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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT की रिपोर्ट के बाद तेज होगी पुलिस की जांच, सामने आए कुछ नए तथ्य
Tue, 18 Aug 2026 09:44 AM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: Bhupendra Singh
Updated Tue, 18 Aug 2026 09:44 AM IST
सार
राम मंदिर चढ़ावा और दान से जुड़े मामले में पुलिस की जांच अब एसआईटी की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आगे बढ़ सकती है।आगे पढ़ें पूरी खबर...
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राम मंदिर चढ़ावा और दान से जुड़े मामले में पुलिस की जांच अब एसआईटी की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आगे बढ़ सकती है। ऐसे में रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों और उसके आधार पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर नजर है।
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वहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में ट्रस्ट के बैंक खातों, लेनदेन और आय-व्यय से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल की है। जांच अभी जारी है। एसआईटी की ओर से तैयार रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत किया जाना है।
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इससे पहले राम मंदिर ट्रस्ट की मांग पर प्रदेश सरकार की ओर से गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने जांच के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की है। जांच के दायरे में राम मंदिर ट्रस्ट के बैंक खातों और आय-व्यय का पूरा ऑडिट रिकॉर्ड भी शामिल रहा। जांच टीम ने वित्तीय अभिलेखों के आधार पर चढ़ावे और दान से जुड़े लेनदेन की स्थिति को भी परखा है। यही नहीं राम मंदिर ट्रस्ट में सिफारिश पर की गई नियुक्तियों की भी जांच की गई थी।
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एसबीआई और ट्रस्ट के बीच किए गए अनुबंध की खामियां भी प्रारंभिक रिपोर्ट में एसआईटी ने सरकार के समक्ष रखी थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को क्लीन चिट दी थी लेकिन डॉक्टर अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
हालांकि, एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट के आधार पर किसकी भूमिका तय हुई है, किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है या किसी नई कार्रवाई की जरूरत बताई गई है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
विवेचना में एसआईटी रिपोर्ट बन सकती है आधार
पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में जांच भी चल रही है। अब एसआईटी की रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों और निष्कर्षों को इस विवेचना में शामिल किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से दोबारा पूछताछ, दस्तावेजों का सत्यापन और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल भी की जा सकती है।
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