगम को देनी पड़ी।
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जुलाई में डॉ. अंबेडकर डिपो की एक बस में 35 डब्ल्यूटी एक साथ पकड़ा गया। इसमें बचाव करने वाले यातायात निरीक्षक तक का निलंबन हो गया। जुलाई के बाद अगस्त में यातायात अधीक्षक की ओर से 32 डब्ल्यूटी व 41 हजार रुपये से अधिक की पेनाल्टी परिचालकों को देनी पड़ी। 24 अगस्त को सुल्तानपुर डिपो की एक अनुबंधित बस में 24 डब्ल्यूटी के मामले के बाद टीएस के घर पर संगठित टिकट गिरोह की ओर से धावा बोलने व नगर कोतवाली में दो परिचालकों व एक कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष समेत छह अन्य के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत हुआ है।
अब इसमें एक नया नाटकीय मोड़ सामने आ गया है। मुख्यालय के अधिकारी ने संगठित गिरोह के विरुद्ध जांच के लिखित आदेश देने के बजाय यातायात अधीक्षक पर ही कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया। साथ ही क्षेत्रीय प्रबंधक को निर्देश दिया है कि यातायात अधीक्षक से प्रवर्तन कार्य के अलावा कोई अन्य कार्य पर विचार कर लिया जाए। इसके बाद से क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद्रनाथ की ओर से यातायात अधीक्षक को प्रवर्तन कार्य से रोक दिया गया है। दूसरी ओर फैजाबाद में चल रहे संगठित टिकट चोरी गिरोह का खुलासा भी यातायात अधीक्षक की ओर से ही किया गया है।
क्षेत्रीय प्रबंधक, फैजाबाद परिक्षेत्र धर्मेंद्रनाथ ने कहा कि मुख्यालय से आए आदेश के बाद यातायात अधीक्षक को प्रवर्तन कार्य से रोक दिया गया है। प्रधान प्रबंधक कर्मिक के आदेश के क्रम में यातायात अधीक्षक को मामले से अवगत करा दिया गया है।
टिकट चोरी गिरोह में प्रयुक्त वॉट्सएप ग्रुप बंद
संगठित टिकट चोरी गिरोह में कोई विशेष जांच न होने के कारण साक्ष्य को मिटाने का प्रयास गिरोह की ओर से तेज कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश परिवहन के नाम से बना वॉट्सएप ग्रुप शुक्रवार को बंद कर दिया गया है। इससे पुराने सभी साक्ष्य स्वत: ही खत्म हो गए है। इससे पूर्व इसी वॅाट्सएप ग्रुप में यातायात अधीक्षक को निकाले जाने का पत्र पड़ा था। पत्र के पड़ते ही ग्रुप में बधाई देने वालों का तांता लग गया। इसके कुछ ही घंटे बाद ग्रुप को बंद कर दिया गया।
परिक्षेत्र के 32 परिचालकों पर टिकट चोरी के गंभीर आरोप
संगठित टिकट चोरी गिरोह में परिक्षेत्र के ही नहीं, बल्कि मुख्यालय के अफसर भी शामिल हैं। इसका आरोप पिछले दिनों कर्मचारी संगठनों की ओर से एमडी को लिखित रूप से भेजा जा चुका है। साथ ही फैजाबाद रीजन में 31 ऐसे परिचालकों की बात सामने आई है कि जो प्रतिदिन 15 से 30 टिकट की चोरी करते हैं। इसमें फैजाबाद डिपो के नौ, सुल्तानपुर डिपो के 16, अकबरपुर डिपो के चार व अमेठी डिपो के दो परिचालक शामिल हैं। इन चिन्हित 32 परिचालकों में 20 संविदा पर कार्य करने वाले परिचालक बताए जा रहे हैं।