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Barabanki News: हाथ से बने ओपीडी के परचे, लगी कतार, इलाज दुश्वार
Thu, 21 Aug 2025 01:57 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 21 Aug 2025 01:57 AM IST
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बाराबंकी। जिला अस्पताल में बुधवार को पटरी से उतरी ऑफ लाइन परचा बनवाने की व्यवस्था ने मरीजों से लेकर अस्पताल प्रशासन को खूब परेशान किया। मजबूरी में ओपीडी के परचे हाथ से बनवाने के कारण काउंटर लगी लंबी कतार के कारण लोगों को इलाज पाने के लिए तमाम दुश्वारियां झेलना पड़ी। इसके चलते ऑन लाइन 825 व ऑफ लाइन सिर्फ चार सौ परचे ही काउंटरों पर बन पाए।
परचा बनवाने के बाद ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने के बाद दवा पाने के लिए मरीजों को दो से ढाई घंटे तक जूझना पड़ा। सुबह से शुरू हुई भीड़ दोपहर बाद तक बनी रही। उमस भरी गर्मी में इलाज पाने में हो रही दुश्वारियों से परेशान कई मरीज तो बिना इलाज कराए ही वापस लौट गए। अल्ट्रासाउंड जांच के लिए भी कोई स्थाई रेजियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण जांच का कार्य बुधवार को दूसरे दिन भी बंद रहा।
अल्ट्रासाउंड कक्ष में जांच के लिए लगातार दूसरे दिन भी कोई चिकित्सक नहीं आया। इसलिए जांच के लिए पहुंचे मरीजों को हताश व निराश होकर निजी केंद्रों से महंगी जांच कराने की परेशानी उठाना पड़ी। एक मरीज ने बताया कि बाहर छह सौ रुपये में अल्ट्रासाउंड जांच होती है। पैसे नहीं होने के कारण दो दिन से जांच नहीं करा पाने से डॉक्टर पेट दर्द की दवा भी नहीं लिख रहे हैं। सीएमएस डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि मरीजों की भीड़ बढ़ने पर ऑनलाइन के साथ-साथ हाथ से ऑफ लाइन भी पर्चे बनाए गए ताकि मरीजों को अधिक इंतजार न करना पड़े।
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परचा बनवाने के बाद ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने के बाद दवा पाने के लिए मरीजों को दो से ढाई घंटे तक जूझना पड़ा। सुबह से शुरू हुई भीड़ दोपहर बाद तक बनी रही। उमस भरी गर्मी में इलाज पाने में हो रही दुश्वारियों से परेशान कई मरीज तो बिना इलाज कराए ही वापस लौट गए। अल्ट्रासाउंड जांच के लिए भी कोई स्थाई रेजियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण जांच का कार्य बुधवार को दूसरे दिन भी बंद रहा।
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अल्ट्रासाउंड कक्ष में जांच के लिए लगातार दूसरे दिन भी कोई चिकित्सक नहीं आया। इसलिए जांच के लिए पहुंचे मरीजों को हताश व निराश होकर निजी केंद्रों से महंगी जांच कराने की परेशानी उठाना पड़ी। एक मरीज ने बताया कि बाहर छह सौ रुपये में अल्ट्रासाउंड जांच होती है। पैसे नहीं होने के कारण दो दिन से जांच नहीं करा पाने से डॉक्टर पेट दर्द की दवा भी नहीं लिख रहे हैं। सीएमएस डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि मरीजों की भीड़ बढ़ने पर ऑनलाइन के साथ-साथ हाथ से ऑफ लाइन भी पर्चे बनाए गए ताकि मरीजों को अधिक इंतजार न करना पड़े।
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