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नेता, पुलिस के गठजोड़ का गंदा खेल
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 06 Mar 2016 01:10 AM IST
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थ्ााने का घ्ाेराव पहुंचे लाोग
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नेताओं और पुलिस के गठजोड़ से चल रहे पशु तस्करों से इस गंदे खेल में बड़े-बड़ों की जेब गर्म हो रही है। जिले के कई नेता तो इस धंधे को लेकर खादी पहनने के बाद से दागी हैं, लेकिन सत्ता की वजह से उनका अफसर भी कुछ नहीं बिगाड़ पाते हैं। पशु तस्करों के नौ से सौ के इस धंधे में पुलिस का दामन भी साफ नहीं है। गोशालाओं के हालात भी बेहद खराब हैं। बरेली रेंज में तीन फर्जी गोशालाएं चल रही हैं। पुलिस से पशुओं को लेने के बाद इन गोशालाओं का खुद को संचालक बताने वाले ही पकड़े गए पशुओं को कसाईखाना पहुंच देते हैं। डीआईजी आशुतोष कुमार ने गोशालाओं को पत्र लिखकर चार साल में पुलिस के दिए गए पशुओं का ब्यौरा मांगा है।
पशु तस्करी करने वालों को नेताओं का पूरा संरक्षण है। पुलिस की मेहरबानी से ही पशु तस्कर हाइवे से होकर संभल, अमरोहा, मुरादाबाद और रामपुर की तरफ निकल जाते हैं। जो पशु तस्करी चालाकी दिखाकर पुलिस को बिना रुपये निकलने की कोशिश करते हैं। वह पकड़ लिए जाते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बरेली रेंज के संभल,चंदौसी के अलावा अमरोहा के गजरौला में तीन पशु गोशालाएं फर्जी चल रही हैं। इन गोशालाओं के संचालक बने लोगों ने पावती रसीद छपवा रखी हैं। जैसे ही पशुओं के भरा ट्रक पकड़ा जाता है उनके संपर्क में रहने वाले पुलिस कर्मी फोन करके उन्हें बुला लेते हैं। वह अपना वाहन लाकर पुलिस को तयशुदा रकम देकर पशुओं को ले जाकर कसाईखाने में बेच देते हैं। पुलिस कागजी खानापूरी करने के बाद गोशाला से मिली पावती रसीद को विवेचना में शामिल कर लेती है। इसके बाद पुलिस को पशु और पशु तस्करों से कोई मतलब नहीं रहता है। पुलिस को सुपुर्दगी में दिए जाने वाले पशुओं का क्या हुआ। इससे कभी मतलब नहीं रहता है। डीआईजी ने इस मामले को गंभीरता से लेकर पिछले चार साल में पकड़े गए पशुओं का ब्यौरा मांगा है। ब्यौरा के साथ फर्जी गोशालाओं की पोल खुलने की उम्मीद है।
हाइवे के दागियों की भी होगी छंटनी
-हाइवे की पुलिस चौकियों में तैनाती के लिए पशु तस्करी का पैसा मिलने की वजह से ही मारामारी रहती है। शाहजहांपुर की गुर्री चौकी के बाद बरेली मोड़ की अजीजगंज पुलिस चौकी, तिलहर और मीरानपुर कटरा, फतेहगंज पूर्वी, फरीदपुर की कस्बा चौकी, रजऊ पुलिस चौकी, टीपी नगर चौकी अहलादपुर चौकी, सीबीगंज का जोरी प्वाइंट, फतेहगंज पश्चिमी की कस्बा चौकी, मीरगंज पुलिस चौकी, मिलक कस्बा चौकी पर पशु तस्करों से कमाई के चक्कर में भी पुलिस कर्मियों की भीड़ रहती है। यहां कई ऐसे सिपाही और दरोगा की तैनाती है, जिन्हें हटाने की कोशिश करने पर अफसरों की भी कुर्सी हिल जाती है। डीआईजी आशुतोष कुमार का कहना है कि पशु तस्करों की मदद करने वाले पुलिस कर्मियों की छंटनी करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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रामपुर का चवन्नी गैंग भी नहीं पकड़ा गया
