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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   The plan to send Champat Rai out of Ayodhya has been put on hold for now.

अयोध्या: चंपत राय को राम नगरी से बाहर भेजने की योजना फिलहाल टली, चढ़ावा चोरी मामले में बनाए गए हैं गवाह

Thu, 01 Oct 2026 01:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 01 Oct 2026 01:41 AM IST
सार

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय को अयोध्या से बाहर भेजे जाने की योजना फिलहाल टाल दी गई है। अब उनके 2027 के विधानसभा चुनाव तक अयोध्या में ही रहने की संभावना जताई जा रही है।

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The plan to send Champat Rai out of Ayodhya has been put on hold for now.
चंपत राय - फोटो : amar ujala

विस्तार

राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस की जांच पूरी होने और अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के अयोध्या में बने रहने को लेकर चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय को अयोध्या से बाहर भेजे जाने की योजना फिलहाल टाल दी गई है। अब उनके 2027 के विधानसभा चुनाव तक अयोध्या में ही रहने की संभावना जताई जा रही है।

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चढ़ावा चोरी मामले में दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने चंपत राय को आरोपी नहीं बनाया है। उनका नाम गवाहों की सूची में शामिल है। ऐसे में मौजूदा स्थिति में चंपत राय की कानूनी भूमिका आरोपी की नहीं, बल्कि गवाह की है। आगे अदालत में होने वाली सुनवाई और गवाहों के बयान से उनकी भूमिका का न्यायिक पक्ष सामने आएगा।
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सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा प्रकरण की जांच के दौरान चंपत राय को अयोध्या से बाहर रखने को लेकर चर्चा हुई थी। उनका केंद्र अयोध्या से बाहर किए जाने की चर्चा हो रही थी। अब जांच पूरी होने और चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस विकल्प को फिलहाल टालने की बात सामने आ रही है। इसके पीछे अयोध्या की संवेदनशीलता से लेकर आगामी विधानसभा चुनाव तक कई पहलुओं को वजह माना जा रहा है।
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विरोध की आशंका भी एक पहलू
चढ़ावा चोरी मामले को लेकर जांच पूरी होने के बाद भी अयोध्या में चर्चाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। सूत्रों का कहना है कि ऐसी स्थिति में चंपत राय के अचानक अयोध्या से बाहर जाने पर विरोध या लोगों के आक्रोश की स्थिति बन सकती है। इसी संभावना को देखते हुए फिलहाल उन्हें यहीं रहने देने पर विचार किए जाने की बात कही जा रही है। अयोध्या से पुराना जुड़ाव भी अहम वजहों में है।

चंपत राय लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े रहे हैं। वर्ष 2020 में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद महासचिव के तौर पर उन्होंने मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चढ़ावा चोरी मामले की जांच के दौरान भी चंपत राय अयोध्या में ही रहे। अब जांच पूरी होने और चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी उनके अयोध्या में बने रहने की चर्चा है।

चुनाव से पहले नए विवाद से बचने की कोशिश
2027 का विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं है। राम मंदिर और चढ़ावा चोरी प्रकरण राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में चुनाव से पहले चंपत राय को अयोध्या से बाहर भेजने का फैसला भी राजनीतिक चर्चा को हवा दे सकता है।


विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी हाल में कहा था कि चढ़ावा प्रकरण को विधानसभा चुनाव का मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में चुनाव से पहले चंपत राय को अयोध्या से बाहर किए जाने के फैसले से नए सवाल खड़े होने की आशंका भी बताई जा रही है।

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