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अखिलेश के राज में बदहाल होती यूपी की कानून व्यवस्था

Wed, 02 Apr 2014 09:27 AM IST
Updated Wed, 02 Apr 2014 09:27 AM IST
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failure of akhilesh government, 10th robbery in a years

नई दिल्ली-हावड़ा रूट पर टुंडला से कानपुर के बीच जिस तरह ट्रेनों में डकैतियां हो रही हैं उससे यह क्षेत्र अतिसंवेदशील हो गया है। बावजूद इसके रेलवे प्रशासन व रेलवे पुलिस यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कतई गंभीर नहीं है। यह वारदातें रेलवे के सुरक्षा दावों की पोल खोल रही हैं।

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बीते एक साल के दौरान इटावा के आसपास नौ बड़ी ट्रेन डकैतियां पड़ चुकी हैं। इसमें कोई शक नहीं कि इस क्षेत्र में ट्रेन डकैतों का कोई संगठित गैंग काम कर रहा है। देश के किसी भी रेलवे रूट की अपेक्षा इस रूट पर एक साल में सबसे अधिक वारदातें हुईं। यात्रियों से लाखों की संपत्ति लूटी जा चुकी है।
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प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जिला के आसपास संगठित गिरोह चिंता का विषय है। ये वारदातें प्रदेश सरकार के सुरक्षा दावों की भी धज्जियां उड़ा रही हैं। हर बार की तरह इस बार भी आरपीएफ और जीआरपी के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और मौका मुआयना करने के बाद चलते बने। बस अफसरों ने अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी होने की बात कही।
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एक बार भी अफसरों ने इस पर विचार नहीं किया कि ट्रेनों में बढ़ रही लूटपाट की वारदातों से सबक लेते हुए वह यात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता किस तरह करेंगे। नई दिल्ली-कानपुर रेलवे स्टेशन के बीच एक वर्ष में यह ट्रेन डकैती की 10वीं बड़ी वारदात है।

वारदात एक

failure of akhilesh government, 10th robbery in a years

1 अप्रैल 2013 को डाउन जनसाधारण एक्सप्रेस के जनरल कोच में टूंडला रेलवे स्टेशन निकलने के बाद बदमाशों ने डाका डाला। दर्जन भर यात्रियों से लूटपाट के साथ मारपीट की। चलती ट्रेन से कूदकर भागते समय कुछ बदमाश घायल भी हुए, लेकिन पकड़े नहीं गए।

वारदात दो

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5 अप्रैल 2013 को डाउन नीलाचंल एक्सप्रेस के जनरल कोच में डकैती पड़ी। शिकोहाबाद-जसवंतनगर के बीच चलती ट्रेन में मारपीट कर यात्रियों को लूटा गया। इसके बाद वारदात को अंजाम देकर लुटेरे शहर के विचारपुरा के पास चेनपुलिंग करके भाग निकले।

वारदात तीन

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17 जून 2013 को अप सीमांचल एक्सप्रेस में कानपुर सेंट्रल के आउटर सिग्नल के पास लूटपाट की गई। जनरल कोच में बदमाशों ने करीब एक दर्जन यात्रियों को लूटा। विरोध करने पर दिल्ली जा रहे नेपाली युवक को गोली मारकर घायल किया।

वारदात चार

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20 अगस्त 2013 की रात नई दिल्ली से इलाहाबाद जा रही प्रयागराज एक्सप्रेस में सवार आधा दर्जन बदमाशों ने हथियारों की दम पर इलाहाबाद रेलवे स्टेशन से लेकर टूंडला रेलवे स्टेशन तक जनरल बोगी में यात्रियों को बंधक बनाकर लूटपाट की। बदमाशों ने 35 यात्रियों को अपना निशाना बनाया।

वारदात पांच

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14 अक्तूबर 2013 की रात गोरखपुर से बांद्रा जा रही अप अवध एक्सप्रेस में फफूंद रेलवे स्टेशन से चढ़े बदमाशों ने जनरल कोच में डाका डाला। करीब दो दर्जन यात्रियों के साथ असलहे के दम पर लूटपाट की गई। लुटेरे भरथना रेलवे स्टेशन के आउटर पर उतरकर भाग गए।

वारदात छह

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18 नवंबर 2013 की रात आनंद विहार टर्मिनल से पटना जा रही जनसाधारण एक्सप्रेस में आधा दर्जन बदमाशों ने जनरल कोच में डाका डाला। नई दिल्ली ने कानपुर रेलवे स्टेशन के बीच करीब 32 यात्रियों से गहने, नकदी, मोबाइल सहित अन्य सामान लूटा गया।

वारदात सात

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22 नवंबर 2013 को जोधपुर से हावड़ा जा रही जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस को लुटेरों ने निशाना बनाया। टूंडला रेलवे स्टेशन से चढ़े हथियारबंद बदमाशों ने जनरल बोगी में जमकर लूटपाट की। लुटेरों ने बोगी में सवार 71 यात्रियों को लूटा। विरोध करने वाले यात्रियों को जमकर पीटा भी।

वारदात आठ

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24 दिसंबर की रात साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (डाउन) नई दिल्ली-भागलपुर एक्सप्रेस में डाका पड़ा। करीब दो दर्जन यात्रियों को लुटेरों ने हथियारों की दम पर बंधक बनाकर लूटा।

वारदात नौ

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16 जनवरी 2014 की रात बदमाशों ने ऊंचाहार एक्सप्रेस के जनरल कोच में यात्रियों को बंधक बनाकर डाका डाला। जीआरपी वारदात से इंकार ही कर रही है। इस ट्रेन में भी दर्जन भर यात्रियों के साथ लूटपाट हुई।

डकैती की दसवीं बड़ी वारदात

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बीते एक वर्ष में ट्रेन डकैती की जो भी वारदातें हुई हों, उनमें से सबसे अधिक शातिराना अंदाज में बदमाशों ने संगम एक्सप्रेस में लूट की वारदात को अंजाम दिया। अभी तक लुटेरे जनरल कोच में ही चलती ट्रेन में वारदात को अंजाम दिया करते थे, लेकिन इस बार जैसे रिहर्सल करके आए हों।

ट्रेन को सटीक जगह पर रोका गया फिर बेहद ही शातिराना ढंग से वारदात को अंजाम दिया गया। ट्रेन की चेनपुलिंग भी ठीक उस जगह पर हुई जहां डकैतों का झुंड पहले से ही पटरी किनारे डेरा डाले था। मसलन ट्रेन रुकने के बाद एस-2 व एस-3 बोगी में चढ़ने में उन्हें एक मिनट भी नहीं लगा। ट्रेन जैसे ही रुकी एक मिनट के अंदर पूरी बोगी डकैतों के कब्जे में हो गई।

सही समय पर ट्रेन का रुकना, ट्रेन के अंदर से गेट खुलना, बताता है कि गैंग कितनी जबर्दस्त प्लानिंग करके निकला था। खास बात ये रही कि जितनी देर तक ट्रेन में डकैती पड़ी उतनी देर तक एक दर्जन से अधिक डकैत ट्रेन के नीचे अपने साथियों की सुरक्षा में तैनात रहे। यात्रियों की मानें तो डकैतों ने पूरी ट्रेन को कब्जे में ले रखा था।

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