{"_id":"5a959d374f1c1b45438b4810","slug":"171519754551-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फरवरी में ही तेजी से घट रहा सरयू का जलस्तर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फरवरी में ही तेजी से घट रहा सरयू का जलस्तर
Updated Tue, 27 Feb 2018 11:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रतिदिन पांच सेमी. कम हो रहा सरयू का जलस्तर
अयोध्या। अभी गर्मी की शुरूआत भर है ऐसे में रामनगरी में सरयू नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। जो चिंता का सबब बनने जा रहा है। 24 घंटे में सरयू का जलस्तर 5 सेमी. कम हो गया है। सरयू की धारा घाटों से करीब 500 मीटर दूर जा चुकी है। ऐसे में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सरयू का जलस्तर प्रतिदिन पांच सेमी. कम हो रहा है। यही हाल रहा तो मई-जून में जलस्तर अपने न्यूनतम बिंदु तक पहुंच सकता है जो अच्छा संकेत नहीं है।
सरयू फरवरी माह में ही गर्मी का तेवर नहीं झेल पा रही है। पारा भी 30 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। सरयू का जलस्तर 25 फरवरी को 87.95 मीटर रिकॉर्ड किया गया था। जो 26 फरवरी को लुढ़ककर 87.90 मीटर पहुंच गया। संत तुलसीघाट की ओर सरयू करीब 500 मीटर दूर बह रही है। अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को सरयू स्नान-पूजन करने के लिए लंबी दूरी तय करना पड़ रहा है। गुप्तारघाट से लेकर अयोध्या तक स्नान घाटों से दूर हुई सरयू की मुख्य धारा गोंडा जिले की सीमा में बह रही है। शहर में कई नहरें भी सरयू के सहारे ही बहती हैं, ऐसे में सरयू के जलस्तर में गिरावट आने से सरयू व घाघरा से निकली शारदा नहर प्रणाली व सहायक नहरों में जलापूर्ति भी पूरी क्षमता से गर्मियों में टेल तक पहुंचना मुश्किल होगा। तमाम इलाकों में नहरों के भी सूखने का खतरा बढ़ गया है। शारदा सहायक नहर के कैनालों को भरपूर जलापूर्ति भी चुनौती बनने जा रही है।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन जेपी यादव के मुताबिक घाघरा नदी पर कतरनिया घाट से 9 किमी. नीचे एक 716 मीटर लम्बे बैराज का निर्माण कर 480 क्यूमेक डिस्चार्ज क्षमता की लिंक नहर के माध्यम से जल का प्रत्यावर्तन होता है। शारदा नदी पर बनबसा बैराज के 180 किमी. नीचे एक 408 मीटर लम्बे बैराज का निर्माण कर उस पर घाघरा नदी का प्रत्यावर्तित जल प्राप्त कर इस जल को 650 क्यूमेक क्षमता की शारदा सहायक नहर के माध्यम से सिंचाई के लिए जलापूर्ति होती है। उत्तर प्रदेश के मध्य व पूर्वी क्षेत्र में स्थित लखीमपुर-खीरी, सीतापुर, लखनऊ, रायबरेली, बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी एवं अमेठी जनपदों की लगभग 16.55 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र में सिंचाई सुविधा हेतु शाखाओं और वितरण प्रणाली के अंतर्गत रजबाहों एवं अल्पिकाओं का निर्माण कर सिंचन क्षमता का सृजन किया जाता है। जब जलस्तर सरयू/घाघरा का घटता है तो सिंचाई के लिए टेल तक पानी पहुंचना मुश्किल हो जाता है। गर्मियों मेें इसी वजह से किसान धरना-प्रदर्शन करते हैं। सिंचाई को लेकर मारामारी होती है। जलस्तर अभी से घटना चिंताजनक हो सकता है।
विज्ञापन
