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डीएसपी हत्याकांडः राजा भैया ने दिया इस्तीफा

Mon, 04 Mar 2013 10:52 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 04 Mar 2013 10:52 AM IST
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raja bhaiya resign from ministry in dsp murder case

उत्तर प्रदेश के कुंडा विधानसभा क्षेत्र के बलीपुर गांव में हुए खूनी संघर्ष के मामले में प्रदेश के खाद्य व रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने इस्तीफा सौंप दिया है। इस मामले में राजा भैया पर आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगा है।

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गौरतलब है कि बलीपुर गांव में शनिवार को शहीद हुए सीओ जियाउल हक की हत्या में प्रदेश के खाद्य व रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का भी नाम आया था। डीएसपी जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की तहरीर पर राजा भैया समेत उनके चार समर्थकों पर मुकदमा दर्ज किया गया।
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राजा भैया को साजिश (120 बी) का आरोपी बनाया गया है, जबकि उनके प्रतिनिधि हरिओम, नगर पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव, चालक रोहित सिंह और गुड्डू सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। राजीव सिंह व गुड्डू सिंह को देर रात पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच सरकार ने मारे गए डीएसपी के परिजनों को 20 लाख रुपये मदद देने की घोषणा की है।
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डीएसपी जियाउल हक हत्याकांड के विरोध में रविवार को पोस्टमार्टम के दौरान घरवालों ने जमकर हंगामा किया। इलाहाबाद के मुस्लिम बोर्डिंग के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव व राजा भैया के खिलाफ नारे लगाए। डीएसपी की पत्नी ने एडीजी लॉ एंड आर्डर अरुण कुमार के समक्ष आरोप लगाया कि ये लोग पहले से उनके पति को धमकी दे रहे थे। रात में इन्हीं लोगों ने उन्हें रोका और पीटने के बाद गोली मार दी। उन्होंने राजा भैया पर साजिश का आरोप लगाया।

उधर, बलीपुर में मारे गए प्रधान नन्हें यादव और सुरेश यादव के घरवालों ने गांव के कामता पाल, अजय पाल, राजीव सिंह, अजीत सिंह और गुड्डू सिंह के खिलाफ केस दर्ज कराया है। आरोपी कामता पाल और उसके रिश्तेदार का घर रात में फूंक दिया गया था। पाल बस्ती के लोग घर छोड़कर भागे हुए हैं। इस बीच, रविवार दोपहर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रधान और उनके भाई का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

राज्य सरकार ने प्रतापगढ़ एसपी को हटाया
राज्य सरकार ने प्रतापगढ़ के एसपी अनिल राय को हटाकर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। देवरिया के एसपी एलआर कुमार को प्रतापगढ़ का एसपी बनाया गया है। प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव ने प्रतापगढ़ व हाथरस में नए कप्तानों की तैनाती की जानकारी देने के साथ ही कहा कि अभी कुंडा मामले में जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अराजकता फैलाई है, पहले उनकी गिरफ्तारी होगी। अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था अरुण कुमार को इसी कार्रवाई के लिए प्रतापगढ़ भेजा गया है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के बाद इस बात की जांच होगी कि किन परिस्थितियों में फोर्स ने सीओ का साथ छोड़ा।

गोली मारने से पहले पीटा गया
डीएसपी जियाउल हक को बलीपुर गांव में गोली मारने से पहले लाठियों से पीटा गया था। चार डॉक्टरों के पैनल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दो गोलियां पैर व एक गोली सीने में पाई गई। इसके साथ ही शरीर के कई हिस्सों में चोटें पाई गईं। चोटों से साफ है कि पहले डीएसपी को लाठियों से पीटा, फिर गोली मारी गई।

मार्केट और प्लॉट पर था विवाद
प्रधान नन्हें यादव और कामता पाल के बीच दो बीघा जमीन पर बनी मार्केट और प्लॉट का विवाद है। प्रधानी चुनाव को लेकर भी रंजिश चल रही थी। प्रधान और उसके भाई के अंतिम संस्कार में मंत्री राजा भैया, सपा सांसद शैलेंद्र कुमार, एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह, विधायक मुन्ना यादव आदि पहुंचे।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रतापगढ़ के कुंडा इलाके में शनिवार को प्रधान, उसके भाई और डीएसपी की हत्या के मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। घटना बेहद दुखद है। कारण चाहे रंजिश हो या कुछ और, खूनखराबे की घटना नहीं होनी चाहिए। हमारी सरकार इस तरह की घटना बर्दाश्त नहीं करेगी। उचित कार्रवाई के निर्देश पुलिस प्रशासन को दे दिए गए हैं।

डीएसपी जियाउल हक की पत्नी की तहरीर के आधार पर मंत्री राजा भैया समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। फिलहाल सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। सीओ के कातिलों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जिन्होंने कानून अपने हाथ में लिया, वे सीखचों के पीछे होंगे।- आलोक शर्मा, आईजी


विवादों के राजा
रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, खाद्य एवं रसद मंत्री, उत्तर प्रदेश
03 नवंबर, 2002: भाजपा विधायक पुरन सिंह को जान से मारने की धमकी के आरोप में गिरफ्तार।
23 नवंबर, 2002: समर्थकों के घर से शराब दुकानों के दस्तावेज मिलने पर राजा भैया के खिलाफ मुकदमा दायर।
24 नवंबर, 2002: राजा भैया के भाई और निर्दलीय एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गिरफ्तार।
01 दिसंबर, 2002: राजा भैया और उनके पिता उदय प्रताप सिंह के खिलाफ डकैती और घर कब्जाने के मामले में मुकदमा दायर।
25 जनवरी, 2003: राजा भैया तथा उदय प्रताप सिंह के घर छापा, हथियार और विस्फोटक बरामद।
29 जनवरी, 2003: राजा भैया के तालाब से कंकाल बरामद होने के बाद उन पर हत्या का आरोप।
05 मई, 2003: उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मायावती सरकार ने रघुराज प्रताप सिंह, उनके पिता उदय प्रताप सिंह और रिश्तेदात अक्षय प्रताप के खिलाफ पोटा के तहत मुकदमा चलाने को मंजूरी दी।
14 नवंबर, 2005: राजा भैया व उनके पिता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कानपुर के पोटा कोर्ट में समर्पण किया।
17 दिसंबर, 2005: जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा।

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