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सिलिंडर में लगी आग, स्कूल में अफरातफरी
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दरियाबाद (बाराबंकी)। प्राथमिक विद्यालय सींवा में सोमवार सुबह खाना बनाते समय अचानक रसोई गैस सिलिंडर में आग लग गई। उस समय स्कूल में 48 बच्चे मौजूद थे। शिक्षकों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए सभी बच्चों को विद्यालय से बाहर निकाला। चंद मिनटों में ही बच्चे भाग खड़े हुए। इस दौरान स्कूल में लगे अग्निशमन यंत्र फेल हो गए। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया।
ग्राम पंचायत बरहुआ के प्राथमिक विद्यालय सींवा में सोमवार को 48 बच्चे आए थे। सुबह रसोइया राजकुमारी और पूनम ने सब्जी काटी और मिड-डे मील बनाने की तैयारी में जुट गईं। इसी बीच करीब साढ़े आठ बजे सिलिंडर में गैस लीकेज होने से आग लग गई। यह देख रसोइए के हाथ-पांव फूल गए।
आननफानन मौके पर पहुंचे प्रधानाध्यापक मनोज सोनी व शिक्षक सुजीत कुमार ने सबसे पहले बच्चों को विद्यालय से बाहर निकाला। इसके बाद इन बच्चों ने गांव की ओर दौड़ लगा दी। इधर स्कूल में मौजूद एक बोरे से सिलेंडर को बुझाने का प्रयास किया गया मगर सफलता नहीं मिली। प्राथमिक विद्यालय में दो अग्निशमन यंत्र भी थे मगर जब अध्यापकों ने उनका प्रयोग करना शुरू किया तो वे फेल नजर आए। एक तो पटकते ही टूट गया। ऐसे में तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।
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इसके करीब 20 मिनट बाद फायर ब्रिगेड पहुंची और फिर सिलेंडर में लगी आग पर काबू पाया जा सका। प्रधानाध्यापक मनोज सोनी ने बताया कि बड़ा हादसा टल गया। आग लगने के बाद भी बच्चे, शिक्षक और रसोइया दहशत में दिखे। सभी शिक्षकों की सूझबूझ की सराहना कर रहे थे। संवाद
कागजों पर लगे हैं अग्निशमन यंत्र
जिले में 2636 परिषदीय विद्यालय हैं। हर विद्यालय में मिड-डे मील बनता है। सभी विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था चाक चौबंद होने के निर्देश हैं। लेकिन अधिकतर विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र कागजों पर ही लगे हैं। जहां लगे भी हैं वह काम लायक नहीं हैं। कुछ विद्यालय तो ऐसे हैं जहां सालों से अग्निशमन यंत्र दीवारों पर टंगे होकर खराब हो चुके हैं।
विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था चाक चौबंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इसकी पड़ताल की जाएगी। अगर कहीं गड़बड़ी मिली तो संबंधित प्रधानाध्यापक दोषी माने जाएंगे।
-संतोष देव पांडेय, बीएसए
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ग्राम पंचायत बरहुआ के प्राथमिक विद्यालय सींवा में सोमवार को 48 बच्चे आए थे। सुबह रसोइया राजकुमारी और पूनम ने सब्जी काटी और मिड-डे मील बनाने की तैयारी में जुट गईं। इसी बीच करीब साढ़े आठ बजे सिलिंडर में गैस लीकेज होने से आग लग गई। यह देख रसोइए के हाथ-पांव फूल गए।
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आननफानन मौके पर पहुंचे प्रधानाध्यापक मनोज सोनी व शिक्षक सुजीत कुमार ने सबसे पहले बच्चों को विद्यालय से बाहर निकाला। इसके बाद इन बच्चों ने गांव की ओर दौड़ लगा दी। इधर स्कूल में मौजूद एक बोरे से सिलेंडर को बुझाने का प्रयास किया गया मगर सफलता नहीं मिली। प्राथमिक विद्यालय में दो अग्निशमन यंत्र भी थे मगर जब अध्यापकों ने उनका प्रयोग करना शुरू किया तो वे फेल नजर आए। एक तो पटकते ही टूट गया। ऐसे में तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।
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इसके करीब 20 मिनट बाद फायर ब्रिगेड पहुंची और फिर सिलेंडर में लगी आग पर काबू पाया जा सका। प्रधानाध्यापक मनोज सोनी ने बताया कि बड़ा हादसा टल गया। आग लगने के बाद भी बच्चे, शिक्षक और रसोइया दहशत में दिखे। सभी शिक्षकों की सूझबूझ की सराहना कर रहे थे। संवाद
कागजों पर लगे हैं अग्निशमन यंत्र
जिले में 2636 परिषदीय विद्यालय हैं। हर विद्यालय में मिड-डे मील बनता है। सभी विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था चाक चौबंद होने के निर्देश हैं। लेकिन अधिकतर विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र कागजों पर ही लगे हैं। जहां लगे भी हैं वह काम लायक नहीं हैं। कुछ विद्यालय तो ऐसे हैं जहां सालों से अग्निशमन यंत्र दीवारों पर टंगे होकर खराब हो चुके हैं।
विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था चाक चौबंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इसकी पड़ताल की जाएगी। अगर कहीं गड़बड़ी मिली तो संबंधित प्रधानाध्यापक दोषी माने जाएंगे।
-संतोष देव पांडेय, बीएसए