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'केस करना है तो पहले सरकार से पूछो'

Wed, 05 Jun 2013 01:56 AM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
इलाहाबाद/ब्यूरो Updated Wed, 05 Jun 2013 01:56 AM IST
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department cant case without govt permission

उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन काम कर रहे विभाग बिना सरकार की अनुमति के मुकदमा दाखिल नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने प्रमुख सचिव न्याय से जानकारी मांगी है कि प्रदेश के कितने ऐसे सरकारी विभाग हैं, जिन्होंने मुकदमा दाखिल करने से पूर्व न्याय विभाग से अनुमति नहीं प्राप्त की।

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इन्होंने कितने मुकदमे दाखिल किए और उन मुकदमों के लिए वकीलों को फीस कहां से दी गई। हाईकोर्ट ने ऐसे एक मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी इटावा की ओर दाखिल अपील को खारिज कर दिया है।
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कोर्ट ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को जांच करने का निर्देश दिया है कि बीएसए इटावा ने किस प्रकार से दूसरे वकील के मार्फत मुकदमा दाखिल किया, जबकि सरकार के पास खुद के वकीलों का पैनल मौजूद है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि वकीलों को भुगतान करने में कितना सरकारी धन खर्च किया गया।
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इस पूरे मामले की जांच के बाद अधिकारियों को छह माह में अपनी रिपोर्ट न्यायालय में देनी है। बीएसए इटावा की ओर से दाखिल द्वितीय अपील पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने यह आदेश दिया। प्रकरण के मुताबिक इटावा के अध्यापक रामशंकर और अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।


याचिका पर रामशंकर आदि के पक्ष में फैसला हुआ तो राज्य सरकार ने उसके खिलाफ अपील दाखिल की। सरकार अपील में हार गई।

इसके बाद द्वितीय अपील दाखिल नहीं की गई तो बीएसए इटावा ने अपनी ओर से द्वितीय अपील दाखिल कर दी। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए सवाल उठाया कि बिना सरकार की अनुमति से बीएसए ने अपनी ओर से मुकदमा कैसे दाखिल कर दिया।

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