सरयू के जलस्तर में गिरावट चिंता का सबब है। पानी का बहाव कम होने से सरयू जल के प्रदूषित होने का खतरा भी बढ़ जाता है। घाटों के किनारे गंदगी जम जाती है। यही नहीं जहां पानी कम हो रहा है वहां निवास कर रहे जलीय जीव जंतुओं की भी मृत होने का खतरा बढ़ जाता है। जल स्तर करीब पांच सेमी. की रफ्तार से रोजाना घट रहा है।- विनय कुशवाहा, अवर अभियंता, केंद्रीय जल आयोग अयोध्या
विज्ञापन
अयोध्या। अभी गर्मी की शुरूआत भर है ऐसे में रामनगरी में सरयू नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। जो चिंता का सबब बनने जा रहा है। 24 घंटे में सरयू का जलस्तर 5 सेमी. कम हो गया है। सरयू की धारा घाटों से करीब 500 मीटर दूर जा चुकी है। ऐसे में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सरयू का जलस्तर प्रतिदिन पांच सेमी. कम हो रहा है। यही हाल रहा तो मई-जून में जलस्तर अपने न्यूनतम बिंदु तक पहुंच सकता है जो अच्छा संकेत नहीं है।
सरयू फरवरी माह में ही गर्मी का तेवर नहीं झेल पा रही है। पारा भी 30 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। सरयू का जलस्तर 25 फरवरी को 87.95 मीटर रिकॉर्ड किया गया था। जो 26 फरवरी को लुढ़ककर 87.90 मीटर पहुंच गया। संत तुलसीघाट की ओर सरयू करीब 500 मीटर दूर बह रही है। अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को सरयू स्नान-पूजन करने के लिए लंबी दूरी तय करना पड़ रहा है। गुप्तारघाट से लेकर अयोध्या तक स्नान घाटों से दूर हुई सरयू की मुख्य धारा गोंडा जिले की सीमा में बह रही है। शहर में कई नहरें भी सरयू के सहारे ही बहती हैं, ऐसे में सरयू के जलस्तर में गिरावट आने से सरयू व घाघरा से निकली शारदा नहर प्रणाली व सहायक नहरों में जलापूर्ति भी पूरी क्षमता से गर्मियों में टेल तक पहुंचना मुश्किल होगा। तमाम इलाकों में नहरों के भी सूखने का खतरा बढ़ गया है। शारदा सहायक नहर के कैनालों को भरपूर जलापूर्ति भी चुनौती बनने जा रही है।
विज्ञापन
सिंचाई विभाग के एक्सईएन जेपी यादव के मुताबिक घाघरा नदी पर कतरनिया घाट से 9 किमी. नीचे एक 716 मीटर लम्बे बैराज का निर्माण कर 480 क्यूमेक डिस्चार्ज क्षमता की लिंक नहर के माध्यम से जल का प्रत्यावर्तन होता है। शारदा नदी पर बनबसा बैराज के 180 किमी. नीचे एक 408 मीटर लम्बे बैराज का निर्माण कर उस पर घाघरा नदी का प्रत्यावर्तित जल प्राप्त कर इस जल को 650 क्यूमेक क्षमता की शारदा सहायक नहर के माध्यम से सिंचाई के लिए जलापूर्ति होती है। उत्तर प्रदेश के मध्य व पूर्वी क्षेत्र में स्थित लखीमपुर-खीरी, सीतापुर, लखनऊ, रायबरेली, बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी एवं अमेठी जनपदों की लगभग 16.55 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र में सिंचाई सुविधा हेतु शाखाओं और वितरण प्रणाली के अंतर्गत रजबाहों एवं अल्पिकाओं का निर्माण कर सिंचन क्षमता का सृजन किया जाता है। जब जलस्तर सरयू/घाघरा का घटता है तो सिंचाई के लिए टेल तक पानी पहुंचना मुश्किल हो जाता है। गर्मियों मेें इसी वजह से किसान धरना-प्रदर्शन करते हैं। सिंचाई को लेकर मारामारी होती है। जलस्तर अभी से घटना चिंताजनक हो सकता है।
विज्ञापन
सरयू के जलस्तर में गिरावट चिंता का सबब है। पानी का बहाव कम होने से सरयू जल के प्रदूषित होने का खतरा भी बढ़ जाता है। घाटों के किनारे गंदगी जम जाती है। यही नहीं जहां पानी कम हो रहा है वहां निवास कर रहे जलीय जीव जंतुओं की भी मृत होने का खतरा बढ़ जाता है। जल स्तर करीब पांच सेमी. की रफ्तार से रोजाना घट रहा है।- विनय कुशवाहा, अवर अभियंता, केंद्रीय जल आयोग अयोध्या