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'देशज' में दिखेगी अपनी माटी की लोक संस्कृति
ब्यूरो/अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Fri, 11 Mar 2016 11:42 PM IST
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देशज कार्यक्रम
सांस्कृतिक नगरी वाराणसी और लखनऊ को छोड़कर केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी ने विलुप्त होती लोकविधाओं से लोगों को परिचित कराने के लिए पूर्वांचल के आजमगढ़ जिले को चुना है। ऐसे में विलुप्त होती भारतीय लोकविद्याओं से लोगों को परिचित कराने के लिए आजमगढ़ जिला पूर्वांचल का संवाहक बनेगा। केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी की तरफ से जिले के जजी मैदान में 16 से 21 मार्च तक देशज के नाम से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में देश के आठ प्रांतों के सैकड़ों कलाकार एकत्र होंगे। कार्यक्रम में नौटंकी, लोकगायन, बिरहा और लोक नृत्य के नामीगिरामी कलाकार भाग लेंगे।
देशज (नौटंकी एवं अन्य समानधर्मी विविध पारंपरिक संगीत अभिव्यक्तियों का प्रलेखन और प्रस्तुति उत्सव) को संपन्न कराने के लिए अकादमी ने जिला प्रशासन का भी सहयोग ले रखा है। इसके लिए, जजी मैदान में मंच और दर्शक दीर्घा के निर्माण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। देशज की सफलता के लिए वरिष्ठ रंगकर्मी अभिषेक पंडित को अकादमी ने स्थानीय संयोजक तथा रंगकर्मी सुनील दत्त विश्वकर्मा को मीडिया प्रभारी तैनात किया है।
नौटंकी विद्या के लिए नए कलाकारों की फौज खड़ी करने के लिए कार्यशाला का भी आयोजन होगा। इसमें आजमगढ़ के साथ-साथ आसपास के जिलों के कलाकारों को प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यशाला का निर्देशन प्रसिद्ध नौटंकी विद्या के विशेषज्ञ पंडित, रामदयाल शर्मा नई दिल्ली करेंगे।
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सुनील दत्त विश्वकर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य विलुप्त होती भारतीय सांस्कृतिक लोकविधाओं से लोगों को परिचित करना और नए कलाकारों को इन विधाओं से जोड़ना भी है। इसमें विभिन्न प्रांतों (दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, छत्तीसगढ़) के करीब ढाई सौ कलाकार भाग लेंगे। जो अपनी माटी की लोक संस्कृत की प्रस्तुति करेंगे।
पांच दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में वैसे तो अपनी-अपनी विधा के नामचीन कलाकार भाग लेंगे लेकिन इसमें रंगलीला आगरा की तरफ से अनिल शुक्ला के निर्देशन में प्रस्तुत होने वाला संगत कीजै साधु की, बिहार के भिखारी ठाकुर रंगमंडल की तरफ से प्रभुनाथ ठाकुर के निर्देशन में विदेसिया की प्रस्तुति प्रमुख है। इसके अलावा, लोक गायन में मालिनी अवस्थी भी भाग लेंगी।
जजी के मैदान में तैयारियों का जायजा शुक्रवार की शाम डीडीसी ऋतु सुहास ने लिया। उन्होंने नगरपालिका और पंडाल कारीगरों को दिशा-निर्देश भी दिया। मीडिया प्रभारी सुनील दत्त विश्वकर्मा ने बताया कि मंच का निर्माण और कार्यक्रम को भव्यता देने के लिए उज्जैन से राजेंद्र छाबड़ा साथियों के साथ लगे हैं।
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देशज (नौटंकी एवं अन्य समानधर्मी विविध पारंपरिक संगीत अभिव्यक्तियों का प्रलेखन और प्रस्तुति उत्सव) को संपन्न कराने के लिए अकादमी ने जिला प्रशासन का भी सहयोग ले रखा है। इसके लिए, जजी मैदान में मंच और दर्शक दीर्घा के निर्माण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। देशज की सफलता के लिए वरिष्ठ रंगकर्मी अभिषेक पंडित को अकादमी ने स्थानीय संयोजक तथा रंगकर्मी सुनील दत्त विश्वकर्मा को मीडिया प्रभारी तैनात किया है।
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नौटंकी विद्या के लिए नए कलाकारों की फौज खड़ी करने के लिए कार्यशाला का भी आयोजन होगा। इसमें आजमगढ़ के साथ-साथ आसपास के जिलों के कलाकारों को प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यशाला का निर्देशन प्रसिद्ध नौटंकी विद्या के विशेषज्ञ पंडित, रामदयाल शर्मा नई दिल्ली करेंगे।
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सुनील दत्त विश्वकर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य विलुप्त होती भारतीय सांस्कृतिक लोकविधाओं से लोगों को परिचित करना और नए कलाकारों को इन विधाओं से जोड़ना भी है। इसमें विभिन्न प्रांतों (दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, छत्तीसगढ़) के करीब ढाई सौ कलाकार भाग लेंगे। जो अपनी माटी की लोक संस्कृत की प्रस्तुति करेंगे।
पांच दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में वैसे तो अपनी-अपनी विधा के नामचीन कलाकार भाग लेंगे लेकिन इसमें रंगलीला आगरा की तरफ से अनिल शुक्ला के निर्देशन में प्रस्तुत होने वाला संगत कीजै साधु की, बिहार के भिखारी ठाकुर रंगमंडल की तरफ से प्रभुनाथ ठाकुर के निर्देशन में विदेसिया की प्रस्तुति प्रमुख है। इसके अलावा, लोक गायन में मालिनी अवस्थी भी भाग लेंगी।
जजी के मैदान में तैयारियों का जायजा शुक्रवार की शाम डीडीसी ऋतु सुहास ने लिया। उन्होंने नगरपालिका और पंडाल कारीगरों को दिशा-निर्देश भी दिया। मीडिया प्रभारी सुनील दत्त विश्वकर्मा ने बताया कि मंच का निर्माण और कार्यक्रम को भव्यता देने के लिए उज्जैन से राजेंद्र छाबड़ा साथियों के साथ लगे हैं।