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12 साल बाद रक्षाबंधन पर होगा ग्रहण का साया
Updated Wed, 02 Aug 2017 11:46 PM IST
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सूतक के चलते बंद रहेंगे मंदिरों के कपाट
अयोध्या। भाई-बहन के असीम स्नेह का पर्व रक्षाबंधन सात अगस्त को है, मगर इस बार त्योहार पर भद्रा के साथ चंद्रग्रहण का साया भी रहेगा। करीब 12 साल बाद ऐसा संयोग बना है, जब रक्षाबंधन के दिन ग्रहण लग रहा है।
इस बार रक्षाबंधन के दिन सूतक भी लगेगा। सूतक लगने से पहले भद्रा का असर रहेगा। इसके चलते रामनगरी के सभी मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे, साथ ही मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर में विराजमान रामलला के दर्शन भी नहीं होंगे।
चंद्रग्रहण के कारण निर्धारित दर्शन अवधि की दूसरी पाली में मंदिर के पट बंद होने के बाद दोबारा अगले दिन ही खुलेंगे। चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले और सूर्यग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लगने की मान्यता है। ज्योतिष गुरु स्वामी हरिदयाल शास्त्री के मुताबिक सात अगस्त को चंद्रग्रहण लगेगा।
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ग्रहण का स्पर्श रात्रि 10:53 बजे होगा, इसका मोक्ष मध्यरात्रि के बाद 12:48 बजे होगा व इसका मध्य 11:50 बजे होगा। ग्रहण की अवधि एक घंटा 55 मिनट है और यह भारत में दिखेगा भी, जिसके चलते सूतक माना जाएगा।
सूतक के कारण रामनगरी के सभी मंदिर ग्रहण के स्पर्श के नौ घंटे पहले ही बंद कर दिए जाएंगे और फिर अगले दिन आठ अगस्त की सुबह ही विधिविधान से पूजन के बाद खुलेेंगे।
ऐसे शुरू हुआ राखी का त्योहार
रक्षाबंधन भाई-बहन मनाते हैं मगर ये पर्व भाई-बहन ने नहीं बल्कि पति-पत्नी ने शुरू किया था और तभी से ये पर्व मनाया जाने लगा। पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे।
देवराज इंद्र की पत्नी शचि देवताओं की हार से घबरा गईं और इंद्र के प्राणों की रक्षा के लिए तप करना शुरू कर दिया। तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ। शचि ने इस रक्षासूत्र को श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इससे देवताओं की शक्ति बढ़ गई और उन्होंने दानवों पर जीत प्राप्त की।
राखी के लिए शुभ मुहूर्त
ज्योतिष गुरु स्वामी हरिदयाल शास्त्री के मुताबिक चंद्रग्रहण रक्षाबंधन की रात 10:53 बजे से शुरू होगा। चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले यानी दोपहर 1:53 बजे से सूतक लग जाएगा। सुबह 11:04 बजे तक भद्रा काल का असर रहेगा।
चूंकि सूतक व भद्रा दोनों में ही शुभ कार्य वर्जित हैं, इसलिए इन दोनों के बीच का समय राखी बांधने के लिए शुभ है। पूर्वाह्न 11:05 बजे से अपराह्न 1:52 बजे तक रक्षाबंधन पर्व मना सकते हैं।
आराध्य के दर्शन-पूजन नहीं कर पाएंगे श्रद्धालु
रक्षाबंधन के दिन सावन का आखिरी सोमवार व पूर्णिमा स्नान होने से सावन मेले का समापन भी होना है। ऐसे में ग्रहण के चलते रामनगरी में डटे लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन भी नहीं कर पाएंगे। संत-धर्माचार्यों का कहना है कि, सावन पूर्णिमा को झूलनोत्सव का समापन बेहद भावपूर्ण व रंगारंग होता है।
मगर ग्रहण के चलते मंदिरों में दर्शन नहीं होने के कारण लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ एक दिन और ठहरेगी। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान-दान व दर्शन-पूजन कर आठ अगस्त को श्रद्धालु लौटेंगे। इसी दिन सावन मेले का समापन होगा।
