फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   cmo murder's investigation becomes a problem for cbi

सीबीआई के लिए ‘आफत’ बनी सीएमओ हत्याकांड जांच

Sun, 20 Jan 2013 10:37 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Sun, 20 Jan 2013 10:37 AM IST
विज्ञापन
cmo murder's investigation becomes a problem for cbi

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के लिए सीएमओ हत्याकांड की जांच ‘आफत’ बन गई है। एक तरफ वह सुस्त जांच के लिए हाईकोर्ट के निशाने पर है तो दूसरी ओर इस मामले के एक अहम पक्षकार डॉ सचान के परिजनों ने उसकी विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

विज्ञापन


अब तक ‘बड़ों’ पर शिकंजा कसने में नाकाम सीबीआई पर जानबूझकर ढिलाई बरतने के आरोप भी लग रहे हैं। आरोप यह भी हैं कि सीबीआई के अफसर भी या तो यह जांच करना नहीं चाहते दूसरी और इस जांच में शामिल अफसरों को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ही हटा दिया जाता है।
विज्ञापन


पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह भी मानते हैं कि ‘इस मामले में सीबीआई की कार्यशैली के पीछे जरूर कोई ‘दबाव’ काम कर रहा है। यह दबाव राजनीतिक है या ब्यूरोक्रेसी का, यह तो सीबीआई ही बेहतर बता सकती है, लेकिन जरूर कोई ‘बड़ा’ सीबीआई की विवेचना में रोड़ा अटका रहा है। उनका कहना है कि इन्हीं दबावों ने जांच की गति सुस्त कर दी है और अब एक तरह से यह जांच उनके लिए आफत जैसी हो गई है। यानी इस जांच में कुछ करना ही नहीं है और जांच के नतीजे में भी कुछ सामने नहीं आना है।’
विज्ञापन
विज्ञापन


सीएमओ हत्याकांड की जांच में सीबीआई पर सुस्ती के आरोप इसलिए भी मढ़े जा रहे हैं क्योंकि जुलाई 2011 से अब तक कई बार कोर्ट से समय बढ़ाने की मांग कर चुकी है। जांच को डेढ़ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं, वहीं तफ्तीश में नतीजा सिफर है। सीबीआई ने पिछले साल सीएमओ हत्याकांड में आखिरी बार केवल पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी डा.एके शुक्ला को गिरफ्तार किया था।

सुबूतों के अभाव में वह भी कुछ दिन बाद ही जमानत पर रिहा हो गए थे। इसके बाद से सीबीआई ने न तो कोई गिरफ्तारी की और न ही तफ्तीश की दिशा में कुछ खास प्रयास किया। सीबीआई ने अब कोर्ट में विवेचना का प्रगति हलफनामा दायर कर दो महीने का समय काल डिटेल्स खंगालने केलिए मांगा है। कोर्ट ने सीबीआई की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर जांच कब पूरी होगी?

छोटा कोई बचा नहीं, बड़ा कोई फंसा नही
सीएमओ मर्डर केस में सीबीआई की जांच बड़े रसूखदारों के बजाए छोटों पर ही केंद्रित रही। ऐसे मामलों में कद्दावर नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठे, लेकिन उसके सियासी कद को देखते हुए उनको खुल कर जांच के दायरे में नहीं लिया गया है।

काफी हद तक सीबीआई ने मुकदमे दर्ज कर उनमें एक-दो बड़ों के नाम शामिल किए और पूछताछ भी की, लेकिन वह किसी भी हद तक नहीं पहुंच सकी। जहां गिरफ्तारी भी की गई, वहां पुख्ता सुबूत न होने की वजह से उन्हें आसानी से जमानत मिल गई। ऐसे लोगों के  रसूख का असर है जो सीबीआई की तफ्तीश रह-रह कर हिचकोले ले रही है।

किनारे कर दिए गए कई जांच अफसर
यह सीबीआई की कार्यशैली और बड़े लोगों का रसूख ही है, जिसकी वजह से कई अफसर इस जांच से किनारे कर दिए गए। इन मामलों की जांच सीबीआई को संदर्भित किए जाने की पहल के साथ ही सीबीआई के क्षेत्रीय निदेशक जावीद अहमद को जांच से किनारे कर दिया गया। हालांकि, उनके ही अधीनस्थ मामले की जांच कर रहे हैं, पर वे दिल्ली से तय अधिकारियों के पर्यवेक्षण में विवेचना कर रहे हैं।

कुछ ऐसे ही देहरादून में तैनात सीबीआई के एसपी नीलाभ को सचान व सीएमओ मर्डर केस की जांच से जोड़ने के लिए लाया गया था। अधिकारियों ने दावा किया था कि आरुषि मामले की विवेचना करने वाली तेज तर्रार टीम को तफ्तीश में लगा दिया गया है, पर बाद में नीलाभ को भी हाशिए पर कर दिया गया। यही हाल एडिशनल एसपी एससी कौल का हुआ। कौल ने भी बड़ों पर हाथ डालने के लिए उन्हें पूछताछ के लिए बुलाने की कवायद शुरू कर दी थी।


हालांकि, सीबीआई ने कौल को हटाने पर उठे सवालों की सफाई देते हुए कहा था कि यह विभागीय प्रक्रिया के तहत किया गया। सीबीआई का यह रवैया केंद्र में तय होने वाले राजनीतिक समीकरणों की वजह से है, बड़ों की ऊंची पहुंच से है या फिर इन दोनों बातों के गठजोड़ से है, यह तो स्पष्ट नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि सीबीआई के हाथ कहीं न कहीं बंधे जरूर है या फिर उसकी दिशा कहीं से निर्धारित हो रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed