फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   The history of Akshaya Tritiya is also linked to the first Parana (breaking of the fast) of Lord Rishabhdev

Ayodhya News: भगवान ऋषभदेव के प्रथम पारणा से भी जुड़ा है अक्षय तृतीया का इतिहास

Sat, 18 Apr 2026 11:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sat, 18 Apr 2026 11:03 PM IST
विज्ञापन
The history of Akshaya Tritiya is also linked to the first Parana (breaking of the fast) of Lord Rishabhdev
भगवान ऋषभदेव का अक्षय तृतीया की पूर्व संध्या पर पूजन करते जैन श्रद्धालु।
अयोध्या। अक्षय तृतीया को सनातन और जैन परंपरा में अत्यंत शुभ, पुण्यदायी और समृद्धि देने वाला पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, तप और शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करता है। जैन समाज के अनुसार इस पर्व का सीधा संबंध प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से है, जिनका जन्म अयोध्या में हुआ था।
विज्ञापन


जैन मान्यताओं के अनुसार भगवान ऋषभदेव ने अयोध्या में राज्य संचालन कर प्रजा को जीवन जीने की कला सिखाई, शिक्षा का प्रसार किया और समाज को नई दिशा दी। बाद में उन्होंने वैराग्य धारण कर दीक्षा ली। दीक्षा के बाद लंबे समय तक लोगों को यह ज्ञात नहीं था कि जैन साधुओं को आहार किस प्रकार दिया जाए। कथा के अनुसार हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस कुमार को स्वप्न के माध्यम से ज्ञान हुआ और उन्होंने भगवान ऋषभदेव को नवधा भक्ति से गन्ने के रस का आहार अर्पित किया। यही भगवान ऋषभदेव का प्रथम पारणा (उपवास के बाद का आहार) माना जाता है। कहा जाता है कि उसी क्षण देवों ने आकाश से रत्नों और पुष्पों की वर्षा की तथा जिस पात्र से आहार दिया गया, उसका रस समाप्त नहीं हुआ। तभी से यह दिवस “अक्षय तृतीया” कहलाया।
विज्ञापन

जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी के अनुसार अक्षय तृतीया केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि त्याग, दान, संयम और समृद्धि का संदेश देने वाला उत्सव है। आज भी देश-विदेश के जैन श्रद्धालु इस पर्व पर उपवास और तपस्या पूर्ण कर गन्ने के रस से पारणा करते हैं। अयोध्या और हस्तिनापुर जैसे तीर्थ स्थलों पर विशेष आयोजन होते हैं। साधु-साध्वियों को आहार दान दिया जाता है और श्रद्धालु इसे महान पुण्य का अवसर मानते हैं। यही कारण है कि इस दिन विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य भी बिना मुहूर्त के शुभ माने जाते हैं। बताया कि रविवार को जैन मंदिर रायगंज में विशेष अनुष्ठान का आयोजन होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed