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Barabanki News: बांस की खेती में नवाचार से होगी लाखों की कमाई

Thu, 18 Sep 2025 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Thu, 18 Sep 2025 12:18 AM IST
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Innovation in bamboo cultivation will generate millions of rupees.
बाराबंकी। हरख ब्लॉक के सैदहा गांव निवासी किसान संग्राम सिंह ने बांस की खेती में नवाचार कर मिसाल कायम की है। तीन साल में करीब 25 फीट ऊंचे हो चुके बांस की पैदावार अब लहलहा रही है। अगले साल इसकी कटान से संग्राम सिंह को लाखों की कमाई होगी। कच्चा तीन बीघा में बांस की फसल देखकर क्षेत्र के अन्य किसानों में भी नवाचार के साथ आमदनी बढ़ाने की अलख जगी है।
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संग्राम सिंह के बांस के खेत में पहुंचने पर महसूस होता है जैसे असम में आ गए हों, जहां बांस बहुत पैदा होता है। यहां 10-10 फिट की दूरी पर बांस के पौधे लगाए गए। इसे तैयार करने में किसी तरह की रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया गया। उम्मीद जताई है कि अगले साल बिकने वाली बांस की पैदावार उन्हें अच्छा लाभ देगी। बांस का इस्तेमाल कपड़ा, कागज व फर्नीचर बनाने में होता है।
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जिले में केला, टमाटर, तरोई, लौकी करैला जैसी फसलों में भी बांस की उपयोगिता बहुत ज्यादा है। टमाटर की फसल को बांस के सहारे खड़ा किया जाता है, जिसे शहर विधि कहते हैं। इसी तरह केला के पौधों को गिरने से बचने के लिए भी बांस का प्रयोग किया जाता है। लौकी तरोई, खीरा, करैला, परवल व पान आदि की फसल की अच्छी पैदावार के लिए बांस का स्ट्रक्चर बनाया जाता है।
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नहीं मिला कोई अनुदान
वन विभाग की ओर से राष्ट्रीय बांस विकास मिशन के तहत अनुदान की व्यवस्था है। संग्राम के अनुसार 160 रुपए प्रति पौधा अनुदान वन विभाग से मिलना था। दौड़भाग करने के तीन साल बाद भी इन्हें अब तक अनुदान का कोई पैसा नहीं मिला। खुद के संसाधनों व मेहनत के दम पर अब बांस फसल तैयार हो गई है।

विभाग ने तैयार किया बांस का वन
डीएफओ आकाश दीप बधावन ने बताया कि नेशनल बंबू मिशन के तहत जिले में नौ हेक्टेयर में बांस की खेती हो रही है। वन विभाग ने सरयू नदी के किनारे ढेमा में डेढ़ हेक्टेयर में बांस का वन तैयार किया है। बांस की खेती अन्य फसलों के लिए सहायक होने से धीरे-धीरे इसकी उपयोगिता व प्रचलन भी किसानों में बढ़ा है।
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