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Bulandshahar News: आज घर-घर विराजेंगी मां दुर्गा, मंदिरों में तैयारी पूरी
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बुलंदशहर-शिकारपुर मार्ग पर जोत ले जाते माता के भक्त। संवाद
बुलंदशहर/जहांगीराबाद/अहार/औरंगाबाद। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ सोमवार से हो रहा है। रविवार को नगर से लेकर देहात तक के सभी मंदिरों को सजाया गया। श्रद्धालुओं ने बाजारों में जाकर पूजा और फलाहार आदि सामानों की खरीदारी की। सोमवार सुबह मंदिरों और घरों में घटस्थापना यानी कलश स्थापित कर मां भगवती की आराधना की जाएगी। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 9:05 से 11:35 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त का समय सुबह 11:49 से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा
शारदीय नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में रविवार को दिनभर उत्साह रहा। दिनभर बाजारों में खरीददारी करने के लिए महिला और पुरुषों की भीड़ लगी रही। लोगों ने पूजा के लिए कलश, नारियल, चुनरी, रोली, पान, घी, धूप बत्ती, अगरबत्ती, लांग, सुपारी, कपूर सहित पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री खरीदी। नगर के भगवानपुरा निवासी कैलाश पंडित ने बताया कि ने बताया कि इस बार माता रानी हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। नवरात्र में भगवती की उपासना से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। नवरात्र का प्रारंभ सोमवार से हो रहा है। यह शुभ संयोग देने वाला माना जाता है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाएगी। नवरात्र के पहले दिन घर में कलश की स्थापना की जाती है।
आराधना की विधि
नवरात्र के पहले दिन सोमवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर शुभ मुहूर्त में माता रानी की चौकी स्थापित करें। इसके बाद आसन लगाकर माता रानी की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर रखें। उसके बाद वस्त्र, चुनरी, फूल माला से मां का शृंगार करें। इसके बाद चौकी के सामने कलश स्थापित कर उसमें जौ बोएं। फल और मिठाई से माता रानी को भोग लगाकर सुख शांति और समृद्धि की कामना करें।
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जोत के साथ सड़कों पर गूंजे मां भगवती के जयकारे
शारदीय नवरात्र के एक दिन पहले रविवार को जिले की सड़कों पर मां भगवती के जयकारे गूंजते रहे। पूरे दिन दिल्ली कालका जी से मां की जोत लेकर श्रद्धालुओं के लौटने का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालु रंग-गुलाल उड़ाते और डीजे पर झूमते हुए गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। सोमवार को प्रथम शारदीय नवरात्र के दौरान लाई गई मां की जोत को मंदिरों व घरों में स्थापित किया जाएगा। माता की जोत लाने वालों में बच्चे, युवा और महिला-पुरुष शामिल रहे। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए सेवादार भी जगह-जगह शिविर लगाकर प्रसाद ग्रहण कराने में जुटे रहे।
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शारदीय नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में रविवार को दिनभर उत्साह रहा। दिनभर बाजारों में खरीददारी करने के लिए महिला और पुरुषों की भीड़ लगी रही। लोगों ने पूजा के लिए कलश, नारियल, चुनरी, रोली, पान, घी, धूप बत्ती, अगरबत्ती, लांग, सुपारी, कपूर सहित पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री खरीदी। नगर के भगवानपुरा निवासी कैलाश पंडित ने बताया कि ने बताया कि इस बार माता रानी हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। नवरात्र में भगवती की उपासना से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। नवरात्र का प्रारंभ सोमवार से हो रहा है। यह शुभ संयोग देने वाला माना जाता है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाएगी। नवरात्र के पहले दिन घर में कलश की स्थापना की जाती है।
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आराधना की विधि
नवरात्र के पहले दिन सोमवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर शुभ मुहूर्त में माता रानी की चौकी स्थापित करें। इसके बाद आसन लगाकर माता रानी की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर रखें। उसके बाद वस्त्र, चुनरी, फूल माला से मां का शृंगार करें। इसके बाद चौकी के सामने कलश स्थापित कर उसमें जौ बोएं। फल और मिठाई से माता रानी को भोग लगाकर सुख शांति और समृद्धि की कामना करें।
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जोत के साथ सड़कों पर गूंजे मां भगवती के जयकारे
शारदीय नवरात्र के एक दिन पहले रविवार को जिले की सड़कों पर मां भगवती के जयकारे गूंजते रहे। पूरे दिन दिल्ली कालका जी से मां की जोत लेकर श्रद्धालुओं के लौटने का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालु रंग-गुलाल उड़ाते और डीजे पर झूमते हुए गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। सोमवार को प्रथम शारदीय नवरात्र के दौरान लाई गई मां की जोत को मंदिरों व घरों में स्थापित किया जाएगा। माता की जोत लाने वालों में बच्चे, युवा और महिला-पुरुष शामिल रहे। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए सेवादार भी जगह-जगह शिविर लगाकर प्रसाद ग्रहण कराने में जुटे रहे।