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'यमराज' डॉक्टर पर आधा करोड़ का जुर्माना
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Sat, 04 May 2013 12:51 PM IST
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उत्तरप्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में मरीज को गलत दवा देने से मौत होने का दोषी पाते हुए वाराणसी के डॉक्टर और नर्सिंग होम को 50 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश किया है।
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17 अक्टूबर 2008 को प्रभा त्रिपाठी को पेट में दर्द की शिकायत को लेकर भर्ती कराया गया था, लेकिन गलत दवा देने की वजह से 31 दिसंबर 2008 को उनकी मृत्यु हो गयी।
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इस मामले में दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल को इस मामले में दोषमुक्त करार दिया गया है।
तीन सदस्यीय आयोग ने वाराणसी के नर्सिंग होम और मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर पर संयुक्त रूप से हर्जाना अदा करने का आदेश सुनाया है।
आयोग के सदस्य एसएए रिजवी, अशोक कुमार चौधरी और आलोक कुमार बोस ने सूर्य मेडिकल हॉस्पिटल और शोध केन्द्र, महमूरगंज की मुख्य प्रबंध निदेशिका डॉक्टर इंदू सिंह को दो महीने में हर्जाने की राशि अदा करने का आदेश दिया है।
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आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि तीस लाख रुपये मरीज प्रभा त्रिपाठी की मौत और बीस लाख रुपये गलत इलाज के लिए हर्जाना किया गया है। इसके साथ ही दवा इलाज में खर्च हुए पैसे लौटाने का भी आदेश दिया है।
इस पैसे को मरीज के तीमारदारों को इफ्को को लौटाने का निर्देश दिया गया है क्योंकि मरीज की दवा में खर्च की जिम्मेदारी इफ्को ने उठायी थी। मरीज के पति राजकुमार त्रिपाठी इफ्को में निदेशक पद पर कार्यरत हैं।
गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद के रहने वाले राज कुमार त्रिपाठी और उनके दो पुत्रों पवन और अमित ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 17/13 के तहत डॉ. इंदू सिंह अपोलो क्लीनिक और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल दिल्ली के खिलाफ मामला 2009 में दायर किया था, जिस पर फैसला सुनाया गया। आयोग ने इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल दिल्ली को इस मामले से बरी कर दिया।