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Ayodhya News: राम मंदिर की नींव से पूर्णता तक के साक्षी बने राजनाथ सिंह
Wed, 31 Dec 2025 09:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 31 Dec 2025 09:37 PM IST
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सतीश पाठक
अयोध्या। प्रतिष्ठा द्वादशी में बतौर मुख्य यजमान शामिल हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को आध्यात्मिक यात्रा की निरंतरता का संदेश दिया। मंदिर के भूमिपूजन के बाद उनका यह पहला दौरा था, लेकिन इस दौरे से वह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से मंदिर की नींव से पूर्णता तक के साक्षी भी बने।
राम मंदिर निर्माण के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वसुधैव कुटुंबकम का संदेश देने की हर क्षण कोशिश की। पूरा विश्व एक परिवार है, यही संदेश देने के मकसद से 155 देशों के पवित्र जल से श्रीरामलला का जलाभिषेक किया गया था। इनमें नेपाल की 16 नदियों का जल शामिल था। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह को भी इसी बहाने मंदिर निर्माण प्रक्रिया से जुड़ने का सौभाग्य मिला था।
उन्हें यह सुअवसर 18 सितंबर, 2021 को मिला, जब उनके दिल्ली स्थित आवास पर मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की मौजूदगी में उन्होंने 115 देशों के पवित्र जल का स्वागत किया। इसमें कई देशों के राजदूत भी शामिल थे। इस जल का प्रयोग मंदिर निर्माण से लेकर रामलला के जलाभिषेक तक किया गया। इसी से उनका भावनात्मक जुड़ाव और प्रगाढ़ हुआ था। प्राण प्रतिष्ठा समारोह में तो वह राम मंदिर नहीं आ सके, लेकिन इसी कार्यक्रम से वह स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते रहे। मंदिर की पूर्णता के बाद हो रहे प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह में वह बतौर मुख्य यजमान शामिल हुए तो उनके चेहरे पर आस्था और उत्तरदायित्व का भाव झलकता दिखा।
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मंदिर आंदोलन को राजनीतिक मजबूती देते रहे राजनाथ सिंह
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राम मंदिर आंदोलनों का नेतृत्व तो नहीं किया, लेकिन आंदोलन को राजनीतिक मजबूती देते रहे। भाजपा नेतृत्व में आंदोलन के एजेंडे को वह निरंतर आगे बढ़ाते रहे। विभिन्न राजनीतिक पदों पर रहते हुए उन्हाेंने पार्टी के भीतर प्रमुख निर्णय, समर्थन और प्रचार में महती भूमिका निभाई। अपने भाषणों के जरिये उन्होंने इसी भूमि पर राम मंदिर बनाने का कई बार दावा किया।
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अयोध्या। प्रतिष्ठा द्वादशी में बतौर मुख्य यजमान शामिल हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को आध्यात्मिक यात्रा की निरंतरता का संदेश दिया। मंदिर के भूमिपूजन के बाद उनका यह पहला दौरा था, लेकिन इस दौरे से वह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से मंदिर की नींव से पूर्णता तक के साक्षी भी बने।
राम मंदिर निर्माण के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वसुधैव कुटुंबकम का संदेश देने की हर क्षण कोशिश की। पूरा विश्व एक परिवार है, यही संदेश देने के मकसद से 155 देशों के पवित्र जल से श्रीरामलला का जलाभिषेक किया गया था। इनमें नेपाल की 16 नदियों का जल शामिल था। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह को भी इसी बहाने मंदिर निर्माण प्रक्रिया से जुड़ने का सौभाग्य मिला था।
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उन्हें यह सुअवसर 18 सितंबर, 2021 को मिला, जब उनके दिल्ली स्थित आवास पर मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की मौजूदगी में उन्होंने 115 देशों के पवित्र जल का स्वागत किया। इसमें कई देशों के राजदूत भी शामिल थे। इस जल का प्रयोग मंदिर निर्माण से लेकर रामलला के जलाभिषेक तक किया गया। इसी से उनका भावनात्मक जुड़ाव और प्रगाढ़ हुआ था। प्राण प्रतिष्ठा समारोह में तो वह राम मंदिर नहीं आ सके, लेकिन इसी कार्यक्रम से वह स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते रहे। मंदिर की पूर्णता के बाद हो रहे प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह में वह बतौर मुख्य यजमान शामिल हुए तो उनके चेहरे पर आस्था और उत्तरदायित्व का भाव झलकता दिखा।
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मंदिर आंदोलन को राजनीतिक मजबूती देते रहे राजनाथ सिंह
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राम मंदिर आंदोलनों का नेतृत्व तो नहीं किया, लेकिन आंदोलन को राजनीतिक मजबूती देते रहे। भाजपा नेतृत्व में आंदोलन के एजेंडे को वह निरंतर आगे बढ़ाते रहे। विभिन्न राजनीतिक पदों पर रहते हुए उन्हाेंने पार्टी के भीतर प्रमुख निर्णय, समर्थन और प्रचार में महती भूमिका निभाई। अपने भाषणों के जरिये उन्होंने इसी भूमि पर राम मंदिर बनाने का कई बार दावा किया।