यूपी: राम मंदिर चढ़ावा चोरी की चार्जशीट में 40 हजार पन्नें, बक्सों में लेकर पहुंची पुलिस; दो ट्रक पीएसी तैनात
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने 90 दिन की अवधि पूरी होने पर आठ आरोपियों के खिलाफ करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की। रिपोर्ट बक्सों में पहुंचाई गई। सुरक्षा के लिए कचहरी में दो ट्रक पीएसी तैनात रही। अधिवक्ताओं ने संज्ञान से पहले आपत्तियां सुनने की मांग की।
विस्तार
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में पुलिस ने 90 दिन की अवधि पूरी होते ही अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। पुलिस की ओर से करीब 40 हजार पन्नों में चार्जशीट पेश की गई है। अदालत में दाखिल चार्जशीट की जांच की गई।मामले में पहले से जेल में बंद आठों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया है। पुलिस की जांच में आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
अब मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई और सुनवाई पर नजर रहेगी। 6,039 पन्नों की चार्जशीट को चार बक्सों और दो गत्तों में भरकर अदालत लाया गया। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अदालत में दस्तावेजों का मिलान और परीक्षण शुरू हुआ।
कचहरी की बढ़ाई गई सुरक्षा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में चार्जशीट दाखिल होने से पहले बुधवार को कचहरी परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए दो ट्रक पीएसी बल तैनात किया गया था। चार्जशीट दाखिल होने की सूचना मिलते ही अधिवक्ताओं में आक्रोश फैल गया। उन्होंने विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट के बाहर घेराव कर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।
इसके बाद अधिवक्ता संघ अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा की अगुवाई में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अदालत पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने संघ की ओर से दाखिल प्रार्थनापत्र पर सुनवाई की मांग की। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता कृपाल चंद्र खरे, प्रिय नाथ सिंह, सौरभ मिश्रा, विजय बहादुर सिंह और निजामुद्दीन खान शामिल रहे।
अधिवक्ताओं ने मांग की है कि चार्जशीट पर संज्ञान लेने से पहले उनकी आपत्तियां सुनी जाएं। बाद में संघ अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिला जज रणंजय कुमार वर्मा से भी मुलाकात की। उन्होंने चार्जशीट पर संज्ञान से पहले आपत्तियों पर सुनवाई की मांग रखी।
सात अक्तूबर को होगी रिमांड पर सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा धनराशि प्रकरण में अदालत ने अधिवक्ता संघ की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र का निस्तारण कर दिया। अदालत के अनुसार विवेचना में शामिल किए जाने के लिए अधिवक्ताओं की ओर से दिए गए शपथपत्रों के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं पाया गया। इसके आधार पर अधिवक्ता संघ के प्रार्थना पत्र को निस्तारित कर दिया गया। प्रकरण में रिमांड की अगली तिथि सात अक्तूबर निर्धारित की गई है।