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हड़ताल से निजी अस्पतालों की ओपीडी ठप
Updated Wed, 07 Jun 2017 12:36 AM IST
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हड़ताल से निजी अस्पतालों की ओपीडी ठप
आईएमए के आह्वान का दिखा असर, नए मरीजों की ओपीडी व भर्ती रही बंद
अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सात सूत्री मांगों को लेकर वृहद् स्तर पर की गई हड़ताल का मंगलवार को असर दिखा। जिले के सभी निजी चिकित्सालयों में ओपीडी व आईपीडी की सेवाएं बंद रहीं। बारिश में दूरदराज से आए मरीजों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा।
देवा मेमोरियल हॉस्पिटल के चिकित्सक अतुल वर्मा व दीप्ति वर्मा परिसर से बाहर थे। तैनात स्टाफ ने बताया कि सुबह से करीब 60 मरीजों को वापस कर दिया गया। महराजगंज से हाथ दिखाने आईं किरन ने बताया कि जानकारी नहीं थी, इतनी दूर से आये तो पता चला कि आज डॉक्टर नहीं बैठेंगे। बगल स्थित हर्षण संस्थान में मयाबाजार से आये त्रिभुवन ने बताया कि हृदय की बीमारी से पीड़ित हैं, इलाज के लिए पहुंचने पर पता चला कि हड़ताल है। यशलोक मैटरनिटी हास्पिटल रीडगंज का भी यही हाल रहा। ओपीडी कक्ष में ताला लटका पाया गया। डॉ. चितरंजन वर्मा व मृदुला वर्मा अस्पताल परिसर में मौजूद नहीं थे। बाकरगंज से आई शहनाज बानो ने बताया कि काफी समय से बच्चे का इलाज यहीं करा रहे हैं, दवाई खत्म हो गई है। डॉक्टर ने आज दिखाने को कहा था, लेकिन न अस्पताल खुला है और न ही डॉक्टर हैं। इसी प्रकार लाइफ लाइन हॉस्पिटल साकेतपुरी में भी पूरे परिसर में सन्नाटा छाया रहा। स्टाफ नर्स ने बताया कि नये मरीजों को वापस कर दिया गया है। पहले से भर्ती मरीजों का समुचित इलाज किया जा रहा है। नेत्र ज्योति केंद्र देवकाली पर भी ताला लटका पाया गया। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. ए कुमार ने बताया कि चिकित्सक व संस्थानों पर बढ़ी हिंसा व उपद्रव के खिलाफ कड़ा कानून बनाने, मेडिकल छात्रों के नेशनल एक्जिट टेस्ट के प्रस्ताव को खारिज करने, एकल विंडो से रजिस्ट्रेशन, पर्चा लिखने में स्वायतत्ता, एलोपैथिक दवाएं सिर्फ एमबीबीएस, बीडीएस की लिखे। हेल्थ सेक्टर का बजट छह फीसदी करने, झोलाछापों पर रोक की मांग को लेकर कामकाज ठप किया गया था। उधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि बारिश से ओपीडी का औसत रोज से कम था। हड़ताल के कारण चार बजे तक ओपीडी के इंतजाम किए गए थे।
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आईएमए के आह्वान का दिखा असर, नए मरीजों की ओपीडी व भर्ती रही बंद
अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सात सूत्री मांगों को लेकर वृहद् स्तर पर की गई हड़ताल का मंगलवार को असर दिखा। जिले के सभी निजी चिकित्सालयों में ओपीडी व आईपीडी की सेवाएं बंद रहीं। बारिश में दूरदराज से आए मरीजों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा।
देवा मेमोरियल हॉस्पिटल के चिकित्सक अतुल वर्मा व दीप्ति वर्मा परिसर से बाहर थे। तैनात स्टाफ ने बताया कि सुबह से करीब 60 मरीजों को वापस कर दिया गया। महराजगंज से हाथ दिखाने आईं किरन ने बताया कि जानकारी नहीं थी, इतनी दूर से आये तो पता चला कि आज डॉक्टर नहीं बैठेंगे। बगल स्थित हर्षण संस्थान में मयाबाजार से आये त्रिभुवन ने बताया कि हृदय की बीमारी से पीड़ित हैं, इलाज के लिए पहुंचने पर पता चला कि हड़ताल है। यशलोक मैटरनिटी हास्पिटल रीडगंज का भी यही हाल रहा। ओपीडी कक्ष में ताला लटका पाया गया। डॉ. चितरंजन वर्मा व मृदुला वर्मा अस्पताल परिसर में मौजूद नहीं थे। बाकरगंज से आई शहनाज बानो ने बताया कि काफी समय से बच्चे का इलाज यहीं करा रहे हैं, दवाई खत्म हो गई है। डॉक्टर ने आज दिखाने को कहा था, लेकिन न अस्पताल खुला है और न ही डॉक्टर हैं। इसी प्रकार लाइफ लाइन हॉस्पिटल साकेतपुरी में भी पूरे परिसर में सन्नाटा छाया रहा। स्टाफ नर्स ने बताया कि नये मरीजों को वापस कर दिया गया है। पहले से भर्ती मरीजों का समुचित इलाज किया जा रहा है। नेत्र ज्योति केंद्र देवकाली पर भी ताला लटका पाया गया। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. ए कुमार ने बताया कि चिकित्सक व संस्थानों पर बढ़ी हिंसा व उपद्रव के खिलाफ कड़ा कानून बनाने, मेडिकल छात्रों के नेशनल एक्जिट टेस्ट के प्रस्ताव को खारिज करने, एकल विंडो से रजिस्ट्रेशन, पर्चा लिखने में स्वायतत्ता, एलोपैथिक दवाएं सिर्फ एमबीबीएस, बीडीएस की लिखे। हेल्थ सेक्टर का बजट छह फीसदी करने, झोलाछापों पर रोक की मांग को लेकर कामकाज ठप किया गया था। उधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि बारिश से ओपीडी का औसत रोज से कम था। हड़ताल के कारण चार बजे तक ओपीडी के इंतजाम किए गए थे।
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