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Ayodhya News: जैव विविधता पार्क में मियावाकी तकनीक से होगा पौधरोपण
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अयोध्या। चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग पर नगर निगम की ओर से विकसित किए जा रहे जैव विविधता पार्क में मियावाकी तकनीक से पौधरोपण किया जाएगा। इसकी मदद से फूलों के साथ सजावटी पौधे और छायादार पेड़ बहुत जल्दी विकसित हो जाएंगे। स्थानीय नागरिकों के साथ देश-विदेश से यहां आने वाले पर्यटक इस पार्क का आनंद उठा सकेंगे।
जिले में यह दूसरा जैव विविधता पार्क होगा। इसे चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग पर अफीम कोठी के पीछे छह एकड़ में बनाया जा रहा है। इसी तरह का एक अन्य पार्क वन विभाग की ओर से रुदौली के मां कामाख्या धाम के पास बन रहा है। शहर के करीब अफीम कोठी के पीछे बन रहे जैव विविधता पार्क के निर्माण में लखनऊ के नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट की भी मदद ली जा रही है। यहां के वैज्ञानिकों के एक दल ने पिछले दिनों पार्क के निर्माण स्थल का दौरा भी किया था। वैज्ञानिकों की ओर से यहां पर लगाए जा सकने वाले पेड़-पौधों को लेकर मार्गदर्शन किया जा रहा है।
अपर नगर आयुक्त सुमीत कुमार ने बताया कि नगर निगम ने पार्क को विकसित करने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस को सौंपी है। यहां पर कैफेटेरिया, ओपन थियेटर और लाइट एंड साउंड फाउंटेन पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। पार्किंग की भी सुविधा उपलब्ध रहेगी। ओपन थियेटर में नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कैफेटेरिया में अवधी व्यंजन का स्वाद चखने को मिलेगा। एक जनपद-एक उत्पाद योजना के तहत यहां पर अयोध्या में बना गुड़ भी मिलेगा।
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पौधरोपण की जापानी विधि है मियावाकी
मियावाकी पौधरोपण की जापानी विधि है। इसकी मदद से कम और बंजर जमीन में तीन तरह के पौधे झाड़ीनुमा, मध्यम आकार के और छांव देने वाले बड़े पेड़ लगाकर जंगल उगाया जा सकता है। दो फीट चौड़ी और 30 फीट की पट्टी मेंं 100 अधिक पौधे रोपे जा सकते हैं। इन पौधों की वृद्धि दोगुनी तेजी से होती है। तीन साल बाद इनकी देखभाल नहीं करनी पड़ती है।
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जिले में यह दूसरा जैव विविधता पार्क होगा। इसे चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग पर अफीम कोठी के पीछे छह एकड़ में बनाया जा रहा है। इसी तरह का एक अन्य पार्क वन विभाग की ओर से रुदौली के मां कामाख्या धाम के पास बन रहा है। शहर के करीब अफीम कोठी के पीछे बन रहे जैव विविधता पार्क के निर्माण में लखनऊ के नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट की भी मदद ली जा रही है। यहां के वैज्ञानिकों के एक दल ने पिछले दिनों पार्क के निर्माण स्थल का दौरा भी किया था। वैज्ञानिकों की ओर से यहां पर लगाए जा सकने वाले पेड़-पौधों को लेकर मार्गदर्शन किया जा रहा है।
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अपर नगर आयुक्त सुमीत कुमार ने बताया कि नगर निगम ने पार्क को विकसित करने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस को सौंपी है। यहां पर कैफेटेरिया, ओपन थियेटर और लाइट एंड साउंड फाउंटेन पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। पार्किंग की भी सुविधा उपलब्ध रहेगी। ओपन थियेटर में नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कैफेटेरिया में अवधी व्यंजन का स्वाद चखने को मिलेगा। एक जनपद-एक उत्पाद योजना के तहत यहां पर अयोध्या में बना गुड़ भी मिलेगा।
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पौधरोपण की जापानी विधि है मियावाकी
मियावाकी पौधरोपण की जापानी विधि है। इसकी मदद से कम और बंजर जमीन में तीन तरह के पौधे झाड़ीनुमा, मध्यम आकार के और छांव देने वाले बड़े पेड़ लगाकर जंगल उगाया जा सकता है। दो फीट चौड़ी और 30 फीट की पट्टी मेंं 100 अधिक पौधे रोपे जा सकते हैं। इन पौधों की वृद्धि दोगुनी तेजी से होती है। तीन साल बाद इनकी देखभाल नहीं करनी पड़ती है।