{"_id":"4e2a724614b64e1f64fc3e42f15c581a","slug":"eligibility-for-teachers","type":"story","status":"publish","title_hn":"2nd डिवीजन वाले भी बनेंगे अब गुरूजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
2nd डिवीजन वाले भी बनेंगे अब गुरूजी
अमर उजाला, गोरखपुर
Updated Fri, 06 Dec 2013 11:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी में महाविद्यालय और यूनिवर्सिटी में प्रवक्ता बनने के लिए अब स्नातक कक्षाओं में 50 फीसदी अंक की बाध्यता खत्म कर दी गई है। नए निर्देश के तहत द्वितीय श्रेणी में स्नातक उपाधि हासिल करने वाले विद्यार्थी भी प्राध्यापक बन सकेंगे।
विज्ञापन
अशोक कुमार श्रीवास्तव एवं अन्य द्वारा नवंबर 2012 में उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका पर कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के बाद शासन ने यह निर्णय लिया है।
प्रमुख सचिव नीरज गुप्ता और विशेष सचिव निधि केसरवानी की ओर से जारी नए आदेश के तहत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रवक्ता (अब असिस्टेंट प्रोफेसर) पद पर चयन या नियुक्ति के लिए स्नातक स्तर पर निर्धारित 50 प्रतिशत अंक के स्थान पर द्वितीय श्रेणी कर दिया गया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने अशोक कुमार श्रीवास्तव एवं अन्य की याचिका पर 11 अगस्त 2013 को फैसला सुनाया था, जिस पर उच्च शिक्षा अनुभाग ने 25 नवंबर 2013 को यह निर्णय दिया। गत 27 नवंबर को शासन द्वारा जारी आदेश प्रति गोरखपुर यूनिवर्सिटी को प्राप्त हो गई है।
विज्ञापन
बता दें कि अब तक प्रवक्ता पद पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम अर्हता स्नातक कक्षा में 50 फीसदी, स्नातकोत्तर में 55 फीसदी और नेट अथवा पीएचडी डिग्री अनिवार्य थी।
शासन के इस निर्णय से ऐसे हजारों विद्यार्थियों का प्रवक्ता बनने के सपना पूरा हो सकेगा, जिन्हें किसी कारण से स्नातक कक्षा में 50 फीसदी से कम अंक मिले हैं पर स्नातकोत्तर में 55 फीसदी अंक के साथ नेट अथवा पीएचडी कर चुके हैं।