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Barabanki News: प्रदर्शनी में दिखा संस्कृत और विज्ञान का तालमेल
Mon, 23 Jan 2023 04:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 23 Jan 2023 04:56 PM IST
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बाराबंकी। संस्कृत और विज्ञान का पुरातन तालमेल रहा है। संस्कृत की पुरातन जानकारी के साथ ही वैज्ञानिक अवधारणा पर आधारित वस्तु संस्कृत प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्कृत भारती से जुड़े विशेषज्ञों ने विज्ञान और संस्कृत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। वर्गाधिकारी स्वामी चेतनानंद ने कहा कि वर्ग का यही उद्देश्य है कि सभी लोग संस्कृत को अपनी दैनिक बोलचाल की भाषा में प्रयोग करें।
संस्कृत भारती अवध प्रांत की ओर से आयोजित सात दिवसीय भाषा प्रबोधन वर्ग के पांचवें दिन शिवा योग पीठम योग आश्रम में वस्तु और विज्ञान प्रदर्शनी में 150 पोस्टरों के जरिए संस्कृत में निहित विज्ञान परंपरा के स्रोतों को दर्शाया गया। विज्ञान की करीब 28 शाखाओं का वर्णन किया गया है। जैसे विज्ञान में बताया जाता है कि पौधे प्रकाशानुवर्ती होते हैं अर्थात जिधर सूर्य का प्रकाश होता है, पौधे उधर ही झुकते हैं या बढ़ते हैं।
डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। आज आवश्यकता है कि हम सभी को इसके उन्नयन व संवर्द्धन के लिए सतत प्रयास करना होगा। डॉ. रत्नेम त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की स्रोत है। आज संपूर्ण विश्व संस्कृत को ज्ञान व विज्ञान की भाषा के रूप में स्वीकार कर रहा है। मंत्री गौरव नायक ने कहा कि संस्कृत भाषा को जीवन की मुख्यधारा में शामिल कर अपनाने की आवश्यकता है, क्योंकि संस्कृत प्राचीनकाल से ही ज्ञान व विज्ञान की भाषा रही है।
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वस्तुओं के नाम संस्कृत में देख लोग आश्चर्यचकित
वस्तु और विज्ञान प्रदर्शनी में वस्तुओं के संस्कृत के नाम देख लोग आश्चर्यचकित रह गए। प्रदर्शनी में दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाली सभी वस्तुओं को उनके संस्कृत नाम के साथ लोगों को देखने के लिए रखा गया। विशेषज्ञों ने बताया कि साड़ी को साठिका, पजामे को बादाम करांशुकम्, पैंट को उरुकम्, मोजों को पादकोश:, मेज को उत्पीठिका, कुर्सी को आसन्द:, धूपबत्ती को सुगंधवर्तिका, गैस चूल्हे को अग्निचुल्लि:, चाय को चायचूर्णम्, चीनी को शर्करा, हल्दी को हरिद्रा, मूंगफली को कलाय: व चावल को तण्डुल: कहा जाता है।
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संस्कृत भारती अवध प्रांत की ओर से आयोजित सात दिवसीय भाषा प्रबोधन वर्ग के पांचवें दिन शिवा योग पीठम योग आश्रम में वस्तु और विज्ञान प्रदर्शनी में 150 पोस्टरों के जरिए संस्कृत में निहित विज्ञान परंपरा के स्रोतों को दर्शाया गया। विज्ञान की करीब 28 शाखाओं का वर्णन किया गया है। जैसे विज्ञान में बताया जाता है कि पौधे प्रकाशानुवर्ती होते हैं अर्थात जिधर सूर्य का प्रकाश होता है, पौधे उधर ही झुकते हैं या बढ़ते हैं।
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डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। आज आवश्यकता है कि हम सभी को इसके उन्नयन व संवर्द्धन के लिए सतत प्रयास करना होगा। डॉ. रत्नेम त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की स्रोत है। आज संपूर्ण विश्व संस्कृत को ज्ञान व विज्ञान की भाषा के रूप में स्वीकार कर रहा है। मंत्री गौरव नायक ने कहा कि संस्कृत भाषा को जीवन की मुख्यधारा में शामिल कर अपनाने की आवश्यकता है, क्योंकि संस्कृत प्राचीनकाल से ही ज्ञान व विज्ञान की भाषा रही है।
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वस्तुओं के नाम संस्कृत में देख लोग आश्चर्यचकित
वस्तु और विज्ञान प्रदर्शनी में वस्तुओं के संस्कृत के नाम देख लोग आश्चर्यचकित रह गए। प्रदर्शनी में दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाली सभी वस्तुओं को उनके संस्कृत नाम के साथ लोगों को देखने के लिए रखा गया। विशेषज्ञों ने बताया कि साड़ी को साठिका, पजामे को बादाम करांशुकम्, पैंट को उरुकम्, मोजों को पादकोश:, मेज को उत्पीठिका, कुर्सी को आसन्द:, धूपबत्ती को सुगंधवर्तिका, गैस चूल्हे को अग्निचुल्लि:, चाय को चायचूर्णम्, चीनी को शर्करा, हल्दी को हरिद्रा, मूंगफली को कलाय: व चावल को तण्डुल: कहा जाता है।