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नहीं सुनी गई फरियाद, तो खा लिया जहर
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 17 Jul 2013 12:27 PM IST
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जिस तालाब से पेट पालता था उसका दुबारा पट्टा कराने के लिए प्रधान के दर पर गया तो उसने अपने प्रतिनिधि के पास जाने को कह दिया।
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लेखपाल का दरवाजा खटखटाया तो उसने पट्टा कराने के लिए दस हजार रुपये की मांग कर डाली। थक-हार कर गुहार लगाने के लिए बच्चों के साथ तहसील दिवस में चला आया, लेकिन यहां एसडीएम ने भी उसे दुत्कार दिया।
हताश फरियादी ने तहसील गेट के सामने अपने सारे कागज पत्तर, रुपया-पैसा फेंक कीटनाशक पी लिया। उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। मामला लखीमपुर खीरी के निघासन का है।
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बच्चों के साथ आया था
मंगलवार को ब्लाक सभागार में आयोजित तहसील दिवस में एसडीएम शिवदयाल फरियादियों की समस्या सुन रहे थे। करीब बारह बजे तिकुनियां कोतवाली क्षेत्र के गांव रायपुर कोल्हउरी का जोड़ीलाल अपने तीन बच्चों के साथ तहसील दिवस में आया।
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प्रधान ने नहीं सुनी फरियाद
उसने एसडीएम को बताया कि उसके पास एक बीघा भी जमीन नहीं थी। करीब दस साल पहले तब के ग्राम प्रधान ने दो हेक्टेयर तालाब का पट्टा बना दिया था। उसमें मछली पालकर वह परिवार की गाड़ी खींच रहा था। दस सितंबर, 2012 को पट्टे की अवधि पूरी हो गई।
तब से वह ग्राम प्रधान से दुबारा पट्टा बनवाने की फरियाद कर रहा था। उसके अनुसार प्रधान ने एक हेक्टेयर तालाब पर आदर्श तालाब बना दिया।
लेखपाल ने मांगे 10 हजार
तालाब का जो हिस्सा जोड़ीलाल के कब्जे में रहा उसकी मछलियां भी प्रधान ने निकलवा लीं। आरोप है कि उसने हल्का लेखपाल से पट्टा दुबारा बनाने का आग्रह किया तो उससे दस हजार रुपये मांगे गए।
खो दिया आपा
तहसील दिवस में एसडीएम को सारे कागजात दिखाने के साथ ही जोड़ीलाल दहाड़ें मारकर चिल्लाने लगा। एसडीएम शायद उसकी बात समझ नहीं पाए और उसके चीखने चिल्लाने से नाराज होकर बाहर जाने को कह दिया।
फेंक दिया सब रुपया-पैसा
जोड़ीलाल बाहर नहीं गया तो एसडीएम ने अपने अर्दली से कहकर उसे गेट के बाहर करवा दिया। उसके बाद वह रोने लगा। उसने अपने थैले से सारे कागज, मोबाइल और रुपये भी फेंक दिए।
लोग कुछ समझ पाते इससे पहले ही वह थैले में रखी कीटनाशक दवा गटक गया। जानकारी मिलते ही
मौजूद अफसरों के पैरों तले की जमीन खिसक गई।
दरोगा को साथ भेजकर जोड़ीलाल को सीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।