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अयोध्या। भाई-बहन के असीम स्नेह का पर्व रक्षाबंधन सात अगस्त को है, मगर इस बार त्योहार पर भद्रा के साथ चंद्रग्रहण का साया भी रहेगा। करीब 12 साल बाद ऐसा संयोग बना है, जब रक्षाबंधन के दिन ग्रहण लग रहा है।
इस बार रक्षाबंधन के दिन सूतक भी लगेगा। सूतक लगने से पहले भद्रा का असर रहेगा। इसके चलते रामनगरी के सभी मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे, साथ ही मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर में विराजमान रामलला के दर्शन भी नहीं होंगे।
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चंद्रग्रहण के कारण निर्धारित दर्शन अवधि की दूसरी पाली में मंदिर के पट बंद होने के बाद दोबारा अगले दिन ही खुलेंगे। चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले और सूर्यग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लगने की मान्यता है। ज्योतिष गुरु स्वामी हरिदयाल शास्त्री के मुताबिक सात अगस्त को चंद्रग्रहण लगेगा।
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ग्रहण का स्पर्श रात्रि 10:53 बजे होगा, इसका मोक्ष मध्यरात्रि के बाद 12:48 बजे होगा व इसका मध्य 11:50 बजे होगा। ग्रहण की अवधि एक घंटा 55 मिनट है और यह भारत में दिखेगा भी, जिसके चलते सूतक माना जाएगा।
सूतक के कारण रामनगरी के सभी मंदिर ग्रहण के स्पर्श के नौ घंटे पहले ही बंद कर दिए जाएंगे और फिर अगले दिन आठ अगस्त की सुबह ही विधिविधान से पूजन के बाद खुलेेंगे।
ऐसे शुरू हुआ राखी का त्योहार
रक्षाबंधन भाई-बहन मनाते हैं मगर ये पर्व भाई-बहन ने नहीं बल्कि पति-पत्नी ने शुरू किया था और तभी से ये पर्व मनाया जाने लगा। पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे।
देवराज इंद्र की पत्नी शचि देवताओं की हार से घबरा गईं और इंद्र के प्राणों की रक्षा के लिए तप करना शुरू कर दिया। तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ। शचि ने इस रक्षासूत्र को श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इससे देवताओं की शक्ति बढ़ गई और उन्होंने दानवों पर जीत प्राप्त की।
राखी के लिए शुभ मुहूर्त
ज्योतिष गुरु स्वामी हरिदयाल शास्त्री के मुताबिक चंद्रग्रहण रक्षाबंधन की रात 10:53 बजे से शुरू होगा। चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले यानी दोपहर 1:53 बजे से सूतक लग जाएगा। सुबह 11:04 बजे तक भद्रा काल का असर रहेगा।
चूंकि सूतक व भद्रा दोनों में ही शुभ कार्य वर्जित हैं, इसलिए इन दोनों के बीच का समय राखी बांधने के लिए शुभ है। पूर्वाह्न 11:05 बजे से अपराह्न 1:52 बजे तक रक्षाबंधन पर्व मना सकते हैं।
आराध्य के दर्शन-पूजन नहीं कर पाएंगे श्रद्धालु
रक्षाबंधन के दिन सावन का आखिरी सोमवार व पूर्णिमा स्नान होने से सावन मेले का समापन भी होना है। ऐसे में ग्रहण के चलते रामनगरी में डटे लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन भी नहीं कर पाएंगे। संत-धर्माचार्यों का कहना है कि, सावन पूर्णिमा को झूलनोत्सव का समापन बेहद भावपूर्ण व रंगारंग होता है।
मगर ग्रहण के चलते मंदिरों में दर्शन नहीं होने के कारण लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ एक दिन और ठहरेगी। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान-दान व दर्शन-पूजन कर आठ अगस्त को श्रद्धालु लौटेंगे। इसी दिन सावन मेले का समापन होगा।