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शिक्षा मित्रों की नौकरी जाने से सैकड़ों स्कूल ठप
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:19 PM IST
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बुनियादी शिक्षा को लगा झटका, शहर के 42 स्कूलों में 30 में ताला बंद, हालत खस्ता
फैजाबाद। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिले में शिक्षामित्र से शिक्षक बने करीब दो हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट आने से बुनियादी शिक्षा को तगड़ा झटका लगा है। जिलेभर में 40 फीसदी स्कूलों में पढ़ाई लगभग ठप हो गई है।
केवल नगरीय क्षेत्र के ही कुल 42 प्राइमरी स्कूलों में 30 की कमान इन्हीं एकल शिक्षकों पर थी, जहां गुरुवार को पूरे दिन ताला नहीं खुला। नौकरी को लेकर बीएसए दफ्तर से डीएम-कमिश्नर दफ्तर तक धरना-प्रदर्शन और रोड जाम करने वाले इन शिक्षकों का कहना है कि स्कूल की चाभी किसे दें?
जबकि प्रभारी बीएसए कहतीं हैं कि कहां से किसे भेजें-कौन पढ़ाएगा? परेशान अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। पिछली सपा सरकार ने जिले के कुल 1539 प्राथमिक स्कूलों में कुल 1992 शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर तैनाती दी थी।
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तीन साल से इन शिक्षकों ने यहां बुनियादी शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए जीतोड़ मेहनत की। मगर टीईटी अधिनियम के तहत नियुक्ति न होने से हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से मिली हार ने शिक्षकों को कहीं का नहीं छोड़ा है। उनके परिवार की हालत बेहद चिंतनीय हो गई है।
हाल यह है कि फैसले के तीसरे दिन गुरुवार को जिलेभर में बुनियादी शिक्षा भी बेपटरी हो गई। शहर के कुल 42 प्राइमरी स्कूलों में 30 ऐसे थे, जहां केवल एक शिक्षक की तैनाती थी। यह सभी शिक्षामित्र से शिक्षक बने थे। बुधवार को तो इनमें से कईयों ने स्कूलों ताला खोला, इसकी एक वजह यह थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहर में थे।
मगर गुरुवार को पूरे दिन ताले नहीं खुले। शहर रामनगर, नाका, जनौरा, मकबरा, रीडगंज, सहादतगंज प्रथम, अब्बू सराय, फतेहगंज, बेगमगंज गढैया, अंगुरीबाग, हसनू कटरा, धारालरोड आदि के एकल शिक्षकों ने सुबह से ही आंदोलन की राह पकड़ ली। ऐसे में सभी जगह ताला बंद रहा।
शिक्षकों के पास ही स्कूलों की चाभियां थीं, जिसे लेकर वे बीएसए दफ्तर से डीएम दफ्तर तक आंदोलन कर मातम मनाते दिखे। उनका कहना था कि चाभी किसे दें, बीएसए आकर ले लें, हम तो उनके दफ्तर पर ही प्रदर्शन कर रहे हैं।
बीकापुर प्रतिनिधि के अनुसार, बीकापुर शिक्षा क्षेत्र में 136 प्राथमिक विद्यालय व 50 पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने के कोर्ट के फैसले के बाद दो दिनों से शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्य बहिष्कार कर रहे हैं, जिससे पठन-पाठन कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
अधिकांश विद्यालयों में तो ताला बंद होने की वजह से बच्चों को घर लौटना पड़ा। हैरिंग्टनगंज प्रतिनिधि के अनुसार, ब्लॉक क्षेत्र के करीब आधा दर्जन परिषदीय विद्यालय गुरुवार को बंद रहे। गुरुजी की गैरमौजूदगी व विद्यालय में ताला बंद होने की वजह से विद्यार्थियों को वापस होना पड़ा।
बीईओ हैरिंग्टनगंज रमाकांत मौर्या ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय नदीना, घाटमपुर, उरूवा वैश्य, रूरूखास, पूरे बलुहन तिवारी और आदिलपुर विद्यालय बंद मिले। उधर, प्रशासन चुपचाप तमाशबीन बना हुआ है। जिन स्कूलों में शिक्षामित्र से शिक्षक बने लोगों के हाथों में ही कमान थी, वहां के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं हो पाया है।
बच्चों को घर लौटना पड़ रहा है। आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक विश्वनाथ सिंह का कहना है कि जिलेभर के 40 प्रतिशत स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित है। जहां एकल शिक्षक हैं, वहां पूरी तरह ताला बंद है।
प्रभारी बीएसए शुभा सांडिल्य का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के क्रम में अभी तक कोई आदेश शासन-प्रशासन से नहीं मिला है। खंड शिक्षाधिकारियों से सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित होने वाले शिक्षकों की रिपोर्ट बनाने को कहा गया है। जिले में कितने स्कूल बंद हैं, इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं आ पाई है। लोगों की शिकायतें आ रही है। बदले हालात में शासन से स्पष्ट आदेश के बाद ही कोई कदम उठा पाऊंगी।
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फैजाबाद। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिले में शिक्षामित्र से शिक्षक बने करीब दो हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट आने से बुनियादी शिक्षा को तगड़ा झटका लगा है। जिलेभर में 40 फीसदी स्कूलों में पढ़ाई लगभग ठप हो गई है।
केवल नगरीय क्षेत्र के ही कुल 42 प्राइमरी स्कूलों में 30 की कमान इन्हीं एकल शिक्षकों पर थी, जहां गुरुवार को पूरे दिन ताला नहीं खुला। नौकरी को लेकर बीएसए दफ्तर से डीएम-कमिश्नर दफ्तर तक धरना-प्रदर्शन और रोड जाम करने वाले इन शिक्षकों का कहना है कि स्कूल की चाभी किसे दें?
