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चैलेंज के लिए आए प्रथम 100 आवेदन तय करेंगे फेल परीक्षार्थियों का भविष्य
Updated Tue, 26 Jun 2018 12:32 AM IST
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विशेषज्ञ करेंगे 100 उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन
फैजाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय प्रशासन अनुत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के प्रकरण पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। चैलेंज लिए आए प्रथम 100 आवेदनों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराने जा रहा है। खास यह है कि पूरा मूल्यांकन कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित की निगरानी में बाहरी विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा। इसका परिणाम आने व चैलेंज मूल्यांकन के फॉर्म की संख्या निर्धारण होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन आगे की नीति तय करेगा। इसमें फेल अभ्यर्थियों को बैक पेपर का विकल्प भी सुझाया जा सकता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने लगभग एक पखवारे पूर्व स्नातक का परीक्षा परिणाम घोषित किया है। विश्वविद्यालय के घोषित परिणाम के अनुसार 3,37,925 छात्रों में से 1,10,672 फेल हुए थे। खास तौर पर बीएससी तृतीय वर्ष व बीएससी एजी चतुर्थ वर्ष के परीक्षार्थियों का पास प्रतिशत काफी कम है। परीक्षा परिणाम की घोषणा के बाद छात्रों के आंदोलन से लेकर राजनीतिक दलों की ओर से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की गई। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने चैलेंज मूल्यांकन का विकल्प छात्रों के लिए लिए खोल दिया। अब तक एक हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया है। चैलेंज मूल्यांकन की प्रक्रिया खर्चीली व जटिल होने के कारण छात्र-छात्राओं में काफी आक्रोश है। अब ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन चैलेंज मूल्यांकन से पूर्व अपने तौर पर मूल्यांकन को लेकर स्वत: स्पष्ट हो लेना चाहता है। विश्वविद्यालय चैलेंज मूल्यांकन के लिए आए प्रथम 100 प्रार्थना पत्र की कॉपियों का अपने स्तर से पुनर्मूल्यांकन कराने जा रहा है। इसके परिणाम आने के बाद विश्वविद्यालय छात्र हितों को देखते हुए नई नीति बनाएगा। माना यह जा रहा है कि अगर कॉपियों के प्राप्त अंकों में काफी बदलाव मिलता है तो छात्रों को बैक पेपर भरे जाने की सलाह दी जा सकती है।
परीक्षा समिति पर भी कार्रवाई का खतरा
चैलेंज के लिए आए प्रथम 100 आवेदनों की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के परिणाम आने के बाद कार्रवाई का दौर शुरू होना तय माना जा रहा है। इसमें परीक्षकों के साथ परीक्षा समिति भी कार्रवाई की जद में आ सकती है। क्योंकि परीक्षा से लेकर मूल्यांकन प्रक्रिया परीक्षा समिति की देखरेख में संपन्न हुई है। ऐसे में परीक्षा से लेकर मूल्यांकन तक की समस्त जिम्मेदारी परीक्षा समिति की ही बनती है। कैसे और कहां चूक हुई परीक्षा समिति को इसका जवाब जरूर देना होगा।
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आज से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन
विश्वविद्यालय ने छात्र संगठनों की मांग पर चैलेंज प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। परीक्षा नियंत्रक एसएल पाल ने बताया है कि मंगलवार विश्वविद्यालय की अधिकारिक वेबसाइट पर लिंक दिखाई देने लगेगा। चैलेंज मूल्यांकन करने वाले परीक्षार्थी 10 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं।
चैलेंज के लिए आए प्रथम 100 आवेदनों की उत्तर पुस्तिकाओं का विषय विशेषज्ञों की ओर पुनर्मूल्यांकन कराया जाना है। इसके परिणाम आने के बाद आगे छात्र हित को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा। यह अवश्य तय है कि 100 उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का परिणाम आने पर संलिप्त संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - प्रोफेसर मनोज दीक्षित, कुलपति अवध विश्वविद्यालय
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फैजाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय प्रशासन अनुत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के प्रकरण पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। चैलेंज लिए आए प्रथम 100 आवेदनों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराने जा रहा है। खास यह है कि पूरा मूल्यांकन कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित की निगरानी में बाहरी विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा। इसका परिणाम आने व चैलेंज मूल्यांकन के फॉर्म की संख्या निर्धारण होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन आगे की नीति तय करेगा। इसमें फेल अभ्यर्थियों को बैक पेपर का विकल्प भी सुझाया जा सकता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने लगभग एक पखवारे पूर्व स्नातक का परीक्षा परिणाम घोषित किया है। विश्वविद्यालय के घोषित परिणाम के अनुसार 3,37,925 छात्रों में से 1,10,672 फेल हुए थे। खास तौर पर बीएससी तृतीय वर्ष व बीएससी एजी चतुर्थ वर्ष के परीक्षार्थियों का पास प्रतिशत काफी कम है। परीक्षा परिणाम की घोषणा के बाद छात्रों के आंदोलन से लेकर राजनीतिक दलों की ओर से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की गई। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने चैलेंज मूल्यांकन का विकल्प छात्रों के लिए लिए खोल दिया। अब तक एक हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया है। चैलेंज मूल्यांकन की प्रक्रिया खर्चीली व जटिल होने के कारण छात्र-छात्राओं में काफी आक्रोश है। अब ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन चैलेंज मूल्यांकन से पूर्व अपने तौर पर मूल्यांकन को लेकर स्वत: स्पष्ट हो लेना चाहता है। विश्वविद्यालय चैलेंज मूल्यांकन के लिए आए प्रथम 100 प्रार्थना पत्र की कॉपियों का अपने स्तर से पुनर्मूल्यांकन कराने जा रहा है। इसके परिणाम आने के बाद विश्वविद्यालय छात्र हितों को देखते हुए नई नीति बनाएगा। माना यह जा रहा है कि अगर कॉपियों के प्राप्त अंकों में काफी बदलाव मिलता है तो छात्रों को बैक पेपर भरे जाने की सलाह दी जा सकती है।
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परीक्षा समिति पर भी कार्रवाई का खतरा
चैलेंज के लिए आए प्रथम 100 आवेदनों की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के परिणाम आने के बाद कार्रवाई का दौर शुरू होना तय माना जा रहा है। इसमें परीक्षकों के साथ परीक्षा समिति भी कार्रवाई की जद में आ सकती है। क्योंकि परीक्षा से लेकर मूल्यांकन प्रक्रिया परीक्षा समिति की देखरेख में संपन्न हुई है। ऐसे में परीक्षा से लेकर मूल्यांकन तक की समस्त जिम्मेदारी परीक्षा समिति की ही बनती है। कैसे और कहां चूक हुई परीक्षा समिति को इसका जवाब जरूर देना होगा।
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आज से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन
विश्वविद्यालय ने छात्र संगठनों की मांग पर चैलेंज प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। परीक्षा नियंत्रक एसएल पाल ने बताया है कि मंगलवार विश्वविद्यालय की अधिकारिक वेबसाइट पर लिंक दिखाई देने लगेगा। चैलेंज मूल्यांकन करने वाले परीक्षार्थी 10 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं।
चैलेंज के लिए आए प्रथम 100 आवेदनों की उत्तर पुस्तिकाओं का विषय विशेषज्ञों की ओर पुनर्मूल्यांकन कराया जाना है। इसके परिणाम आने के बाद आगे छात्र हित को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा। यह अवश्य तय है कि 100 उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का परिणाम आने पर संलिप्त संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - प्रोफेसर मनोज दीक्षित, कुलपति अवध विश्वविद्यालय