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कैदियों की शराफत है, वरना क्या मुंह दिखाती पुलिस

Tue, 09 Apr 2013 12:06 AM IST
इलाहाबाद/फरहत खान
इलाहाबाद/फरहत खान Updated Tue, 09 Apr 2013 12:06 AM IST
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Decency of prisoners, or else face shows what police

उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद में दस कैदियों ने फरार होकर भले ही खाकी को दागदार कर पुलिस को चुनौती दे डाली लेकिन वैन में सवार शेष कैदियों ने तो पुलिसवालों पर बड़ा रहम किया। पहले चार कैदी वैन से कूदे फिर छह और कूद पड़े। उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था।

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वैन में 42 कैदी और बचे थे। ये उनकी शराफत थी जो वह फरार नहीं हुए बल्कि चुपचाप वैन में ही बैठे रहे। यदि कैदी चाह लेते तो वैन खाली हो सकती थी।

हर किसी को भागने का पूरा मौका हासिल था। यदि ऐसा हो जाता तो पुलिसवाले मुंह दिखाने के काबिल ही न रहते।

अपने साथियों को फरार होते देख रहे दूसरे कैदी पुलिसवालों की मदद करना चाह रहे थे। जब अफसर फोर्स लेकर पहुंचे तो कैदियों ने पूरी जानकारी दी।

कौन कैसे किस तरफ से भागा इसका पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया। अधिकारियों को तो पता नहीं था कि कितने कैदी वैन से रफूचक्कर हो गए। ये तो शेष बचे कैदी थे जो कूदने वालों की गिनती करते रहे और तुरंत बता दिया कि 10 भागे हैं।
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कचहरी लॉकअप में कैदियों को बंद करने के बाद एसएसपी मोहित अग्रवाल ने चश्मदीदों से लंबी बात की। पुलिस अफसरों को भी यह कहने में गुरेज नहीं रहा कि बाकी बचे कैदियों ने बहुत शराफत दिखाई वरना तस्वीर कुछ और ही होती।

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