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Ayodhya News: साफ हुआ सीवर, जलभराव और गंदगी से मिली निजात
Mon, 16 Feb 2026 09:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 16 Feb 2026 09:29 PM IST
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5-रेडियोलॉजी विभाग को जाने वाले रास्ते पर पाटी गई बालू और नालियों में हुआ छिड़काव।-संवाद
अयोध्या। मेडिकल कॉलेज में पिछले कई दिन से चोक हुआ सीवर अब साफ कर दिया गया है। अमर उजाला में खबर छपने के बाद किरकिरी होने पर जिम्मेदारों ने इसकी पहल की है। इससे जगह-जगह हुए जलभराव और परिसर में फैली गंदगी से निजात मिली है।
राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर के अस्पताल परिसर में पिछले कई दिन से सीवर लाइन चोक था। पुराने ट्रॉमा सेंटर के पास एसटीपी बनने के बावजूद उसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा था। इसकी वजह से 300 बेड के पुराने भवन और डीआरटीबी सेंटर के सामने जलभराव था। नवनिर्मित ट्राॅमा सेंटर के सामने शौचालयों से निकले मल-मूत्र खुले में बह रहे थे। इससे मरीज, तीमारदार, चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों को भीषण दुर्गंध और संक्रमण का सामना करना पड़ रहा था।
अमर उजाला ने 15 फरवरी के अंक में ''''मेडिकल कॉलेज में सीवर चोक टैंक ओवरफ्लो, हर तरफ कीचड़'''' शीर्षक खबर प्रकाशित की तो जिम्मेदारों के कान पर जूं रेंगने लगी। जिलाधिकारी ने भी मामले को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने व्यवस्था दुरुस्त करने की पहल की है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार ने टीम के साथ चोक हुई सीवर लाइन का निरीक्षण किया। एसटीपी क्रियाशील करते हुए गंदगी और जलभराव से निजात के निर्देश दिए।
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इसकी वजह से सोमवार को मेडिकल कॉलेज की तस्वीर बदली नजर आई। रेडियोलॉजी विभाग की तरफ जाने वाला रास्ता जलभराव मुक्त दिखा। यहां पर बालू डलवाकर चूने का छिड़काव किया गया था। ऐसा ही नजारा डीआरटीबी सेंटर के सामने भी देखने को मिला। नालियों में छिड़काव किया गया था। प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मर्तोलिया ने बताया कि सोमवार को उन्होंने पूरे परिसर का निरीक्षण किया है। सीवर लाइन की समस्या दूर करते हुए एसटीपी क्रियाशील रखने को कहा गया है। दोबारा परिसर में गंदगी मिलने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर के अस्पताल परिसर में पिछले कई दिन से सीवर लाइन चोक था। पुराने ट्रॉमा सेंटर के पास एसटीपी बनने के बावजूद उसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा था। इसकी वजह से 300 बेड के पुराने भवन और डीआरटीबी सेंटर के सामने जलभराव था। नवनिर्मित ट्राॅमा सेंटर के सामने शौचालयों से निकले मल-मूत्र खुले में बह रहे थे। इससे मरीज, तीमारदार, चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों को भीषण दुर्गंध और संक्रमण का सामना करना पड़ रहा था।
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अमर उजाला ने 15 फरवरी के अंक में ''''मेडिकल कॉलेज में सीवर चोक टैंक ओवरफ्लो, हर तरफ कीचड़'''' शीर्षक खबर प्रकाशित की तो जिम्मेदारों के कान पर जूं रेंगने लगी। जिलाधिकारी ने भी मामले को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने व्यवस्था दुरुस्त करने की पहल की है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार ने टीम के साथ चोक हुई सीवर लाइन का निरीक्षण किया। एसटीपी क्रियाशील करते हुए गंदगी और जलभराव से निजात के निर्देश दिए।
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इसकी वजह से सोमवार को मेडिकल कॉलेज की तस्वीर बदली नजर आई। रेडियोलॉजी विभाग की तरफ जाने वाला रास्ता जलभराव मुक्त दिखा। यहां पर बालू डलवाकर चूने का छिड़काव किया गया था। ऐसा ही नजारा डीआरटीबी सेंटर के सामने भी देखने को मिला। नालियों में छिड़काव किया गया था। प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मर्तोलिया ने बताया कि सोमवार को उन्होंने पूरे परिसर का निरीक्षण किया है। सीवर लाइन की समस्या दूर करते हुए एसटीपी क्रियाशील रखने को कहा गया है। दोबारा परिसर में गंदगी मिलने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।