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रामनगरी के तीन मंदिरों में झूलनोत्सव सबाब पर
Updated Thu, 13 Jul 2017 01:31 AM IST
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रामनगरी के तीन मंदिरों में झूलनोत्सव की धूम
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में झूला महोत्सव का उल्लास छलकने लगा है। अयोध्या के रंगमहल, रामकचेहरी धाम, सद्गुरु सदन में गुरू पूर्णिमा पर्व से शुरू होने वाला झूला उत्सव पूरे चरम पर है। जबकि रामनगरी के अन्य मंदिरों में श्रावण शुक्ल तृतीया को मणिपर्वत पर पड़ने वाले झूले के साथ झूलनोत्सव का श्रीगणेश होगा।
मधुरोपासना की पीठ रंगमहल में झूलनोत्सव की धूम है। मंदिर में रजत हिंडोले पर विराजमान अपने आराध्य के झूला बिहार का दृश्य देखकर भक्त भावविभोर हो रहे हैं। वहीं सांस्कृतिक संध्या भी भक्तों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
एक माह चलने वाले झूलन उत्सव के दौरान भगवान की दो फूल बंगला झांकियां भी सजाई जाती हैं। वहीं, रामकचेहरी धाम में भी झूलन महोत्सव का रंग चटख है। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भक्तों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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सद्गुरु सदन गोलाघाट में सावनी धारा प्रवाहित हो रही है। कजरी गीतों की कर्णप्रिय धुन लोगों को रोमांचित कर रही है। सांयकाल होते ही मंदिर के जगमोहन में श्रद्धा का चरमोत्कर्ष प्रतीत होता है। यहां विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रद्धाकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।
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अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में झूला महोत्सव का उल्लास छलकने लगा है। अयोध्या के रंगमहल, रामकचेहरी धाम, सद्गुरु सदन में गुरू पूर्णिमा पर्व से शुरू होने वाला झूला उत्सव पूरे चरम पर है। जबकि रामनगरी के अन्य मंदिरों में श्रावण शुक्ल तृतीया को मणिपर्वत पर पड़ने वाले झूले के साथ झूलनोत्सव का श्रीगणेश होगा।
मधुरोपासना की पीठ रंगमहल में झूलनोत्सव की धूम है। मंदिर में रजत हिंडोले पर विराजमान अपने आराध्य के झूला बिहार का दृश्य देखकर भक्त भावविभोर हो रहे हैं। वहीं सांस्कृतिक संध्या भी भक्तों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
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एक माह चलने वाले झूलन उत्सव के दौरान भगवान की दो फूल बंगला झांकियां भी सजाई जाती हैं। वहीं, रामकचेहरी धाम में भी झूलन महोत्सव का रंग चटख है। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भक्तों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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सद्गुरु सदन गोलाघाट में सावनी धारा प्रवाहित हो रही है। कजरी गीतों की कर्णप्रिय धुन लोगों को रोमांचित कर रही है। सांयकाल होते ही मंदिर के जगमोहन में श्रद्धा का चरमोत्कर्ष प्रतीत होता है। यहां विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रद्धाकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।