-डेढ़ साल पहले मीरगंज में लग्जरी बस में पशुओं के पकड़े जाने के बाद तत्कालीन डीआईजी आरकेएस राठौर ने पशु तस्करों पर काम कराया था। उन्होंने रेंज में आठ पशु तस्करों के गैंग रजिस्टर्ड कराकर बड़ी कार्रवाई की थी। चेचिस नंबर बमुश्किल निकलवाने के बाद लग्जरी बस के मालिक का पता लगाने के बाद कार्रवाई भी हुई थी। रामपुर के चवन्नी गैंग का बस में पशु तस्करी करने में नाम आया था, लेकिन मीरगंज पुलिस उनमें से किसी को पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।
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पशु तस्करी करने वालों को नेताओं का पूरा संरक्षण है। पुलिस की मेहरबानी से ही पशु तस्कर हाइवे से होकर संभल, अमरोहा, मुरादाबाद और रामपुर की तरफ निकल जाते हैं। जो पशु तस्करी चालाकी दिखाकर पुलिस को बिना रुपये निकलने की कोशिश करते हैं। वह पकड़ लिए जाते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बरेली रेंज के संभल,चंदौसी के अलावा अमरोहा के गजरौला में तीन पशु गोशालाएं फर्जी चल रही हैं। इन गोशालाओं के संचालक बने लोगों ने पावती रसीद छपवा रखी हैं। जैसे ही पशुओं के भरा ट्रक पकड़ा जाता है उनके संपर्क में रहने वाले पुलिस कर्मी फोन करके उन्हें बुला लेते हैं। वह अपना वाहन लाकर पुलिस को तयशुदा रकम देकर पशुओं को ले जाकर कसाईखाने में बेच देते हैं। पुलिस कागजी खानापूरी करने के बाद गोशाला से मिली पावती रसीद को विवेचना में शामिल कर लेती है। इसके बाद पुलिस को पशु और पशु तस्करों से कोई मतलब नहीं रहता है। पुलिस को सुपुर्दगी में दिए जाने वाले पशुओं का क्या हुआ। इससे कभी मतलब नहीं रहता है। डीआईजी ने इस मामले को गंभीरता से लेकर पिछले चार साल में पकड़े गए पशुओं का ब्यौरा मांगा है। ब्यौरा के साथ फर्जी गोशालाओं की पोल खुलने की उम्मीद है।
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हाइवे के दागियों की भी होगी छंटनी
-हाइवे की पुलिस चौकियों में तैनाती के लिए पशु तस्करी का पैसा मिलने की वजह से ही मारामारी रहती है। शाहजहांपुर की गुर्री चौकी के बाद बरेली मोड़ की अजीजगंज पुलिस चौकी, तिलहर और मीरानपुर कटरा, फतेहगंज पूर्वी, फरीदपुर की कस्बा चौकी, रजऊ पुलिस चौकी, टीपी नगर चौकी अहलादपुर चौकी, सीबीगंज का जोरी प्वाइंट, फतेहगंज पश्चिमी की कस्बा चौकी, मीरगंज पुलिस चौकी, मिलक कस्बा चौकी पर पशु तस्करों से कमाई के चक्कर में भी पुलिस कर्मियों की भीड़ रहती है। यहां कई ऐसे सिपाही और दरोगा की तैनाती है, जिन्हें हटाने की कोशिश करने पर अफसरों की भी कुर्सी हिल जाती है। डीआईजी आशुतोष कुमार का कहना है कि पशु तस्करों की मदद करने वाले पुलिस कर्मियों की छंटनी करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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रामपुर का चवन्नी गैंग भी नहीं पकड़ा गया
-डेढ़ साल पहले मीरगंज में लग्जरी बस में पशुओं के पकड़े जाने के बाद तत्कालीन डीआईजी आरकेएस राठौर ने पशु तस्करों पर काम कराया था। उन्होंने रेंज में आठ पशु तस्करों के गैंग रजिस्टर्ड कराकर बड़ी कार्रवाई की थी। चेचिस नंबर बमुश्किल निकलवाने के बाद लग्जरी बस के मालिक का पता लगाने के बाद कार्रवाई भी हुई थी। रामपुर के चवन्नी गैंग का बस में पशु तस्करी करने में नाम आया था, लेकिन मीरगंज पुलिस उनमें से किसी को पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।