{"_id":"686828c89bbf59d066053440","slug":"ambulance-brokers-are-taking-patients-to-private-hospitals-barabanki-news-c-315-slko1012-143009-2025-07-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: मरीजों को निजी अस्पताल पहुंचा रहे एंबुलेंस दलाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: मरीजों को निजी अस्पताल पहुंचा रहे एंबुलेंस दलाल
Sat, 05 Jul 2025 12:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 05 Jul 2025 12:47 AM IST
विज्ञापन
बाराबंकी। सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराने का खेल चल रहा है। इस खेल में शामिल एंबुलेंस दलाव जिला व महिला अस्पताल के आसपास अपनी एंबुलेंस खड़ी रखते हैं और गंभीर मरीजों को देखते ही उन्हें सस्ती दर पर बेहतर इलाज कराने का झांसा देकर निजी अस्पताल में लाकर भर्ती करा देते हैं।
जिला अस्पताल के गेट के आसपास यह निजी एंबुलेंस चालक अपने वाहनों में बैठकर इलाज के लिए आने वाले मरीजों को इंतजार करते हैं। इनके कुछ साथी इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक हर जगह मौजूद रहता है। आस-पास के जिले अथवा दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्र से जैसे ही कोई गंभीर मरीज अस्पताल पहुंचता है, वहां मौजूद एजेंट उसके तीमारदारों को घेर लेते हैं। वह सरकारी अस्पताल में इलाज की बेहतर सुविधा न होने व निजी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ इलाज की आधुनिक सुविधा का झांसा हवाला देकर मरीज को जबरन शिफ्ट कराने का दबाव बनाते है।
तीमारदार के झांसे में आते ही तत्काल गेट के बाहर खड़ी एंबुलेंस को अस्पताल परिसर में बुलाकर मरीज को लेकर निजी अस्पताल पहुंचा दिया जाता है। इस दौरान अस्पताल के स्टॉफ का भी इन्हें पूरा सहयोग मिलता है। हालांकि जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि कोई भी एंबुलेंस चालक या दलाल इस तरह की हरकत में लिप्त मिला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सवाल उठता है कि जब 108 व 102 डायल की एंबुलेंस सेवा है तो निजी एंबुलेंस अस्पताल परिसर में कैसे बेखौफ तरीके से प्रवेश कर मरीजों को ले जाती हैं।
विज्ञापन
स्ट्रोक व हार्ट अटैक के मामले खास
हर गंभीर मरीज पर इन निजी अस्पतालों के एजेंटों की निगाह रहती है। इसमें प्रसव पीड़िता, हादसाग्रस्त लोग, स्ट्रोक व हार्ट अटैक के केस इनके लिए खास होते हैं। जिला अस्पताल में तीन साल से हृदयरोग का डॉक्टर नहीं है। ओपीडी तक बंद है। इसका लाभ यह दलाल उठाते हैं। निजी अस्पतालों में पहुंचते ही इन मरीज से इलाज के नाम पर मोटा पैसा वसूलने का खेल शुरू हो जाता है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के गेट के आसपास यह निजी एंबुलेंस चालक अपने वाहनों में बैठकर इलाज के लिए आने वाले मरीजों को इंतजार करते हैं। इनके कुछ साथी इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक हर जगह मौजूद रहता है। आस-पास के जिले अथवा दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्र से जैसे ही कोई गंभीर मरीज अस्पताल पहुंचता है, वहां मौजूद एजेंट उसके तीमारदारों को घेर लेते हैं। वह सरकारी अस्पताल में इलाज की बेहतर सुविधा न होने व निजी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ इलाज की आधुनिक सुविधा का झांसा हवाला देकर मरीज को जबरन शिफ्ट कराने का दबाव बनाते है।
विज्ञापन
तीमारदार के झांसे में आते ही तत्काल गेट के बाहर खड़ी एंबुलेंस को अस्पताल परिसर में बुलाकर मरीज को लेकर निजी अस्पताल पहुंचा दिया जाता है। इस दौरान अस्पताल के स्टॉफ का भी इन्हें पूरा सहयोग मिलता है। हालांकि जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि कोई भी एंबुलेंस चालक या दलाल इस तरह की हरकत में लिप्त मिला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सवाल उठता है कि जब 108 व 102 डायल की एंबुलेंस सेवा है तो निजी एंबुलेंस अस्पताल परिसर में कैसे बेखौफ तरीके से प्रवेश कर मरीजों को ले जाती हैं।
विज्ञापन
स्ट्रोक व हार्ट अटैक के मामले खास
हर गंभीर मरीज पर इन निजी अस्पतालों के एजेंटों की निगाह रहती है। इसमें प्रसव पीड़िता, हादसाग्रस्त लोग, स्ट्रोक व हार्ट अटैक के केस इनके लिए खास होते हैं। जिला अस्पताल में तीन साल से हृदयरोग का डॉक्टर नहीं है। ओपीडी तक बंद है। इसका लाभ यह दलाल उठाते हैं। निजी अस्पतालों में पहुंचते ही इन मरीज से इलाज के नाम पर मोटा पैसा वसूलने का खेल शुरू हो जाता है।