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यूपी के छोरे ने बनाया आंखों के इशारे से चलने वाला कंप्यूटर
तरुण पाराशर
Updated Fri, 12 Jul 2013 12:52 AM IST
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आधुनिक तकनीक में कुछ भी असंभव नहीं है। विज्ञान गल्प के नाम से मशहूर कहानियों में जिस प्रकार की संकल्पनाओं का जिक्र होता है वे साकार होने लगी हैं। कुछ समय पहले टच स्क्रीन कंप्यूटर भी बाजार में आ गए।
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अब इससे आगे कंप्यूटर की स्क्रीन भी छूने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मात्र आंखों के इशारे से कंप्यूटर का कर्सर घूमेगा।
मुरादाबाद के नवीन नगर में रहने वाले पवन कुमार ने आईआईटी जोधपुर से बीटेक किया है। उन्होंने अपने प्रोजेक्ट में आई ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया।
जिसके माध्यम से कंप्यूटर का कर्सर आंखों की पुतली के इशारे पर घूमेगा। ट्रैकिंग सिस्टम का प्रयोग करने से माउस की जरूरत नहीं होगी। इसके प्रयोग से विकलांग कंप्यूटर का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।
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बस आंखों की पुतली के इशारे से कंप्यूटर का कर्सर चलेगा। इसकी लागत भी मात्र 1500 रुपये आई है। पवन के इस प्रोजेक्ट को आईआईटी जोधपुर में पहला स्थान मिला है।
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संस्थान के 10 जुलाई को हुए दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इस प्रोजेक्ट के लिए पवन और सहयोगियों को गोल्ड मेडल पहनाया।
कैसे काम करता है आई ट्रैकर
पवन ने बताया कि आई ट्रैकर में एक चश्मे का फ्रेम प्रयोग किया गया है। फ्रेम में एक वेबकैम कैमरा लगाया उसके आगे एक डिवाइस लगाई गई है। वेबकैम आंख की पुतली की गतिविधि को कैप्चर करेगा। उसके एंगल और डायरेक्शन को डिवाइस में भेजेगा। डिवाइस कंप्यूटर के कर्सर से को नियंत्रित करता है।
पुतली मूवमेंट मिलने के आधार पर कर्सर को चलाएगा। उन्होंने बताया इसकी मदद से विकलांग व्यक्ति भी कंप्यूटर का बिना माउस के प्रयोग कर सकेंगे। जो समय हमें दिया गया उसमें इतना ही शोध कर पाए।
इसमें केवल 1500 रुपये की लागत आई। हालांकि अभी इसका कमर्शियल प्रयोग नहीं किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को पवन कुमार शर्मा (कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग), प्रणय बालड़ (कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग), प्रशांत गोदारा (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) ने पूरा किया।