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15 हजार प्रसूताओं को डिलीवरी बाद नहीं मिली फूटी कौड़ी

Thu, 30 Jun 2016 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद Updated Thu, 30 Jun 2016 11:18 PM IST
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15 thousand women after delivery not found money
pregnancy - फोटो : mirror
जननी सुरक्षा योजना में सवा साल के भीतर 15 हजार से ज्यादा प्रसूताओं को प्रसव के बाद शासन से मिलने वाला भुगतान नहीं मिला। चेक से भुगतान में पकड़ी गई धांधली के बाद शासन ने धन सीधे खाते में भेजने की व्यवस्था की है। ऐसे में बैंक खाता न होने के पेंच में भुगतान फंसा बताया जा रहा है।
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शहर क्षेत्र में एक हजार व ग्रामीण क्षेत्र के लिए 14 सौ प्रति प्रसूता भुगतान तय हैं। वित्तीय वर्ष 2015-16 में संस्थागत प्रसव 34 हजार 268 हुए, जिसमें जननी सुरक्षा (जेएसवाई) से 24 हजार 530 को भुगतान मिला, जबकि आज भी नौ हजार 738 प्रसूताएं दर-दर की ठोकरें खा रही हैं।
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2016-17 में पिछले साल की तुलना में संस्थागत प्रसव का लक्ष्य दोगुना से अधिक 71 हजार 842 रखा गया है। इसके सापेक्ष मई माह तक जिले में कुल पांच हजार 275 महिलाओं को प्रसव हुआ है, जबकि जननी सुरक्षा योजना के तहत भुगतान 1284 को हुआ।
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शेष प्रसूताओं की संख्या 3991 है, जबकि जून में भी दो हजार से अधिक प्रसूताओं को भुगतान नहीं मिला। हालांकि इनका आंकड़ा अभी तैयार हो रहा है। कुल मिलाकर पिछले साल से अब तक करीब 15 हजार 727 प्रसूताएं जननी सुरक्षा योजना का धन पाने के लिए भटक रही हैं।

पहले प्रसूताआें को चेक से जेएसवाई का भुगतान किया जाता था, जिससे धन में बड़े पैमाने पर अनियमितता पाई जाती थी। किसी दूसरे का चेक कोई और भुगतान करा लेता था। कई शिकायतों के बाद शासन ने सीधे प्रसूताओं के खाते में जननी सुरक्षा योजना का धन हस्तांतरित करने का निर्देश दिया।


इसके लिए एक विशेष पोर्टल भी विकसित किया गया है। अब अस्पताल में प्रसव कराने वाली प्रसूताओं का बैंक में खाता होना अनिवार्य है। बगैर खाते के प्रसूताओ को जेएसवाई के धन का भुगतान नहीं हो सकता है। प्रसूताओं का खाता बैंकों में नहीं होने की वजह से जेएसवाई के भुगतान में बड़ी बाधा बनी हुई है।

 
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