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दिवाली पर राममंदिर का गिफ्ट चाहते हैं अयोध्या के संत-धर्माचार्य
Updated Mon, 05 Nov 2018 01:19 AM IST
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दिवाली पर राममंदिर का तोहफा चाहते हैं अयोध्या के संत-धर्माचार्य
अयोध्या। रामनगरी के संत-धर्माचार्यों में राममंदिर की कमी खटक रही है। संतों का कहना है कि यदि भव्य मंदिर में रामलला विराजमान हो जाएं तो, अयोध्या लाखों नहीं करोड़ों दीपक जलाए जाएंगे।
संतों ने केंद्र की मोदी एवं प्रदेश की योगी सरकार को दीपोत्सव आयोजन के लिए बधाई तो दी, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि सरकार राममंदिर से ध्यान भटकाने की कोशिश न करें। सरकार उन्हें दिवाली में राममंदिर का तोहफा दें।
संतों ने अयोध्या में लग रही 151 मीटर ऊंची प्रतिमा को लेकर सरकार की सराहना की और कहा कि सरकार राममूर्ति बनवाएं लेकिन यह न सोचे कि राममूर्ति राममंदिर का विकल्प हो सकती है।
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रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि रामलला मंदिर में विराजमान हों यह परम सौभाग्य का विषय है। ऐसा होने पर अयोध्या में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों दीपक जलेंगे।
जिस दिन मंदिर बना अयोध्या में ऐसी दिवाली होगी जो त्रेतायुग का अहसास कराएगी, कहा कि सरकार को शीघ्र राममंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
अधिकारी रामबल्लभाकुंज राजकुमार दास कहते हैं कि दीपोत्सव का आयोजन भव्यता का वाहक है। अयोध्या ने ऐसा आयोजन पहले कभी नहीं देखा, यह योगी सरकार में ही संभव है।
कुछ भी हों, हमारे आराध्य के मंदिर के बिना हर आयोजन फीका लगता है। कहा कि हमें उम्मीद है कि अगले वर्ष की दिवाली हम रामलला मंदिर में बनाएंगे।
ज.गु.रामदिनेशाचार्य ने कहा कि अयोध्या में सरकार कोई भी आयोजन कर लें, लेकिन राममंदिर को भुलाया नहीं जा सकता है। दीपोत्सव से रामनगरी की सांस्कृतिक गरिमा बढ़ी है इसमें कोई शक नहीं, लेकिन राममंदिर बनने के बाद ही रामनगरी का गौरव फिर स्थापित होगा। योगी हमें राममंदिर के रूप में दिवाली का गिफ्ट प्रदान करें।
रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि दीपोत्सव का आयोजन सराहनीय है। सरयू तट पर राम की मूर्ति भी बनने जा रही है। लेकिन सरकार ये न सोचे कि राम की मूर्ति विराजमान रामलला का विकल्प होगी। हमें हर हाल में राममंदिर चाहिए। सरकार का अब कोई बहाना नहीं चलेगा।
महंत परमहंस दास ने कहा कि मोदी एवं योगी सरकार अयोध्या का विकास कर रही है, दीपोत्सव आयोजन का कोई सानी नहीं है। राममूर्ति भी बनने जा रही है, लेकिन राममूर्ति राममंदिर का विकल्प नहीं हो सकती। कहा, यदि 5 दिसंबर तक राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त नहीं होता है तो वे 6 दिसंबर को आत्मदाह कर लेंगे।
विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया शरद शर्मा कहते हैं कि दीपोत्सव का कार्यक्रम अद्वितीय है। योगी सरकार इसके लिए बधाई का पात्र है। इस आयोजन में संपूर्ण रामनगरी लगी हुई है, लेकिन संत-धर्माचार्यों एवं करोड़ों हिंदुओं की इच्छा है कि दिव्य दीपोत्सव रामलला के भव्य मंदिर में बने। सरकार को इस दिशा में ठोस प्रयास करना चाहिए।
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अयोध्या। रामनगरी के संत-धर्माचार्यों में राममंदिर की कमी खटक रही है। संतों का कहना है कि यदि भव्य मंदिर में रामलला विराजमान हो जाएं तो, अयोध्या लाखों नहीं करोड़ों दीपक जलाए जाएंगे।
संतों ने केंद्र की मोदी एवं प्रदेश की योगी सरकार को दीपोत्सव आयोजन के लिए बधाई तो दी, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि सरकार राममंदिर से ध्यान भटकाने की कोशिश न करें। सरकार उन्हें दिवाली में राममंदिर का तोहफा दें।
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संतों ने अयोध्या में लग रही 151 मीटर ऊंची प्रतिमा को लेकर सरकार की सराहना की और कहा कि सरकार राममूर्ति बनवाएं लेकिन यह न सोचे कि राममूर्ति राममंदिर का विकल्प हो सकती है।
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रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि रामलला मंदिर में विराजमान हों यह परम सौभाग्य का विषय है। ऐसा होने पर अयोध्या में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों दीपक जलेंगे।
जिस दिन मंदिर बना अयोध्या में ऐसी दिवाली होगी जो त्रेतायुग का अहसास कराएगी, कहा कि सरकार को शीघ्र राममंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
अधिकारी रामबल्लभाकुंज राजकुमार दास कहते हैं कि दीपोत्सव का आयोजन भव्यता का वाहक है। अयोध्या ने ऐसा आयोजन पहले कभी नहीं देखा, यह योगी सरकार में ही संभव है।
कुछ भी हों, हमारे आराध्य के मंदिर के बिना हर आयोजन फीका लगता है। कहा कि हमें उम्मीद है कि अगले वर्ष की दिवाली हम रामलला मंदिर में बनाएंगे।
ज.गु.रामदिनेशाचार्य ने कहा कि अयोध्या में सरकार कोई भी आयोजन कर लें, लेकिन राममंदिर को भुलाया नहीं जा सकता है। दीपोत्सव से रामनगरी की सांस्कृतिक गरिमा बढ़ी है इसमें कोई शक नहीं, लेकिन राममंदिर बनने के बाद ही रामनगरी का गौरव फिर स्थापित होगा। योगी हमें राममंदिर के रूप में दिवाली का गिफ्ट प्रदान करें।
रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि दीपोत्सव का आयोजन सराहनीय है। सरयू तट पर राम की मूर्ति भी बनने जा रही है। लेकिन सरकार ये न सोचे कि राम की मूर्ति विराजमान रामलला का विकल्प होगी। हमें हर हाल में राममंदिर चाहिए। सरकार का अब कोई बहाना नहीं चलेगा।
महंत परमहंस दास ने कहा कि मोदी एवं योगी सरकार अयोध्या का विकास कर रही है, दीपोत्सव आयोजन का कोई सानी नहीं है। राममूर्ति भी बनने जा रही है, लेकिन राममूर्ति राममंदिर का विकल्प नहीं हो सकती। कहा, यदि 5 दिसंबर तक राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त नहीं होता है तो वे 6 दिसंबर को आत्मदाह कर लेंगे।
विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया शरद शर्मा कहते हैं कि दीपोत्सव का कार्यक्रम अद्वितीय है। योगी सरकार इसके लिए बधाई का पात्र है। इस आयोजन में संपूर्ण रामनगरी लगी हुई है, लेकिन संत-धर्माचार्यों एवं करोड़ों हिंदुओं की इच्छा है कि दिव्य दीपोत्सव रामलला के भव्य मंदिर में बने। सरकार को इस दिशा में ठोस प्रयास करना चाहिए।