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पानी संग बहे किसानों के सपने, लगातार बारिश से फसले बर्बाद
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बाराबंकी। तीन दिन से लगातार हुई बारिश से धान की फसल बर्बाद ही नहीं बर्बाद हुई, बल्कि पानी संग किसानों के सपने में भी बह गए। बावजूद अभी तक शासन व प्रशासन की ओर किसानों को हुए नुकसान की भरपाई को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसे में मायूस किसानों को अब कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। इसको लेकर उनकी परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं।
मौसम की बेरुखी किसानों पर इस बार भी भारी पड़ी। पिछले वर्ष बारिश व ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई इस बार खेेतों में धान की फसल अच्छी होने से किसानों को दिख रही है। इसको लेकर किसानों ने भी काफी मेहनत की थी। मगर, मौसम की बेरुखी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
सितंबर में लगातार हुई मूसलाधार बारिश से किसानों की 20 प्रतिशत फसलों को नुकसान हुआ था। इसके बाद भी बची हुई फसल से किसानों को मेहनत व लागत निकलने की आखिरी उम्मीद बची थी। मगर, तीन दिन में 57 मिमी. बारिश ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया।
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रविवार से लगातार हो रही बारिश मंगलवार तक 57 मिमी. हुई। तेज हवा के बीच हुई बारिश से जहां खेतों में तैयार खड़ी फसल गिरने से उसमें सड़न पैदा हो गई। वहीं कटी पड़ी फसल पानी में तैरने से बर्बाद हो गई। ऐसे में किसान काफी परेशान हैं। मगर, किसानों का हाल पूछने वाला कोई नहीं है।
नुकसान के सापेक्ष नहीं बीमा के नियम
प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने वाले किसानों को उनकी फसल के नुकसान की भरपाई होती नहीं दिख रही है। बीमा के नियम किसानों के नुकसान के सापेक्ष नहीं बल्कि पूरे गांव में हुए नुकसान के औसत के आधार पर ही मुआवजा देने के हैं। जबकि किसानों को करीब 50 प्रतिशत तक की फसल का नुकसान हुआ है। वहीं अभी तक आपदा राहत से मिलने वाले किसानों के मुआवजे को लेकर भी प्रशासन मौन है।
भाकियू कल से देगा धरना
धान की फसल का 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान को लेकर किसानों को तत्काल सरकार मुआवजा दे। इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन टिकैत के बंकी ब्लॉक अध्यक्ष विक्रांत सैनी ने धरना देकर मांगपत्र सौंपने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि यह धरना 21 अक्टूबर को गन्ना कार्यालय परिसर में होगा। इसमें जिले भर के किसान शामिल होंगे।
क्षेत्र का भ्रमण कर फसलों के नुकसान के बारे में जानकारी की जा रही है। मौसम साफ होते ही राजस्व, कृषि व बीमा कंपनी की संयुक्त टीम सर्वे कर फसलों के नुकसान का आंकलन करेगी। इसके आधार पर किसानों को मुआवजा मिलेगा।
-संजीव कुमार, जिला कृषि अधिकारी
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मौसम की बेरुखी किसानों पर इस बार भी भारी पड़ी। पिछले वर्ष बारिश व ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई इस बार खेेतों में धान की फसल अच्छी होने से किसानों को दिख रही है। इसको लेकर किसानों ने भी काफी मेहनत की थी। मगर, मौसम की बेरुखी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
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सितंबर में लगातार हुई मूसलाधार बारिश से किसानों की 20 प्रतिशत फसलों को नुकसान हुआ था। इसके बाद भी बची हुई फसल से किसानों को मेहनत व लागत निकलने की आखिरी उम्मीद बची थी। मगर, तीन दिन में 57 मिमी. बारिश ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया।
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रविवार से लगातार हो रही बारिश मंगलवार तक 57 मिमी. हुई। तेज हवा के बीच हुई बारिश से जहां खेतों में तैयार खड़ी फसल गिरने से उसमें सड़न पैदा हो गई। वहीं कटी पड़ी फसल पानी में तैरने से बर्बाद हो गई। ऐसे में किसान काफी परेशान हैं। मगर, किसानों का हाल पूछने वाला कोई नहीं है।
नुकसान के सापेक्ष नहीं बीमा के नियम
प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने वाले किसानों को उनकी फसल के नुकसान की भरपाई होती नहीं दिख रही है। बीमा के नियम किसानों के नुकसान के सापेक्ष नहीं बल्कि पूरे गांव में हुए नुकसान के औसत के आधार पर ही मुआवजा देने के हैं। जबकि किसानों को करीब 50 प्रतिशत तक की फसल का नुकसान हुआ है। वहीं अभी तक आपदा राहत से मिलने वाले किसानों के मुआवजे को लेकर भी प्रशासन मौन है।
भाकियू कल से देगा धरना
धान की फसल का 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान को लेकर किसानों को तत्काल सरकार मुआवजा दे। इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन टिकैत के बंकी ब्लॉक अध्यक्ष विक्रांत सैनी ने धरना देकर मांगपत्र सौंपने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि यह धरना 21 अक्टूबर को गन्ना कार्यालय परिसर में होगा। इसमें जिले भर के किसान शामिल होंगे।
क्षेत्र का भ्रमण कर फसलों के नुकसान के बारे में जानकारी की जा रही है। मौसम साफ होते ही राजस्व, कृषि व बीमा कंपनी की संयुक्त टीम सर्वे कर फसलों के नुकसान का आंकलन करेगी। इसके आधार पर किसानों को मुआवजा मिलेगा।
-संजीव कुमार, जिला कृषि अधिकारी