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जबकि प्रभारी बीएसए कहतीं हैं कि कहां से किसे भेजें-कौन पढ़ाएगा? परेशान अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। पिछली सपा सरकार ने जिले के कुल 1539 प्राथमिक स्कूलों में कुल 1992 शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर तैनाती दी थी।
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तीन साल से इन शिक्षकों ने यहां बुनियादी शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए जीतोड़ मेहनत की। मगर टीईटी अधिनियम के तहत नियुक्ति न होने से हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से मिली हार ने शिक्षकों को कहीं का नहीं छोड़ा है। उनके परिवार की हालत बेहद चिंतनीय हो गई है।
हाल यह है कि फैसले के तीसरे दिन गुरुवार को जिलेभर में बुनियादी शिक्षा भी बेपटरी हो गई। शहर के कुल 42 प्राइमरी स्कूलों में 30 ऐसे थे, जहां केवल एक शिक्षक की तैनाती थी। यह सभी शिक्षामित्र से शिक्षक बने थे। बुधवार को तो इनमें से कईयों ने स्कूलों ताला खोला, इसकी एक वजह यह थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहर में थे।
मगर गुरुवार को पूरे दिन ताले नहीं खुले। शहर रामनगर, नाका, जनौरा, मकबरा, रीडगंज, सहादतगंज प्रथम, अब्बू सराय, फतेहगंज, बेगमगंज गढैया, अंगुरीबाग, हसनू कटरा, धारालरोड आदि के एकल शिक्षकों ने सुबह से ही आंदोलन की राह पकड़ ली। ऐसे में सभी जगह ताला बंद रहा।
शिक्षकों के पास ही स्कूलों की चाभियां थीं, जिसे लेकर वे बीएसए दफ्तर से डीएम दफ्तर तक आंदोलन कर मातम मनाते दिखे। उनका कहना था कि चाभी किसे दें, बीएसए आकर ले लें, हम तो उनके दफ्तर पर ही प्रदर्शन कर रहे हैं।
बीकापुर प्रतिनिधि के अनुसार, बीकापुर शिक्षा क्षेत्र में 136 प्राथमिक विद्यालय व 50 पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने के कोर्ट के फैसले के बाद दो दिनों से शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्य बहिष्कार कर रहे हैं, जिससे पठन-पाठन कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
अधिकांश विद्यालयों में तो ताला बंद होने की वजह से बच्चों को घर लौटना पड़ा। हैरिंग्टनगंज प्रतिनिधि के अनुसार, ब्लॉक क्षेत्र के करीब आधा दर्जन परिषदीय विद्यालय गुरुवार को बंद रहे। गुरुजी की गैरमौजूदगी व विद्यालय में ताला बंद होने की वजह से विद्यार्थियों को वापस होना पड़ा।
बीईओ हैरिंग्टनगंज रमाकांत मौर्या ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय नदीना, घाटमपुर, उरूवा वैश्य, रूरूखास, पूरे बलुहन तिवारी और आदिलपुर विद्यालय बंद मिले। उधर, प्रशासन चुपचाप तमाशबीन बना हुआ है। जिन स्कूलों में शिक्षामित्र से शिक्षक बने लोगों के हाथों में ही कमान थी, वहां के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं हो पाया है।
बच्चों को घर लौटना पड़ रहा है। आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक विश्वनाथ सिंह का कहना है कि जिलेभर के 40 प्रतिशत स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित है। जहां एकल शिक्षक हैं, वहां पूरी तरह ताला बंद है।
प्रभारी बीएसए शुभा सांडिल्य का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के क्रम में अभी तक कोई आदेश शासन-प्रशासन से नहीं मिला है। खंड शिक्षाधिकारियों से सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित होने वाले शिक्षकों की रिपोर्ट बनाने को कहा गया है। जिले में कितने स्कूल बंद हैं, इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं आ पाई है। लोगों की शिकायतें आ रही है। बदले हालात में शासन से स्पष्ट आदेश के बाद ही कोई कदम उठा पाऊंगी।