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Ayodhya News: सरयू का जलस्तर घटा, घाटों पर दिखने लगे पाट
Wed, 28 Jan 2026 08:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 28 Jan 2026 08:45 PM IST
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13- जलस्तर घटने से संत तुलसीदास घाट पर दिख रहा पाट- संवाद
अयोध्या। जीवनरेखा कही जाने वाली सरयू नदी इन दिनों रूठी-सी नजर आ रही है। जलस्तर में लगातार गिरावट के चलते सरयू के प्रमुख घाटों पर पाट दिखने लगे हैं। जहां कभी लहरों की कलकल ध्वनि गूंजती थी, वहां अब सूखी रेत और उथले जल ने भक्तों की राह मुश्किल कर दी है। स्नान और पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिक भी इसे अच्छा नहीं मानते हैं।
घाटों पर पानी सिमटने से स्नान के दौरान फिसलन, कीचड़ और असमान तल की समस्या बढ़ गई है। कई स्थानों पर श्रद्धालु दूर तक चलकर गहरे पानी की तलाश में मजबूर हैं, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष कठिनाई हो रही है। गुप्तारघाट से लेकर अयोध्या तक स्नान घाटों से सरयू की धारा दूर हो गई है। भक्त गहरे पाट में बचे पानी से आचमन व स्नान कर रहे हैं। सर्वाधिक परेशानी मोक्ष की कामना लिए धर्मनगरी में अंत्येष्टि के लिए आने वाले लोगों को हो रही है। संत तुलसीदास घाट की ओर सरयू की धारा रूठ कर घाटों से नित प्रतिदिन दूरी बनाती जा रही है। संत तुलसीदास घाट पर तो करीब 300 मीटर की दूरी तय करने पर सरयू की धारा का स्पर्श संभव है। सरयू के जलस्तर में प्रतिदिन गिरावट दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को सरयू का जलस्तर 88.72 मीटर रिकॉर्ड किया गया।
85 मीटर है सरयू का शून्य लेवल
धर्मनगरी में प्रतिदिन हजारों लोग सरयू स्नान व दर्शन-पूजन को आते हैं। बड़ी संख्या में अंत्येष्टि को भी लोग आते हैं। ऐसे में धारा घाटों के समीप न होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक सरयू की धारा प्रतिदिन लगभग पांच सेमी घट रही है। आयोग के मुताबिक सरयू का शून्य लेवल 85 मीटर है, जबकि चेतावनी बिंदु 91.73 व खतरे का निशान 92.73 मीटर है। वैज्ञानिकों की मानें तो यदि कुछ दिन और ठंड का असर रहा तो जलस्तर में और भी कमी आएगी।
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बढ़ेगा प्रदूषण और खेती किसानी पर संकट
पर्यावरणविद अवध विश्वविद्यालय के प्रो. सिद्धार्थ शुक्ला ने बताते हैं कि सर्दी के मौसम में पहाड़ी नदियों का पानी कम होता है, पहाड़ों पर बर्फ जम जाने के कारण सरयू के जलस्तर में कमी आई है। रेत खनन जैसी गतिविधियां और मौसम के बदलते स्वरूप ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। भूजल का अत्यधिक दोहन भी सरयू के जलस्तर में निरंतर गिरावट का कारण है। फिलहाल इससे खेती भी प्रभावित होगी, जैव परिस्थिति तंत्र पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा। सरयू में प्रदूषण बढ़ने व भूजल संकट का भी संकेत है।
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घाटों पर पानी सिमटने से स्नान के दौरान फिसलन, कीचड़ और असमान तल की समस्या बढ़ गई है। कई स्थानों पर श्रद्धालु दूर तक चलकर गहरे पानी की तलाश में मजबूर हैं, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष कठिनाई हो रही है। गुप्तारघाट से लेकर अयोध्या तक स्नान घाटों से सरयू की धारा दूर हो गई है। भक्त गहरे पाट में बचे पानी से आचमन व स्नान कर रहे हैं। सर्वाधिक परेशानी मोक्ष की कामना लिए धर्मनगरी में अंत्येष्टि के लिए आने वाले लोगों को हो रही है। संत तुलसीदास घाट की ओर सरयू की धारा रूठ कर घाटों से नित प्रतिदिन दूरी बनाती जा रही है। संत तुलसीदास घाट पर तो करीब 300 मीटर की दूरी तय करने पर सरयू की धारा का स्पर्श संभव है। सरयू के जलस्तर में प्रतिदिन गिरावट दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को सरयू का जलस्तर 88.72 मीटर रिकॉर्ड किया गया।
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85 मीटर है सरयू का शून्य लेवल
धर्मनगरी में प्रतिदिन हजारों लोग सरयू स्नान व दर्शन-पूजन को आते हैं। बड़ी संख्या में अंत्येष्टि को भी लोग आते हैं। ऐसे में धारा घाटों के समीप न होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक सरयू की धारा प्रतिदिन लगभग पांच सेमी घट रही है। आयोग के मुताबिक सरयू का शून्य लेवल 85 मीटर है, जबकि चेतावनी बिंदु 91.73 व खतरे का निशान 92.73 मीटर है। वैज्ञानिकों की मानें तो यदि कुछ दिन और ठंड का असर रहा तो जलस्तर में और भी कमी आएगी।
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बढ़ेगा प्रदूषण और खेती किसानी पर संकट
पर्यावरणविद अवध विश्वविद्यालय के प्रो. सिद्धार्थ शुक्ला ने बताते हैं कि सर्दी के मौसम में पहाड़ी नदियों का पानी कम होता है, पहाड़ों पर बर्फ जम जाने के कारण सरयू के जलस्तर में कमी आई है। रेत खनन जैसी गतिविधियां और मौसम के बदलते स्वरूप ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। भूजल का अत्यधिक दोहन भी सरयू के जलस्तर में निरंतर गिरावट का कारण है। फिलहाल इससे खेती भी प्रभावित होगी, जैव परिस्थिति तंत्र पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा। सरयू में प्रदूषण बढ़ने व भूजल संकट का भी संकेत है।